अधिकारियों की मिलीभगत से जमकर चांदी काट रहे ठेकेदार

अवैध रेत खनन पर प्रशासन का निरकुंश रवैया
प्रशासनिक संवाददाता
भोपाल,18 मार्च।
प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा से अवैध रेत खनन की शिकायतें तो खूब हुईं, लेकिन अधिकारियों ने इन शिकायतों पर कार्रवाई करने में निरकुंशता ही दिखाई। यदि समय पर अवैध रेत खनन पर कार्रवाई करते तो नर्मदा नदी को छलनी होने से बचाया जा सकता था, लेकिन रेत के इस अवैध कारोबार में अधिकारियों की मिलीभगत जमकर चली। कुछ मामलों में कार्रवाई की तो उनसे अब तक राशि की वसूली नहीं हो सकी।
नर्मदा नदी की हालत बेहद दयनीय हो गई है। नदी में जहां जलस्तर कम हो गया है तो वहीं नर्मदा से अवैध रेत खनन को कारोबार भी अब तक नहीं रुका है। कांग्रेस सरकार ने भी अपने वचन पत्र में इसका वायदा किया था कि वे अवैध उत्खनन पर रोक लगाएंगे, लेकिन पिछले कई वर्षों से जारी अवैध रेत उत्खनन पर रोक अब तक नहीं लग सकी है।
शिकायत मिलने के बाद भी नहीं की कार्रवाई
अवैध रेत खनन पर अफसरशाही कितनी गंभीर है इसका पता यहां से चलता है कि प्रदेश के कई जिलों में नर्मदा से अवैध रेत खनन की शिकायतें तो खूब आई, लेकिन अधिकारियों ने इन शिकायतों पर अमल करने के बजाए अवैध रेत का कारोबार करने वालों को संरक्षण दिया। दरअसल जबलपुर जिले में 123 शिकायतें आईं, लेकिन अधिकारियों ने केवल एक वाहन को राजसात किया। इसी तरह नरसिंहपुर में 6, मंडला में 4, डिंडौरी में 3, अनूपपुर में 6, सीहोर में 39 रायसेन में 7, होशंगाबाद में 12, हरदा में 29, धार में 28, खंडवा में 1, खरगौन में 9, बड़वानी में 47 शिकायतें आईं, लेकिन ज्यादा शिकायतों में अधिकारियों ने खानापूर्ति करके अपने दायित्वों की इतिश्री की। ज्यादातर जिलों में एक भी वाहन को राजसात नहीं किया गया। कुछ शिकायतों में अधिकारियों ने अवैध रेत कारोबारियों पर पैनाल्टी लगा दी, लेकिन उसकी वसूली करने में भी गंभीरता नहीं दिखाई।
रेत का अवैध कारोबार करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। किसी भी अवैध कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा। इन पर लगाई गई पैनाल्टी की भी वसूली के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसके नतीजे सामने आएंगे।
इनका कहना है…

  • प्रदीप जायसवाल
    मंत्री, खनिज विभाग
    अर्थदंड लगाया, लेकिन नहीं हुई वसूली
    रेत के अवैध उत्खनन में अधिकारियों ने कुछ मामलों में अर्थदंड जरूर लगाया, लेकिन इसको वसूलने में उनकी दिलचस्पी नहीं दिखी। सरकार द्वारा दी गई जानकारी पर विश्वास करें तो रेत के ठेकेदार राजपूत कंस्ट्रक्शन ग्राम जमुनिया तहसील गोटेगांव पर करीब 50 लाख का अर्थदंड लगाया, लेकिन अब तक वसूली नहीं की। इसी तरह ग्राम पंचायत चंदली में अवैध रेत उत्खनन पर करीब 84 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया। हरदा जिले में ठेकेदार आरएसआई स्टोन वल्र्ड प्रा. लि. भोपाल पर करीब 91 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया, लेकिन वसूली सिर्फ 50 हजार रुपए की हुई। शिवा कारपोरेशन इंडिया प्रा. लि. जयपुर पर तो 3 करोड़ से अधिक का अर्थदंड लगाया गया। डिजियाना प्रा.लि. इंदौर पर 25 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया। इसी कंपनी पर 35 लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया, लेकिन अब तक एक रुपए की वसूली नहीं हो सकी।