सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी


उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड तलब किया
भोपाल/जबलपुर, 27 मार्च।
मध्यप्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त और 2 सूचना आयुक्तों की विवादों में घिरी नियुक्ति अब मप्र उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गयी है। सोशल एक्टिविस्ट रूपाली दुबे की याचिका पर जस्टिस नंदिता दुबे ने आज नोटिस जारी किया। रुपाली दुबे का पक्ष एडवोकेट जगत सिंह ने रखा। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में गठित चयन समिति में मंत्री जयवर्धन सिंह और नेता प्रतिपक्ष गोपाल गोपाल भार्गव सदस्य थे। इस समिति ने 20 फरवरी, 2019 को बैठक आयोजित कर मुख्य सूचना आयुक्त और 2 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की सिफारिश राज्यपाल को की थी, जो न केवल सूचना अधिकार एक्ट के विरुद्ध थी, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिनांक 14 फरवरी, 2019 को दिए गए जजमेंट का गंभीर उल्लंघन था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार द्वारा सर्च कमेटी का गठन कर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्राप्त आवेदनों को मेरिट पर शॉर्टलिस्ट करना अनिवार्य था। यह समूची पारदर्शी प्रक्रिया को सरकार की वेबसाइट पर सार्वजनिक करना था, जो नहीं किया गया। सूचना अधिकार एक्ट के अनुसार भी चयनित उम्मीदवारों के नाम के आगे प्रख्यात होने संबंधित विवरण भी रिकॉर्ड में शामिल करना था, लेकिन मप्र सरकार यह व्यवस्था अपनाने में असफल रही।