कमलनाथ ने 100 दिन में खुशहाली का ग्राफ बढ़ाया…

हर वर्ग को छूते कांग्रेस सरकार के 100 दिन में उद्योगपतियों से लेकर गरीब वर्ग के दिलों को छूने वाले फैसलों के कारण
विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में 15 वर्षों के बाद सत्ता में वापस आई कांग्रेस की सरकार ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में आज 100 दिन पूरे कर लिए हैं और उनके जितने भी फैसले हुए उससे मध्यप्रदेश में जहां एक ओर उद्योगपतियों का विश्वास लौटा है वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश का गरीब तबके का 60 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जिसमें हम खुशहाली के बढ़ते हुए ग्राफ को महसूस कर सकते हैं।
बगैर समय गँवाये नई सरकार ने जिस तेजी के साथ निर्णय लिए उससे प्रदेश के समग्र विकास के साथ ही सबको समान रूप से लाभ मिला है। सरकार का हर निर्णय हर वर्ग के लोगों के जीवन को छूता है उन्हें खुशियाँ देता है। हाल ही में हैप्पीनेस इंडेक्स की रिपोर्ट में भारत पिछले वर्ष के मुकाबले 7 अंक नीचे गिरा है लेकिन कमल नाथ सरकार ने जो फैसले लिए हैं उससे निश्चित ही मध्यप्रदेश के हैप्पीनेस इंडेक्स में वृद्धि होने के अनुमान को खारिज नहीं किया जा सकता। अपने वचन पत्र को जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में पूरा करने का वायदा किया था उसे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही दिन 2 घंटे के भीतर अंजाम देकर पूरे प्रदेश को यह संदेश देने में कामयाबी भी हासिल की कि अब सरकार मंत्रालय से नहीं जिलों से ही चलेगी और जो काम जिलों के कलेक्टर करने में असमर्थ होंगे वही काम मुख्यमंत्री सचिवालय तक आए यह फरमान जहां एक ओर राज्यमंत्रालय के कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हुआ वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों में गुड गवर्नेन्स की परिभाषा समझा दी गई। केंद्र सरकार की तर्ज पर सचिवालय की कार्यसंस्कृति में व्यापक बदलाव हुए और किसानों में सरकार के प्रति विश्वास 100 दिन की सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाने लगा।
पहले ही दिन से वर्किंग मोड में थे नवनियुक्त मुख्यमंत्री। उन्होंने मुख्यमंत्री का पद सम्हालने के 2 घंटे के अंदर मंत्रालय पहुँचते ही किसानों की कर्ज माफी का फैसला ले लिया। 50 लाख किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफी का यह निर्णय प्रदेश की खेती – किसानी की दशा और दिशा बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। दरअसल यह सिर्फ किसानों को कर्ज के बोझ तले से बाहर निकालना नहीं है बल्कि उन्हें अपने ही पुश्तैनी धंधे में और अधिक सफल बनाने की एक सुविचारित पहल है। इसके आगे कमल नाथ जी का अपना एक अर्थशास्त्र है। कृषि क्षेत्र में एक नई आर्थिक रणनीति को वे अपने अनुभव और कुशलता से गढ़ रहे हैं। उन्होंने जिस सूक्ष्मता के साथ किसानों की बुनियादी जरूरतों को जाना है उससे निश्चित ही वे एक बड़ा इतिहास प्रदेश में रचने जा रहे हैं। उन्होंने 50 लाख किसानों की कर्ज माफी के जरिए प्रदेश के 85 लाख किसान और उनके परिवार को खुशहाल बनाने के लिए एक नया रास्ता बनाने की शुरूआत की है। इसके बाद युवा स्वाभिमान योजना में मुख्यमंत्री ने वर्ष में 100 दिन रोजगार देने की बात करके युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए उनकी रूचि के अनुसार प्रशिक्षण देने का भी ऐतिहासिक काम किया है। जब युवा 100 दिन के रोजगार का लाभ लेकर निकले तब उसके हाथ में एक कौशल होगा जिसके जरिए वह अपनी दम पर काम हासिल करेगा। कौशल विकास की जो रणनीति वे मध्यप्रदेश में अपनाने जा रहे हैं वह इस