अब भाजपा अवैध रेत उत्खनन को मुद्दा नहीं बना सकेगी, क्योंकि कमलनाथ की नई रेत नीति बनकर तैयार

हृदेश धारवार, 9755990990
भोपाल, 31 मार्च।
भारतीय जनता पार्टी अब मध्यप्रदेश में अवैध रेत उत्खनन को मुद्दा नहीं बना सकेगी, क्योंकि कमलनाथ सरकार की नई रेत नीति बनकर तैयार हो गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जो घोषणाएं की थीं, उन्हीं बिंदुओं को नई रेत नीति में शामिल किया गया है। नई रेत नीति में परिर्वतन के लिए मुख्यमंत्री ने 6 मंत्रियों की एक कमेटी बनाई थी, कमेटी ने 7 राज्यों की रेत नीति का अध्ययन करके नई रेत नीति का मसौदा तैयार कर शासन को सौंप दिया है। जिसे 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री कमलनाथ के समक्ष रखा जाएगा। लोकसभा चुनाव के बाद यह मसौदा कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। नई रेत नीति आने के बाद विपक्षी दल भाजपा के पास कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं होगा।
शिवराज सरकार ने ग्राम पंचायतों को शसक्त बनाने के लिए रेत की खदानें ग्राम पंचायतों को सौंपी थीं। जिससे राज्य शासन वित्तीय 2018-19 में 250 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने शासकीय खजाना भरने के लिए नई रेत नीति तैयार की है, ताकि पिछले वित्तीय वर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। गौरतलब है कि शिवराज सरकार वर्ष 2017-18 में नई रेत नीति लाई थी। जिसमें रेत खनन के अधिकार ग्राम पंचायतों को दे दिए गए थे। इससे खनिज विभाग की आमदनी छिन गई और इस बार विभाग को रेत खनन से राजस्व नहीं मिला।
6 मंत्रियों की कमेटी ने तैयार किया मसौदा
मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर नई रेत नीति के लिए 6 मंत्रियों की एक कमेटी गठित की गई। कमेटी ने 7 राज्यों की रेत नीति का अध्ययन करके नई रेत नीति का मसौदा तैयार किया है। कमेटी ने गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु की रेत नीतियों का अध्ययन किया है। इनमें से राजस्थान की रेत नीति से कमेटी सहमत है। 6 सदस्यीय कमेटी में खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल, वाणिज्यकर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर, वित्त मंत्री तरुण भनोट, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, नर्मदा घाटी विकास एवं पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह हनी बघेल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने अपने सुझाव दिए हैं। कमेटी ने तीन बैठकें कर रेत नीति के मसौदे को तैयार किया है। कमेटी के सदस्यों का मानना है कि नई रेत नीति लागू होने पर रेत खनन से प्रदेश की वार्षिक आय पांच गुना (250 से 1250 करोड़) बढ़ जाएगी।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में खनिज विभाग को 228 करोड़ का लाभ: खनिज विभाग ने रेत से 250 करोड़ के नुकसान के बाद भी वित्तीय वर्ष 2018-19 में 228 करोड़ का मुनाफा अर्जित किया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में खनिज विभाग को 3650 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो कि इस साल बढ़कर 3878 करोड़ रूपए हो गया है। इसे खनिज विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यदि रेत की खदानें ग्राम पंचायतों को नहीं दी जाती, तो खनिज विभाग को 250 करोड़ रूपये अधिक राजस्व प्राप्त होता। खनिज विभाग को कोयले से 76 प्रतिशत, चूना पत्थर से 13.26 प्रतिशत, कॉपर से 1.46 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।

इन सुझावों को किया शामिल

  • रेत की खदानों व वाहनों की जीपीएस सिस्टम से होगी मॉनीटरिंग
  • स्थानीय लोगों को रोजगार
  • खदान के ठेकेदार ही कर सकेंगे भंडारण
  • ऑनलाइन एंट्री पास व्यवस्था बंद की जाएगी

इनका कहना है
खनिज विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस साल 228 करोड़ रूपए का अधिक लाभ अर्जित किया है। इस बार विभाग को रेत से पिछले वर्ष के मुकाबले 250 करोड़ रूपए कम मिले हैं।
नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव, खनिज विभाग,
मप्र शासन