120 मतों से जीतकर एन.पी. प्रजापति बने विधानसभा अध्यक्ष

विधानसभा संवाददाता

भोपाल, 8 जनवरी। 15वीं विधानसभा सत्र के दूसरे दिन प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने अध्यक्ष पद की प्रक्रिया पूर्ण कराई। वोटिंग के बाद एनपी प्रजापति को 120 मतों के साथ विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया। अध्यक्ष पद के लिए प्रोटेम स्पीकर को 5 प्रस्ताव मिले थे, जिसमें से प्रथम 4 प्रस्ताव एनपी प्रजापति के नाम के मिले थे। आसंदी से प्रोटेम स्पीकर ने नियम पांच का हवाला देकर पहले प्रस्ताव को अनुमोदित करते हुए एनपी प्रजापति को अध्यक्ष घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 साल बाद विधानसभा अध्यक्ष के लिए चुनाव कराए गए। प्रोटेम स्पीकर ने जब भाजपा की तरफ से प्रस्तावित किए गए विजय शाह के नाम का प्रस्ताव नहीं पढ़ा तो भाजपा ने इसका विरोध शुरू कर दिया और सदन का बहिर्गमन कर दिया। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा ने राजभवन तक पैदल मार्च करके राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को ज्ञापन सौंपा।
52 साल के इतिहास में अब तक विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध ही होता रहा है। एनपी प्रजापति को अध्यक्ष चुने जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने भारी मन से सदन का बहिष्कार किया। प्रोटेम स्पीकर को कम वरिष्ठता के बाद भी बनाया गया। सदन के बहिर्गमन के बाद प्रोटेम स्पीकर ने वोटिंग कराई तो एनपी प्रजापति को 120 मतों के साथ विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया और उन्हें अध्यक्ष की आंसदी पर बैठा दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही भी शुरू हो गयी। कार्यवाही के दौरान बीएसपी विधायक ने भी गुप्त वोटिंग की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने नियम पांच का हवाला देकर गुप्त वोटिंग कराने से इंकार कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह जब सदन के सदस्यों को नियम की जानकारी दी तो विपक्षी दल भी इसका जवाब नहीं दे सके। नाराजगी के चलते विपक्षी दल राज्यपाल के अभिभाषण में भी शामिल नहीं हुए। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि हम इस अलोकतांत्रिक कार्य का विरोध करेंगे। आदिवासी नेता का नाम नहीं पढ़ा गया। यह काला दिन है, मध्यप्रदेश का। विपक्ष ने चर्चा के बाद राजभवन की ओर कूच कर दिया। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने विजय शाह को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उनके नाम को प्रस्तावित भी नहीं किया गया। यह घोर अलोकतांत्रिक है। संविधान की मर्यादा को तार-तार किया गया। हम एकतरफा कार्रवाई का विरोध करेंगे, हम मूकदर्शक होकर नहीं बैठेंगे। वहीं डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि कार्यसूची में जिन सदस्यों का नाम होगा, उनके नाम को पुकारने की परंपरा है। यहां नियम और परंपरा की धज्जियां उड़ाई गयीं। मनमानी करने के लिए कम वरिष्ठता के व्यक्ति को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया। अगर ये चाहते तो हमारे प्रस्ताव का उल्लेख करते और मत विभाजन करा लेते। जो किया गया, वह असंवैधानिक है। हंगामा बढऩे पर प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा। प्रोटेम स्पीकर के बार-बार अपील करने के बाद भी जब भाजपा विधायक अपनी सीटों पर नहीं गए तो उन्होंने दोबारा कार्यवाही स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया। वहीं, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विपक्ष जानता था कि उसके पास बहुमत नहीं है, उसके बाद भी उन्होंने परंपरा को तोड़ा। सरकार ने अध्यक्ष के ऊपर कोई दबाव नहीं बनाया। उन्होंने अपने विवेक से निर्णय लिया।