प्रदेश में नई हो सकती है लेकिन उनके अपने आत्मिक रिश्ते वाले छिंदवाड़ा के लिए यह रणनीति पुरानी है। छिंदवाड़ा मॉडल की अगर चर्चा है तो वह कोई केवल प्रचार, ढोल और शोर नहीं है। वहाँ विकास का एक नया मॉडल पिछले 40 साल में कमल नाथ जी ने गढ़ा है। रोजगार के कई स्तरों पर उपलब्ध युवाओं की क्षमता को, शिक्षा और संभावनाओं के आधार पर वे कौशल विकास की सार्थकता देखते हैं। इसलिए जब बैंड बजाने का प्रशिक्षण देने का विचार रखते हैं तो विपक्ष और कथित प्रबुद्ध वर्ग भले ही खिल्ली उड़ाए लेकिन उन्होंने इसका ट्रेनिंग स्कूल खोलने का निर्णय लेकर इस व्यवसाय से जुड़े और इसके प्रति रूचि रखने वाले लाखों लोगों के सामने रोजगार की व्यापक संभावनाओं को जन्म दिया है। अगर एक प्रशिक्षित व्यक्ति किसी बैंड का सदस्य होगा तो उसका कौशल ही उसे नई ऊँचाइयों पर पहुँचा देगा। ऐसे कई उदाहरण छिंदवाड़ा में मौजूद है। जब उन्होंने छोटे-छोटे प्रयासों से कम शिक्षा वाले युवाओं के सामने रोजगार के नए अवसर दिए हैं। शिक्षा, उच्च शिक्षा, उत्कृष्ट शिक्षा के साथ ही कमल नाथ जी ने अपनी कौशल रणनीति में उन हाथों को भी रोजगार देने का रास्ता बनाया है जो अपनी पारिवारिक परिस्थितियाँ, स्वयं की क्षमता या अन्य कारणों से वांछित शिक्षा पूरी नहीं कर पाते। परिवार के मुखिया होने के नाते वे भी जीवन-यापन के अवसर पा सकें, इस जिम्मेदारी को कमल नाथ जी ने समझा है और इसी सोच के साथ वे कौशल विकास की एक सार्थक कोशिश को अंजाम देने में लगे हुए हैं।
उद्योग-व्यापार के विस्तार से किसी भी प्रदेश का विकास जुड़ा होता है। कमल नाथ जी जब औद्योगीकरण की बात करते हैं, तो उसमें किसानों और युवाओं के हित भी शामिल होते हैं। उनका साफ मानना है कि जब तक उद्योग विकास में किसान और नौजवान का हित शामिल नहीं होगा, तो वह हासिल नहीं हो पाएगा। जिसकी कल्पना हम औद्योगीकरण से करते हैं। इसलिए उनकी उद्योग नीति में समग्रता है। उसमें अगर किसानों की अपनी उपज के बेहतर उपयोग से जुड़े उद्योग शामिल हैं, तो उस उद्योग में उस क्षेत्र के कितने बेरोजगारों को काम मिला, इसकी भी सोच है। उन्होंने अपने 100 दिन के कार्यकाल में इस बात की चिंता की और उद्योग नीति में संशोधन कर यह अनिवार्य किया कि 70 प्रतिशत लोगों को जो उस क्षेत्र के हैं उन्हें रोजगार देना अनिवार्य होगा। एक और बात जो महत्वपूर्ण है, कमल नाथ जी का स्पष्ट कहना है जो उद्योग जितने रोजगार देगा उसे उतनी सुख-सुविधा, संसाधन सरकार उपलब्ध करवाएगी। अपनी औद्योगिक सोच में कमल नाथ जी नए निवेश की बात नहीं करते। उन्होंने 100 दिनों में सबसे पहले उस निवेश पर ध्यान दिया जो पहले से ही प्रदेश में मौजूद है। उसकी दिक्कत, परेशानी को जाना। उनका कहना है कि प्रदेश की उद्योग मित्र की ब्रांडिंग तभी होगी जब मौजूदा उद्योग अपने को कम्फर्ट महसूस करें। गोलमेज कांफ्रेंस के जरिए उन्होंने गहनता के साथ पड़ताल की तो पाया कि 15 साल में जो उद्योग या निवेश आया उसका ही तंत्र पर विश्वास नहीं है। उन्होंने प्राथमिकता तय की, सरकार की पूरी ताकत इस बात पर लगेगी कि निवेशकों का प्रदेश के तंत्र पर विश्वास हो। उन्होंने इस व्यवस्था के लिए अभिनव पहल की और ‘हैंड होल्डलर्सÓ यानी हर आठ-दस उद्योग यूनिट पर एक अनुभवी, जानकार, तत्पर और ऊर्जावान अधिकारी होगा जो अपने जिम्मे के उद्योगों की समस्या, जरूरतों का हाथों हाथ समाधान करेगा। ये हैंड होल्डलर्स सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे। यह सोच अभी तक प्रदेश में क्यों नहीं थी ? इस बात का अफसोस इसलिए है कि अगर यह सोच पहले होती तो हम अपने प्रदेश को देश में कितना आगे तक ले जा पाते।
