सत्ता के विकेन्द्रीकरण में कमलनाथ का दूसरा बड़ा कदम, विधायक हुए पॉवरफुल


1956 के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने विधायकों के अधिकार और महत्व को समझा, फिर उठे


प्रशासनिक संवाददाता
भोपाल, 13 फरवरी।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने विधायकों को पावरफुल बनाने और सत्ता का विकेन्द्रीकरण करने के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। 1956 के बाद पहली बार प्रदेश में विधायकों की मर्जी भी चलेगी। खास बात तो ये है कि अभी तक मुख्यमंत्री और मंत्री के कहने पर ही तबादले किए जाते रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अब विधायकों को भी ये हक दे दिया है कि वे किसी का भी तबादला करवा सकते हैं। सीएम मॉनिट में जिन भी विधायकों ने तबादले का आवेदन किया है, उनकी मांग पूरी होगी। बताया जा रहा है कि सीएम मॉनिट में विधायकों द्वारा ट्रांसफर के सौ से भी ज्यादा आवेदन हैं, लेकिन इसमें से कमलनाथ ने ए-और ए-प्लस कैटेगरी के ट्रांसफर आवेदनों को मंजूरी देने के निर्देश मुख्य सचिव एसआर मोहंती को दिए हैं। इनकी संख्या करीब 60 है। सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों का कहना है कि 2017-18 की तबादला नीति में मौजूद जिलों व तहसीलों के बीच होने वाले तबादलों के लिए भी प्रभारी मंत्रियों को मौखिक रूप कह दिया गया है। प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से ही ये तबादले हो जाएंगे। सरकार के इस फैसले के बाद अधिकारियों में खलबली मच गई है। दरअसल, सीएम मॉनिट में विधायकों ने भी अफसरों के तबादले के लिए आवेदन दिया था, करीब सौ से ज्यादा आवेदन प्राप्त किए गए है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आबकारी, पुलिस व नगरीय विकास विभाग के किसी ना किसी अधिकारी के तबादले की बात कही गई है। जिसे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वीकार कर लिया है और मुख्य सचिव एसआर मोहंती को निर्देश देते हुए कहा है कि विधायकों की मांगें पूरी की जाएं। हालांकि इसमें से कमलनाथ ने ए व ए प्लस कैटेगरी के ट्रांसफर आवेदनों को मंजूरी देने के ही निर्देश दिए हैं, जिनकी संख्या करीब 60 के आसपास बताई जा रही है। अभी तक साठ दिन में कमलनाथ सरकार साढ़े सात सौ तबादले कर चुकी है। इस नए निर्देशों के बाद इनकी संख्या एक हजार से ऊपर निकल सकती है।
अब विधायकों की भी सुनेंगे अधिकारी : मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस ऐतिहासिक निर्णय के बड़े दूरगामी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। दरअसल पिछले पंद्रह वर्षों के दौरान विधायकों की शक्तियां बड़ी सीमित थीं। कई बार तो विधायकगण एक अर्दली का स्थानांतरण भी करा पाने में कई चक्कर लगा आते थे। चतुर्थ और तृतीय वर्ग के कर्मचारियों के पोस्टिंग और स्थानांतरण अलिखित आदेश तो माननीयों के पास थे, लेकिन विभागीय मंत्री से पटरी नहीं बैठने से यह अधिकार भी शिथिल हो जाता था। राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति में तो सीधा दखल सीएम हाउस का ही होता था। अब इस निर्णय के बाद स्थानीय विधायक अपने विचारधारा के अधिकारी के साथ मिलकर अपनी विधानसभा का समुचित विकास कर पाएंगे और जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर भी जनता के लिए बेहतर सुविधा का दबाव बना पाएंगे।
इनका कहना है
शपथ ग्रहण करते ही मुख्यमंत्री जी ने नवाचार और ऐतिहासिक, साहसिक फैसले लिए हैं। लंगड़ी अर्थव्यवस्था के बाद किसान कर्जमाफी का बड़ा फैसला और अब माननीय विधायकों को प्रशासनिक रूप से मजबूत करने का उनका यह फैसला स्वागत और अभिनन्दन योग्य है। इस निर्णय से विधायकों का भी आत्मबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कसावट आएगी।
हर्ष यादव, मंत्री, मप्र शासन
कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र ही पहचान रही है, सत्ता के विकेन्द्रीकरण की शुरुआत ही कांग्रेस ने की है। मुख्यमंत्री कमलनाथ जी हमेशा लोकतंत्र को मजबूत बनाते हुए जनता के हाथ में जिम्मेदारी सौंपने के प्रतिबद्ध रहे हैं। इसी का परिणाम है कि अब माननीय विधायकों को भी प्रशासन में सुशासन के लिए मजबूत बनाया जा रहा है।
प्रवीण पाठक, विधायक, ग्वालियर (दक्षिण)

मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रमिकों के बच्चों के लिए रीवा, शहडोल, छतरपुर और रतलाम में श्रमोदय विद्यालय खुलेंगे


निर्माण श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिये प्रदेश के चार शहरों रीवा, शहडोल, छतरपुर और रतलाम में श्रमोदय विद्यालय खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर खोले जाने वाले इन श्रमोदय विद्यालयों में मजदूरों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ ही प्रशिक्षण की भी व्यवस्था रहेगी। राज्य शासन ने इस संबंध में आज आदेश जारी कर दिये हैं। चार श्रमोदय विद्यालय के निर्माण के लिये प्रति विद्यालय 50 करोड़ के मान से 200 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। साथ ही इन विद्यालय की फर्नीशिंग और अन्य कार्यों पर प्रति विद्यालय 10 करोड़ के मान से 40 करोड़ रूपये का व्यय होगा। प्रत्येक विद्यालय के संचालन के लिये 10 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय संभावित है। श्रमोदय विद्यालयों में श्रमिकों के बच्चों को पूर्णत: निशुल्क शिक्षा, गणवेश, भोजन तथा पठन-पाठन की सामग्री उपलब्ध करवायी जाएगी। प्रत्येक विद्यालय में छठवीं से बारहवीं हर कक्षा में 160 छात्र-छात्राएँ अध्ययन करेंगे। श्रमोदय विद्यालय की क्षमता 1120 छात्र-छात्राओं के बीच होगी। इस तरह खुलने वाले चारों नये श्रमोदय विद्यालयों में लगभग 4480 विद्यार्थी अध्ययन करेंगे।