नीट प्री-पीजी काउंसलिंग में 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक

मेडिकल छात्राओं की याचिका पर हुई कार्रवाई
भोपाल, 18 मार्च। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को हाईकोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने के निर्णय पर रोक लगा दी है। जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश मेडिकल एजूकेशन के छात्राओं द्वारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए नीट प्री-पीजी काउंसलिंग में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर रोक लगाई है। मेडिकल छात्राओं की याचिका पर हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण न होने के प्रावधान का उल्लंघन हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा दिलचस्प वाकया यह है कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में केवियट दायर करने का विज्ञापन तो जारी कर दिया, लेकिन केवियट दायर नहीं की। प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने किया था अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण करने की घोषणा की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने नीट प्री-पीजी काउंसलिंग में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर रोक लगाई है। राज्य सरकार और डीएमई के खिलाफ नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद कमलनाथ सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का परीक्षण करेंगे और ओबीसी को उसका हक दिलाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी।
विधि एवं विधायी मंत्री ओबीसी को रोड पर उतर कर करेगा आंदोलन: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में ओबीसी एससी एसटी एकता मंच द्वारा केविएट क्रमांक 624/19 दायर की गई थी। शासन पक्ष की ओर से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अधिसूचना दिनांक 8/3/19 के संबंध में न्यूज पेपर में केविएट की अधिसूचना का विज्ञापन निकालने के बाद भी कोर्ट में कोई भी कैविएट दायर नहीं की गई थी। मेडिकल के 3 छात्रों द्वारा याचिका क्रमांक 5901/19 दायर कर ओबीसी को हाल ही में लागू किए गए 27 प्रतिशत आरक्षण को निरस्त करने की मांग की गई थी, याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि शंकर झा एवं संजय द्विवेदी की युगल पीठ द्वारा शासकीय अधिवक्ता प्रवीण दुबे से 27 प्रतिशत आरक्षण की न्यायिकता को जानना चाहा, लेकिन वह शासन का पक्ष नहीं रख सके और जवाब प्रस्तुत करने का समय मांगा न्यायालय ने जवाब प्रस्तुत होने तक मेडिकल की भर्ती में 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगाने की बात कही, जिसे प्रवीण दुबे डिप्टी एडवोकेट जनरल द्वारा स्वीकृति दे दी गई। ओबीसी एससी-एसटी एकता मंच द्वारा दायर केविएट हाई कोर्ट की रजिस्ट्री की लापरवाही के चलते याचिका क्रमांक 5901/19 से लिंक न हो पाने के कारण अधिवक्ता उपस्थित नहीं हो सके। ओबीसी एससी-एसटी एकता मंच द्वारा स्थगन रिक्त कराने हेतु कार्रवाई की जाएगी तथा शासन से यह भी अपील की जाएगी। शासकीय अधिवक्ताओं की हाल में ही की गई नियुक्ति निरस्त कर सामाजिक न्याय की अवधारणा को मूर्त रूप देकर 54 प्रतिशत नियुक्ति ओबीसी एससी-एसटी अधिवक्ताओं की की जाए, ताकि सभी वर्गों को सामाजिक न्याय मिल सके।