आठ महीने बाद कौन होगा मुख्य सचिव, खेतान या मंडल…?

भूपेश बघेल की सरकार के फैसले होते हैं आधी रात के बाद

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि 1983 बैच के अजय सिंह सबसे कम कार्यकाल के मुख्य सचिव रहे जिसका कारण था कि वे एक पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की कोटरी से बाहर निकलकर कभी यह नहीं सोच पाए कि आने वाला वक्त यदि बदलाव का है तो सरकार कांग्रेस की बन सकती है। अजय सिंह के बारे में यहां तक कहा जाता था कि कई फाइलों पर उन्होंने आचार संहिता लागू होने के बाद यह कहकर मौन स्वीकृति जारी कर दी थी कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से पिछली तारीखों में अनुमोदन करा लिया जाएगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। पूर्व मुख्य सचिव अजय सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को यह बताने में भी असफल रहे कि पप्पू भाटिया की शराब नीति के कारण सरकार डूबने वाली है। समझा जाता है कि पूर्व मुख्य सचिव अजय सिंह ने एक बार भी फाइल बुलाकर चुनाव के पहले सरकार को शराब बेचना चाहिए या नहीं, इस पर विचार तक नहीं किया और छत्तीसगढ़ जो टाइगर स्टेट कहलाता था वह सिम्बा टेरी-टेरी में बदल गया और डॉ. रमन सिंह की सरकार शराब में डूब गई। लेकिन अब पछताए होत क्या अर्थात अब पश्चाताप करने से क्या होता है। जब वाइट टाइगर (भूपेश बघेल) ने बकौल राहुल गांधी छत्तीसगढ़ की 68 सीटों पर कांग्रेस की टेरी-टेरी को स्थापित कर दिया। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कई पत्रकारों से यह कहते सुना कि कोई भी नौकरशाह जिसका काम अच्छा है वह अब डॉ. रमन सिंह का नहीं है, वह मेरी सरकार का है। उसी दिन राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस संपादक ने समझ लिया था कि 1983 बैच के अजय सिंह के दिन लद गए। होना क्या था दिल्ली से लौटकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक दिन आधी रात के बाद वरिष्ठता के आधार पर दुर्ग जिले में काम कर चुके अपने एक पुराने नौकरशाह सुनील कुजूर को ईमानदारी का इनाम दे दिया और जैसा कभी होता नहीं मात्र 8 महीने के लिए सुनील कुुजूर छत्तीसगढिय़ा के रुप में मुख्य सचिव के कुर्सी पर बैठ गए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पता है कि 8 महीने बाद अब जो भी मुख्य सचिव बनेगा, उसके महत्व को स्थापित करना प्रारंभ कर लिया जाए। इसी कड़ी में उन्होंने वरीयता के आधार पर अतिरिक्त मुख्य सचिव चितरंजन खेतान से परामर्श लेने का सिलसिला शुरु कर दिया है। दूसरी ओर अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.पी. मंडल को 7 भारी-भरकम विभागों (पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विकास आयुक्त, महानिदेशक एस.आई.आर.डी., गृह, जेल एवं परिवहन तथा परिवहन आयुक्त) से लाद दिया है। मुख्य सचिव के दौड़ में हालांकि वी. सुब्रमण्यम भी पीछे नहीं है। लेकिन उनके मुख्य सचिव बनने का रास्ता इसलिए बंद हो गया है  क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बना दिए गए हैं। लेकिन बताते हैं छत्तीसगढ़ आने का लालच ने उन्हें बेचैन कर रखा है। प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गयी है कि सी.के. खेतान पुराने कांग्रेस हैं और आर.पी. मंडल के बारे में कहा जाता है कि ना तो वे भाजपाई थे और कांग्रेसी थे। लेकिन राहुल गांधी के जबरदस्त फैन है और डिलेवरी सिस्टम तथा गुड गवर्नेंस के मामले में दोनों नौकरशाह 24 कैरेट के माने जाते हैं। इसलिए खेतान और आर.पी. मंडल में वरीयता, योग्यता, मैरिट के साथ-साथ इस बात का भी आंकलन किया जाएगा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए इन दोनों में से किस पर बेहतर मेकेनिज्म उपलब्ध है। चार दशकों से अधिक नौकरशाही के विषय में मेरी पत्रकारिता को 10 में से 10 नंबर देता है। लेकिन जब तक 10 प्लस 2 का सर्टिफिकेट नहीं मिलता तब तक कैरियर में आगे के रास्ते नहीं खुलते हैं इसलिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथ में हैं प्लस टू श्री खेतान को दें या श्री मंडल को। लेकिन यह बात तय है 8 महीने के बाद श्री कुजूर सेवानिवृत्त हो जाएंगे, नई जिम्मेदारी संभालेंगे और चितरंजन खेतान अथवा आर.पी. मंडल छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सचिव होंगे।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के मुद्रक, प्रकाशक, स्वामी एवं प्रधान संपादक हैं।