प्रजातंत्र में सबसे बड़ा दान मतदान

शकील सिद्दीकी
किसी भी देश के मजबूत लोकतंत्र के लिए उस देश के प्रत्येक मत की अहम भूमिका होती है। हमारे द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र का एक हिस्सा बनकर सरकार तक समाज की समस्याओं को उजागर करके उनका हल निकालता है। यदि हमें सरकार का काम पसंद नहीं है, तो मतदान हमें फिर से अवसर देता है कि हम नई सरकार को चुन सकें। देश का हर एक नागरिक जब मतदान के महत्त्व को समझकर मत देता है, तभी देश को ईमानदार और काम करने वाले प्रतिनिधि मिलते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। आपका एक मत देश की दशा एवं दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण साबित होगा। यदि चुने हुए जनप्रतिनिधि स्वच्छ छवि, ईमानदार और योग्य होंगे, तो देश का कोई भी नागरिक मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित नहीं रहेगा और भ्रटाचार में कमी आएगी, जिससे देश विकास की ओर बढ़ेगा।
भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक व्यक्ति जिनकी आयु 18 वर्ष हो जाती है उसे वोट बनवाने का अधिकार मिल जाता है। इतना ही नहीं किसी भी नागरिक को धर्म, जाति, वर्ण, संप्रदाय या ोलग भेद के कारण मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। वोट के अधिकार की बदौलत जैसा भविष्य अपने देश का चाहते हैं उसका निर्णय ले सकते हैं क्योंकि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है इसमें जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन यानि सबकुछ जनता है। अपने बीच में से ही मनचाहे व्यक्ति को जनप्रतिनिधि के रूप में चुनते हैं और वह क्षेत्र के विकास की बात सरकार तक पहुंचाता है।
21वीं सदी का भारत का सपना दिखाने वाले नेताओं को पहली बार इस सदी के वोटर से रूबरू होना पड़ेगा। इस सदी में जन्मे लोग पहली बार मतदान करेंगे। उनके सपने और सवाल भी चालीस पार के मतदाताओं से अलहदा होंगे। नेताओं के साथ-साथ दलों के लिए भी नए युवा वोटरों को संतुष्ट करना आसान नहीं होगा। अन्य मांगों के साथ ही उनकी पसंद युवा प्रत्याशी भी होंगे। सही मायनों में इस बार चुनाव में युवा वोटर देश का भविष्य तय करेंगे। युवा मतदाता उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जो पहली बार हमारे देश में इस वर्ष होने वाले आम चुनाव में मतदान करेंगे और 17वीं लोकसभा का स्वरूप तय करेंगे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव में नौ फीसदी वोटर पहली बार शामिल होंगे। देश में 90 करोड़ लोग इस बार वोट डालेंगे। इनमें से 8.40 करोड़ नये मतदाता हैं. करीब 1.5 करोड़ युवा मतदाताओं की आयु 18-19 साल के बीच है। 25 करोड़ वोटर 24 साल से कम उम्र के होंगे। ये मतदाता इसलिए भी बेहद खास हैं, क्योंकि यह बेहतर तरीके से जानकारी को हासिल करते हैं, तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और अपनी स्वतंत्र सोच रखते हैं। यही वह वर्ग है जो चुनावों में सबसे अधिक बढ़-चढ़ कर भागीदारी करता है। इस वर्ग पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें हैं। यही कारण है कि इस आयु वर्ग को ध्यान पर रख ही प्रत्याशी प्रचार की रणनीति बना रहे हैं। सभी प्रमुख दलों की युवा इकाइयां इन युवाओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं। युवा वोटरों की पीढ़ी अपने विवेक पर आधारित मतदान के जरिए 21वीं सदी के भारत का भविष्य भी निर्धारित करेगी।
लोकसभा चुनाव 2019 में 29 राज्यों की 282 सीटों पर युवा निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर पता चलता है कि इन सीटों पर 2014 में जितना जीत का अंतर था, 2019 में पहली बार वोट करने वालों की संख्या उससे कहीं ज्यादा हो सकती है। 1997 और 2001 के बीच जन्म यह मतदाता पिछले आम चुनाव में मतदान के योग्य नहीं था। अनुमान है कि हर लोकसभा सीट पर औसतन 1.49 लाख वोटर ऐसे होंगे जो पहली बार मतदान करेंगे। यह आंकड़ा 2014 में 297 सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा है। इनमें से कुछ मतदाताओं ने 2014 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में वोट डाले होंगे, मगर आम चुनाव में मतदान का यह पहला मौका होगा। कई बार लोग भावावेश में मतदान का बहिष्कार तक का निर्णय कर लेते हैं और पांच साल में अपनी सरकार चुनने के लिए मिलने वाले मौके को गंवा देते हैं इससे अधिक गंभीर बात क्या होगी। आखिर नागरिकों को भी अपने दायित्व को समझना होगा। सबकुछ सरकार पर ही ढोलना कहां का न्याय है ? भले ही हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करें पर लाख प्रयासों के बावजूद लोकतंत्र के प्रति आम आदमी की निष्ठा अभी तक परिलक्षित नही हो रही है। यह सब तो तब है जब पिछले दिनों ही सर्वोच्च न्यायालय की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी आई कि जो मतदान नहीं करते उन्हें सरकार के खिलाफ कुछ कहने या मांगने का भी हक नहीं है।