प्रदेश की एक बहुत बड़ी आबादी उस वर्ग से है जिसे पिछड़ा वर्ग कहते हैं। जब आधी से अधिक आबादी पिछड़े वर्ग में आती हो तो हम अपने प्रदेश के विकास की कल्पना कैसे कर सकते हैं। 30-35 साल पहले महाजन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुख्यमंत्री कमल नाथ ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया कि प्रदेश के पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उनके इस एक फैसले से प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के 3 करोड़ से अधिक लोग सीधे लाभान्वित हुए हैं।
जिनकी सफाई से शहरों का गर्व बढ़ता है। वे बड़े समारोह में पुरस्कार पाते हैं ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करना हमारा फजऱ् है। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में देश के 20 टॉप शहरों में मध्यप्रदेश के 6 शहर इंदौर, भोपाल, उज्जैन, नागदा, खरगोन और देवास शहर के शामिल होने पर इसका श्रेय उन सफाई कर्मियों को दिया जिन्होंने परदे के पीछे रहकर दिन-रात कड़ी मेहनत करके यह गौरव अपने शहर को दिलाया। जिन सफाई कर्मियों की वजह से प्रदेश को यह उपलब्धि हासिल हुई उन्हें 5000-5000 रूपये का बोनस देने की घोषणा की। सम्मान राशि की उनकी इस घोषणा से इन शहरों के 18 हजार सफाई कर्मियों के परिवार लाभान्वित होंगे। यही नहीं उन्होंने एक और फैसला लिया कि प्रदेश के सभी नगरीय ?निकायों में काम कर रहे सफाई कर्मियों को अब सफाई मित्र कहा जाएगा। यह सबसे उपेक्षित और परदे के पीछे काम करने वाले लोगों की न केवल भावनाओं का बल्कि उनका खुद का सम्मान कमल नाथ जी ने किया। यह भी बताया है कि उनकी दृष्टि से कोई ओझल नहीं होगा जो काम कर रहा है वह भी और जो काम नहीं कर रहा है, वह भी।
कांग्रेस की सरकार में अनुसूचित जाति का विकास हमेशा प्राथमिकता में शामिल रहा है। अपनी सरकार के 76 दिन का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश अंत्यावसायी विकास निगम और आदिवासी वित्त विकास निगम से 2014 और 2015 में स्व-रोजगार के लिये जिन लोगों ने ऋण लिया है उनका एक लाख तक का ऋण माफ किया जाएगा। उनके सिर्फ इस एक फैसले से 32 हजार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवा ऋण मुक्त हो जाएंगे और वे अपनी एक नई शुरुआत करने के काबिल हो जाएंगे। यही नहीं विलुप्त हो रही गोंडी बोली के संरक्षण के लिये गोंड बहुल इलाकों के प्राथमिक स्कूल के पाठ्यक्रम में इस गोंडी बोली को शामिल करने का निर्णय लिया। शासकीय विभागों में विभिन्न स्तरों पर 60 हजार रिक्तियों को भरने के साथ ही बीस हजार खाली पदों पर भी भर्ती की जाएगी। समाज के कमजोर तबकों पर मेहरबान कमल नाथ सरकार ने कन्या विवाह/निकाह योजना में 28 हजार अनुदान राशि को बढ़ाकर 51 हजार कर दिया। वृद्धावस्था एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाकर 600 रुपये कर दी। पान का उत्पादन करने वाले किसानों को 500 बाँस देने का फैसला लिया। अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस-9 अगस्त को शासकीय छुट्टी घोषित की। तेन्दूपत्ता संग्रहण में लगे आदिवासी मजदूरों को प्रति मानक बोरा दर 2000 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया है। इससे 35 लाख आदिवासी वर्ग के लोग लाभान्वित होंगे।
100 दिन में साहसिक ऐतिहासिक एवं सुविचारित फैसले तो लिए ही और हर वर्ग को लाभ पहुँचे इस पर भी सरकार की नजर रही। कोई भी वर्ग अछूता नहीं रहा मात्र 100 दिन की सरकार में। जब 76वें दिन 83 वचन पूरे करने का रिपोर्ट कार्ड मुख्यमंत्री ने पेश किया तो समझा जा सकता है कि आने वाले 5 साल में मध्यप्रदेश विकास की, प्रगति की दर की रफ्तार क्या रहेगी।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।