कमलनाथ 15 साल सत्ता से बाहर रहे मर्यादाओं के अंदर ही राजनीति की लेकिन शिवराज की भाजपा ने 15 दिन में ही आपा खोया

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
मुध्यप्रदेश के इतिहास में विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर भले ही 55 साल की मध्यप्रदेश विधानसभा की परंपराएं टूट गई हों, लेकिन सत्तारूढ़ दल के नेता मुख्यमंत्री कमलनाथ और विपक्ष में 15 वर्षों के बाद बैठने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच में ऐसी वैमनस्यता स्थापित हो जाएगी, ऐसा कभी सोचा ही नहीं था। संपादक की कलम जब सच्चाई को बयां करते हैं तो फिर कड़वा सच नहीं झेल पाने वाले नेता नाराज भी होते हैं, इसका हमें न पहले फर्क पड़ा जब कमलनाथ विपक्ष में थे और न आज फर्क पड़ेगा, जब 13 वर्षों की सत्ता का सुख भोगकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विपक्षी दल के एक सामान्य विधायक की तरह सदन में दिखाई देने लगे हैं। क्या यह आश्चर्य और चौंकाने वाली बात नहीं है कि जब शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में 13 वर्ष लगातार मुख्यमंत्री रहे, तब उनके ऊपर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने सब्र का बांध कई बार तोड़ा और कहा कि व्यापमं घोटाले में शिवराज सिंह के परिवार के ही सदस्यों का हाथ है, इसकी जांच होनी चाहिए। और तो और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने तो कोई कसर ही नहीं छोड़ी, उन्होंने तो शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह का नाम अधिकारिक रूप से कई बार लिया और श्रीमती साधना सिंह को अवैध रेत खनन से लेकर हर भ्रष्टाचार में घसीटने की कोशिश भी की। परंतु दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता 9 बार छिंदवाड़ा से चुने गए सांसद और आज के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 15 साल सत्ता से दूर रहने के बावजूद भी कभी मर्यादाएं नहीं तोड़ी। और तो और व्यापमं घोटाला हो या रेत खनन का मामला या फिर नर्मदा नदी के किनारे करोड़ों अरबों के पौधारोपण में हुए भ्रष्टाचार का मामला हो, कमलनाथ ने कभी व्यक्तिगत आरोप न तो शिवराज सिंह पर लगाए और न ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह पर और न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य पर। संपादक होने के नाते कमलनाथ जी की यह प्रशंसा नहीं है लेकिन राजनीति में उनकी परिपक्वता के कोई सानी नहीं है, ऐसा कहा जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि आपने जो बंगला मांगा मुख्यमंत्री ने सबसे पहले दिया, भूपेंद्र सिंह ने बंगला रखने को कहा तो मना नहीं किया तो उनके व्यवहार में कमी कहां आई भाजपा ही बताए। जहां तक सवाल है शिवराज जी आप की कार्यशैली और राजनीति का, इस पर सवाल मैं इसलिए खड़ा करता हूं कि आपकी पार्टी अर्थात भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश में साध्वी उमा भारती, बाबूलाल गौर और आपको मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करते हुए 15 साल सत्ता में रही आई, लेकिन कमलनाथ जी ने अपने आप को राजनीति की मर्यादाओं एवं परिपक्वता में ही बांधे रखा, यह बात समझने की जरूरत है। शिवराज जी आप और आपकी पार्टी मात्र 15 दिनों से सत्ता से बाहर है, आप पचा नहीं पा रहे हैं, ऐसा कैसे चलेगा। विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति को लेकर आज आपने उन्हें डॉन तक कह दिया, यह कैसी राजनीति। ठीक है विपक्ष में बैठने की आदत धीरे से ही आएगी, लेकिन जिस कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश की विधानसभा में एक अनुसूचित जाति के वरिष्ठ विधायक को विधानसभा की गरिमामय आसंदी सौंपने का साहस किया है, उसका विरोध जायज नहीं। मैं अपेक्षा कर सकता हूं सलाह नहीं दे सकता क्योंकि मैं राजनीति में भी नहीं हूं, इसलिए कहना चाहूंगा कि आपको सत्ता से बाहर आए केवल 15 दिन हुए हैं, पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया है, इसका मतलब यह भी है कि संघ ने आपके कद को प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बाद का उत्तराधिकारी बनाने का संकेत दिया है तो फिर अब आपको संभल-संभलकर अपनी बात रखी होगी, वरना कद बड़ा हो जाए और लोग आपको खजूर का पेड़ कहें, अच्छा नहीं लगेगा। उन्हें पूरा करेंगे। प्रदेश की जनता के हित के कामों को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। हम पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू किए गए विकास कार्यों की भी नए सिरे से समीक्षा कर रहे हैं। जिन कामों में गड़बड़ी सामने आएगी, उन्हें भी ठीक किया जाएगा।