आखिर क्या कारण है कि शत-प्रतिशत मतदाता मतदान केन्द्र तक नहीं पहुंच पाते ? सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी और चुनाव आयोग के मतदान के प्रति लगातार चलाए जाने वाले केम्पेन के बावजूद मतदान का प्रतिशत ज्यादा उत्साहित नहीं माना जा सकता। चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों की माकूम व्यवस्था व बाहरी पर्यवेक्षकों के कारण अब धन-बल व बाहु बल में काफी हद तक कमी आई है। ईवीएम और चुनाव आयोग के निरंतर सुधारात्मक प्रयासों का ही परिणाम है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावों में दुरुपयोग के आरोप तो अब नहीं के बराबर ही लगते हैं। छिटपुट घटनाओं को छोड़ भी दिया जाए तो अब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। सभी मतदाताओं को अपने मत का उपयोग अवश्य करना चाहिए। क्योंकि यदि पढ़े लिखे जागरूक लोग ही मतदान नहीं करेंगे तो समाज के बीच से गलत प्रत्याशी का चयन होगा। म सभी को बिना किसी स्वार्थ के वोट डालना चाहिए और किसी ऐसे प्रत्याशी को वोट देना चाहिए जो क्षेत्र का विकास कराएं।
चुनाव आयोग के मतदान करने के लिए सघन प्रचार अभियान और सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों और मीडिया द्वारा मतदान के लिए प्रेरित करने के बावजूद भी मतदान का प्रतिशत ज्यादा देखने को नहीं मिलता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मतदाता मताधिकार का प्रयोग करते हुए क्यों झिझकते हैं? क्या परेशानी है मतदान करने में? अब तो चुनाव आयोग ने मतदान को आसान बना दिया है। मतदाता के निकटतम स्थान पर मतदान केन्द्र बनाए जा रहे हैं। एक मतदान केन्द्र पर सीमित संख्या में ही मतदाता हैं जिससे मतदाताओं को अनावश्यक लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़े। मतदाता पर्चियों का वितरण किया जा रहा है। यदि अपनी पसंद का उम्मीद्वार नहीं है तो अब नोटा का विकल्प भी दे दिया गया है।
यकीन मानिए पूरे पांच साल के बाद जनता के हाथ में लोकतंत्र की रक्षा का यह अधिकार आता है। इसे व्यर्थ में न गवायें। हर कीमत पर खुद मतदान करें तथा औरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। घर से लेकर बाहर तक तमाम समस्याओं का निदान इसी मतदान पर निर्भर है। आपका एक-एक वोट देश का भाग्य गढ़ेगा। एक जिम्मेवार नागरिक होने के नाते सबको मताधिकार का इस्तेमाल करना चहिए। चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व है। एक बार फिर देश की जनता को जनप्रतिनिधि चुनने का अवसर मिला है। खासकर युवा मतदाताओं को, जिनके कंधे पर राष्ट्र का भविष्य है। लंबे संघर्ष के बाद देश ने जो आजादी पायी है उसका उद्देश्य तभी सार्थक होगा जब जनता अपने अधिकार के प्रति सजग हों। खुद मतदान करें तथा अपने परिवार व आस-पड़ोस को भी इसके लिए प्रेरित करें, यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।
मतदान के दौरान एक एक वोट की कीमत होती है। इसलिए हम सभी को अपने मताधिकार का उपयोग कर ऐसे प्रतिनिधि को चुनना चाहिए जो बिना किसी भेदभाव के क्षेत्र का विकास कराए, लेकिन इसके लिए हमारा मतदान करना बहुत जरूरी हैं। प्रजातंत्र में सबसे बड़ा दान मतदान है। जिससे सारी व्यवस्था खड़ी है। इसको किसको देना है सबसे पात्र व्यक्ति को देना है और बिना कोई लोभ, लालच, पैसा, शराब और जाति-पाति इन सबसे ऊपर उठकर सबसे अच्छे व्यक्ति एवं सेवा भाव व्यक्ति को ढूढ़कर देना है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर एक मतदाता का मत अमूल्य है और अगर हम जागरूक होगें तो मत सही व्यक्ति को जायेगा और वही व्यक्ति देश का विकास कर सकता है अत: जागरूक और जिम्मेदार मतदाता बनें।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)