2019 लोकसभा राहुल बनाम मोदी

देश को चाहिए राहुल गांधी का हाथ, लेकिन भाजपा को चाहिए मोदी का साथ

ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार, 9425002527
भोपाल, 13 जनवरी। देश में इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा-कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम को देखते हुए भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। भाजपा का विश्वास अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिका हुआ है। इस बार भी भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे। लेकिन कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही होंगे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। इस बार बिना गठगंधन के सरकार बनाने में किसी को भी सफलता नहीं मिलेगी। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गठबंधन पर विशेष फोकस करने लगे हैं। राष्ट्रीय हिन्दी मेल ने जब लोकसभा चुनाव को लेकर सर्वे किया तो पता चला कि आज की तारीख में लोकसभा चुनाव होते हैं तो मध्यप्रदेश की 29 में 24 सीटें कांग्रेस को मिल सकती हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में 11 में से 9 और राजस्थान में 25 में से 19 सीटें कांग्रेस को मिलती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में कांग्रेस को देश में 180 सीटें मिलने का अनुमान है। तो वहीं भारतीय जनता पार्टी को पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 160 सीटें मिल सकती हैं। वहीं बात करें उत्तरप्रदेश की तो वहां हाल ही में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच हुए गठबंधन ने भी भाजपा और कांग्रेस की मुश्कि लें बढ़ा दी हैं। बसपा सुप्रीमो मयावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच गठबंधन हो चुका है। जिसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि हम इस बात से चिंतित नहीं हैं, यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस की उपेक्षा हुई है। राहुल ने कहा, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने फैसला लिया है और हमें इस मामले में अपना फैसला लेना है।
कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए काफी बड़े प्रस्ताव हैं। उन्होंने कहा- मैं बसपा और समाजवादी पार्टी के नेताओं का काफी सम्मान करता हूं। उनके पास यह अधिकार है कि वे क्या करना चाहते हैं। वहीं यह हमारे ऊपर है कि हम कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश में मजबूत बनाएं। कांग्रेस अध्यक्ष ने दुबई में एक प्रेस वार्ता में कहा कि हम यूपी में अपनी पूरी क्षमता के साथ लड़ेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस कई राज्यों में अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन कर रही है। पर यूपी में भाजपा को हराने के लिए माया और अखिलेश के साथ आने से हम चिंतित नहीं हैं। मालूम हो कि 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन किया था। पर 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए सपा ने बसपा के साथ हाथ मिला लिया है। सपा-बसपा के गठबंधन से भाजपा के सामने वर्ष 2014 के प्रदर्शन को 2019 में दोहरा पाना काफी मुश्किल होगा। इस गठबंधन से भाजपा के सामने चुनौतियां तो खड़ी हो ही गई हैं, उसकी कमजोरियां और उलझनें अलग चुनौती बनी हैं। 2014 में यूपीए सरकार के लगातार 10 सालों की खामियों का फायदा उठाकर केंद्र में भाजपा सरकार आई थी। भाजपा सरकार को अपने पौने पांच साल के कार्यकाल और करीब पौने दो साल की प्रदेश सरकार की सत्ता की कमजोरियों को चुनाव के लिए रह गए अब करीब 100 दिनों में दूर करना आसान नहीं होगा।
राष्ट्रीय हिन्दी मेल की यूपीए गठबंधन के दलों तथा एनडीए गठबंधन के दलों के नेताओं के सूत्रों से संपर्क होने पर पता चला है कि भाजपा संख्या बल पर बड़ी पार्टी के रूप में उभर तो सकती है लेकिन सरकार बनने की स्थिति में नरेंद्र मोदी के स्थान पर अटल बिहारी वाजपेयी जैसे उदार विचारधारा के अनुयायी नेताओं में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसे नेताओं का नाम समय आने पर आगे आएगा, जबकि दूसरी ओर यूपीए गठबंधन में कांग्रेस की सीटें 200 से कम होती हैं तो फिर राहुल गांधी मल्लिकार्जुन खडग़े जैसे नेताओं का नाम प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करने में पीछे नहीं रहेंगे, लेकिन जिस तरह देश के अंदर बदलाव का वातावरण है, उसमें यदि कांग्रेस को 200 से अधिक सीटें मिलती हैं तो राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना तय होगा। यदि इसी तरह भाजपा के समर्थन में एनडीए को बहुमत मिलता है और भाजपा को 200 से ऊपर सीटें मिलती हैं तो नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री होंगे लेकिन एनडीए में भाजपा की सीटें 200 से कम हो जाएं तो फिर नीतिश कुमार, नवीन पटनायक या शिवराज सिंह चौहान ऐसे चेहरे होंगे जिनको प्रधानमंत्री पद के लिए एनडीए में महत्व मिल सकेगा।