एनडीए सरकार के तहत हुआ राफेल सौदा यूपीए की तुलना में 2.86 फीसदी सस्ता


नई दिल्ली, 13 फरवरी। राफेल सौदे पर बहुप्रतीक्षित भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश हो गयी, यह रिपोर्ट सरकार और विपक्ष दोनों के लिए मिला जुला है, दोनों राफेल डील को लेकर एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनडीए सरकार ने यूपीए से 2.86 फीसदी सस्ते में डील की है। रिपोर्ट में दावा कहा गया है कि मौजूदा डील में विमानों की डिलिवरी पुराने डील के मुकाबले एक महीने पहले होगी, साल 2007 में की गयी डील के अनुसार भारत की जरूरतों के मुताबिक तैयार विमान 72 महीने में भारत आते जबकि साल 2016 में जो डील की गयी उसके मुताबिक ये विमान 71 महीने में ही तैयार हो जाएंगे। इस डील को लेकर सरकार की जो सबसे ज्यादा आलोचना की जा रही थी वह यह थी कि विमानों की संख्या 126 से घटकर 36 हो गयी, इस पर सरकार ने कहा था कि उसने भारतीय वायुसेना की अविलंब जररूतों को ध्यान में रखते हुये ऐसा किया है, इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट में 36 राफेल जेट्स खरीदने पर दिये गए जवाब में सरकार ने जरूरत का हवाला दिया था। हालांकि कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सौदे के इस पहलू को बदलने से डिलीवरी टाइम के संदर्भ में थोड़ा लाभ मिला है, रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2007 में दसॉ द्वारा पेश किए गए शेड्यूलिंग के अनुसार पहले 18 उडऩे वाले विमानों को अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 37 महीने से 50 महीने के बीच दिया जाना था और अगले 18 को, एचएएल में बनना था जो 49 से 72 महीने के भीतर मिलता।