कमलनाथ लगा सकते हैं मंत्रियों के लिए प्रशिक्षण सत्र

गुड गवर्नेंस, प्रशासन के कामों में तेजी लाने और आम जनता को त्वरित लाभ देने
सुनील दत्त तिवारी, 9713289999
भोपाल, 31 जनवरी। मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार सवा सात करोड़ जनता की आशा और अपेक्षा पर खरा उतरना चाहती है। साथ ही कांग्रेस के वचन पत्र को बड़ी तेजी से लागू करते हुए नए संकल्पों पर काम करना चाहती है। दरअसल, कमलनाथ अपने 40 वर्षों की राजनैतिक और प्रशासनिक दक्षता का पूरा उपयोग प्रदेश में गुड गवर्नेंस के लिए करना चाहते हैं, लेकिन मंत्रिमंडल की अनुभव में कमी राह में रोड़ा बन रही है।
इसी को ध्यान में रखकर आगामी कुछ दिनों में मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के लिए एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया जाएगा। जिसमें उच्च स्तर पर समावेशी निर्णय लेने, बिना दबाव, राजनैतिक हस्तक्षेप के बिना और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बेहतर परिणाम देने के साथ ही जटिल स्थिति में अपने विभागीय प्रमुख से समन्वय बैठाते हुए जनभावनाओं के अनुरूप शासन संचालित किए जाने के गुर सिखाए जाएंगे। दरअसल, अभी कमलनाथ मंत्रिमंडल में 28 कैबिनेट मंत्री हैं, जिनमें 21 पहली बार के मंत्री हैं। लिहाजा सरकारी काम को समझने और नियम-प्रक्रिया में अनुपालन कराने में तालमेल की कमी दिखाई दे रही है।
मंत्रियों को प्रशासनिक काम में दक्ष करने के लिए प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। इसके लिए एक दिन की पाठशाला अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल में फरवरी में हो सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने स्तर पर इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। हालांकि, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा तेजी के साथ काम करने की है। यही वजह है कि वे मंत्रालय में ज्यादा से ज्यादा वक्त दे रहे हैं। यही अपेक्षा उनकी मंत्रियों से भी है। इसको लेकर वे उन्हें ताकीद भी कर चुके हैं कि ज्यादा से ज्यादा वक्त विभाग को दें। नई जिम्मेदारी होने की वजह से इसमें मंत्रियों को स्वभाविक तौर पर समय लग रहा है। इसे देखते हुए मंत्रियों को सरकारी कामकाज का प्रशिक्षण दिलाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें बिजनेस रूल्स, कार्य आवंटन नियम, मंत्रालय की कार्यप्रणाली को लेकर जानकारी दी जा सकती है। सत्ता संतुलन और सभी को संतुष्ट रखने के हिसाब से मंत्रिमंडल का गठन किया गया है जिसमें कई युवा मंत्रियों के पास भारी-भरकम विभाग आ गए हैं और इसमें से तो कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास दो से अधिक महत्वपूर्ण विभाग का दायित्व है, लिहाजा एक्यूरेसी, एफ्फिसिअन्सी और अवेलेबिलिटी तीनों पर ही प्रतिकूल प्रभाव से शत-प्रतिशत परिणाम अभी भी अपेक्षित है। दूसरा बड़ा कारण विभाग के बड़े अधिकारी पिछले 15 वर्षों के दौरान एक खास विचारधारा से प्रभावित होकर काम कर रहे थे। अब जबकि सरकार बदल गयी है और सभी जानते हैं कि कांग्रेस की कार्यशैली एकदम अलग है, लिहाजा उन्हीं अधिकारियों के साथ अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों का बेहतर कदमताल जनहित में हो, इस प्रशिक्षण सत्र का एक उद्देश्य यह भी है। हालांकि एक माह से अधिक के समय में कमलनाथ सरकार ने कई मील के पत्थर स्थापित तो कर दिए हैं, लेकिन उन कामों के लिए पूरा का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री कमलनाथ के अनुभव और होम वर्क को दिया जा रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के दावोस दौरे के दौरान मंत्रियों के ऐसे बयान आए, जो सरकार को प्रतिबिंबित नहीं करते थे, लिहाजा कमलनाथ ने दावोस से ही मंत्रियों के ऐसे बयानों पर नाराजगी जाहिर की थी। मंत्रियों के लिए प्रशिक्षण का विचार भी ऐसे ही कई घटनाक्रमों के बाद आया हुआ लगता है। यह पहली बार होगा, ऐसा भी नहीं है, इसके पहले भी कई सरकारों ने बड़े प्रोफेशनल्स की सहायता से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं।

तीन विधायकों का
ध्यान रखेंगे एक मंत्री
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में सुशासन की यथार्थ परिभाषा गढऩे के लिए एक नवाचार पर भी काम करना शुरू किया है। मुख्यमंत्री की सोच है कि कांग्रेस विधायकों को भी ताकतवर किया जाए, ताकि क्षेत्रीय मतदाता की अपेक्षाओं पर विधायक अपने आपको सिद्ध कर सकें। अब प्रदेश के सभी 28 मंत्रियों को क्षेत्रवार तीन-तीन विधायकों का प्रभारी बनाए जाने की तैयारी है। जिससे ये तीनों विधायक अपने क्षेत्र की किसी भी समस्या का निराकरण अपने प्रभारी मंत्री के माध्यम से करा सकें। इससे प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया जा सकेगा। देश में इस तरह का यह पहला नवाचार होगा।