मेरी मर्जी, मैं चाहे जो करूं

एमपी अजब है, अजब था और अजब रहेगा, शायद मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाह दीपाली रस्तोगी इस बात को चरितार्थ करने के लिए पूरी तल्लीनता से लगी हैं। बावजूद इसके कि सूबे के मुखिया हर दिन कहते हैं वक्त है बदलाव का, लेकिन जनजातीय कार्य महकमे में यह दिखाई नहीं देता। इन दिनों आयुक्त जनजाति कार्य विभाग के द्वारा पांच मार्च को निकाला गया एक आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक प्राथमिक शिक्षक पर विभाग इतना महरबान हो गया कि उसका स्थानांतरण सहायक आयुक्त के तौर पर कर दिया गया। विभाग का यह आदेश हैरान करने वाला है। इस आदेश को पाकर शिक्षक भी फूले नहीं समा रहे हैं। आखिर देने वाला जब भी देता है, छप्पर फाड़ कर देता है। यह याकूब मियां से बेहतर कौन जानता है। इसलिए मध्यप्रदेश को कहते हैं एमपी अजब है, सबसे गजब है…। … खबरची