मंत्री भनोत अपने खर्च पर करेंगे अतिथियों का सत्कार

खर्च होने वाली राशि के बिल जीएडी के बजाय मंत्री के पास जाएंगे * मितव्ययिता के लिए खुद से की शुरूआत

  • सुनील दत्त तिवारी
    भोपाल, 13 फरवरी। प्रदेश की जर्जर आर्थिक स्थिति के बीच गैर-जरूरी खर्चांे में कटौती का फरमान निकालने वाले प्रदेश के वित्त मंत्री तरुण भनोत ने पहला कदम खुद आगे बढ़ाया है। वित्त मंत्री भनोत ने तय किया है कि मंत्रालय स्थित दफ्तर में उनसे मिलने वाले सभी मेहमानों और अन्य आगंतुकों के सत्कार पर होने वाला खर्च वे स्वयं वहन करेंगे। सत्कार पर खर्च होने वाली राशि सरकारी खजाने से खर्च नहीं होगी। भनोत ने इसके लिए बाकायदा एक पत्र सामान्य प्रशासन विभाग को लिखा है। पत्र में उन्होंने लिखा कि उनके कार्यालय के सत्कार व्यय पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं किया जाए। वे खुद इसे वहन करेंगे। मध्यप्रदेश के गठन के बाद से अब तक की कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में मितव्ययिता के लिए अपनी तरह से ऐसी पहल करने वाले भनोत पहले मंत्री हैं। मितव्ययिता के नाम पर अब तक मंत्री सरकारी खर्चों में कटौती की बात करते रहे हैं, लेकिन किसी ने भी खुद से इसकी शुरुआत नहीं की। वित्त मंत्री का पत्र मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे मंत्रालय के अधीक्षक को भेज दिया है। मंत्रालय की नई एनेक्सी बीवी-2 में तीसरी मंजिल पर स्थित वित्त मंत्री भनोत के कार्यालय में आगे से सत्कार पर होने वाले व्यय का बिल का भुगतान अब जीएडी से होने के बजाय सीधे वित्त मंत्री के निजी स्टाफ के माध्यम से वित्त मंत्री को भेजा जाएगा। इसके बाद वित्त मंत्री स्वयं उसका भुगतान करेंगे। मंत्रालय में मंत्रियों से भेंट करने आने वाले आगंतुकों और अधिकारियों के लिए चाय, बिस्किट, दही, लस्सी, छाछ और समय-समय पर नाश्ता आदि मंगाया जाता है। मंत्रालय में इसके लिए इंडियन कॉफी हाउस और सांची का पार्लर संचालित है। मंत्रियों और अधिकारियों के कक्षों में सत्कार के लिए लगने वाली खाद्य सामग्री आदि का भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किया जाता है। इसके लिए अलग से सत्कार मद है। मध्यप्रदेश में कर्जमाफी के बाद अब कमलनाथ सरकार खजाने पर पड़े बोझ को कम करने की कवायद में जुटी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वित्त मंत्री भनोत को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। किसानों की कर्जमाफी के बाद 55 हजार करोड़ के खर्च का असर आने वाले वित्तीय वर्ष में भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि सरकार अब अपने खर्चों में लगातार कटौती कर रही है, इसलिए प्रदेश के प्रशासनिक अमले को मितव्ययिता का संदेश देने के लिए वित्त मंत्री ने इसकी शुरुआत पहले खुद से की है।

जीएडी और वित्त विभाग के अफसर हुए कायल
वित्त मंत्री भनोत की इस पहल पर जीएडी और वित्त विभाग के अफसर कायल हो गए हैं। भनोत के इस पत्र की दोनों विभागों में चर्चा हो रही है। इस पहल का असर यह भी हो रहा है कि वित्त विभाग द्वारा पूर्व में जारी मितव्ययिता संबंधी आदेश-निर्देशों पर वित्त विभाग के अधिकारी सख्ती से पालन कराने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व में जारी ऐसे सभी आदेशों का हवाला देकर इन मितव्ययिता के निर्देशों का गंभीरता से पालन करने के लिए वित्त विभाग एक नया परिपत्र जारी करने जा रहा है।

इनका कहना है
मुझसे मिलने वाले लोग मेरे अपने आत्मीयजन हैं, जिनके स्वागत-सत्कार का धर्म मेरा है और लोगों का सत्कार करने में मैं सक्षम हूं। इसका वित्तीय भार सरकार पर क्यों आए ?

  • तरुण भनोत, वित्त मंत्री,
    मप्र शासन