हमने राजनीतिक मतभेद रखने वालों को राष्ट्र विरोधी नहीं समझा

आडवाणी ने दिया नरेंद्र मोदी को झटका, और लिखा
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एल.के. आडवाणी

अप्रैल को बीजेपी अपना स्थापना दिवस मनाएगी। बीजेपी में हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है कि हम पीछे देखें, आगे देखें और भीतर देखें। बीजेपी के संस्थापकों में से एक के रूप में मैंने भारत के लोगों के साथ अपने अनुभवों को साझा करना अपना कर्तव्य समझा है। खासतौर पर मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं के साथ, दोनों ने मुझे बहुत स्नेह और सम्मान दिया है। मैं गांधीनगर के लोगों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिन्होंने 1991 के बाद छह बार मुझे लोकसभा के लिए चुना है। उनके प्यार और समर्थन ने मुझे हमेशा अभिभूत किया है। मातृभूमि की सेवा करना मेरा जुनून और मेरा मिशन है। जब से मैंने 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ज्वाइन किया, मेरा राजनीतिक जीवन लगभग सात दशकों से मेरी पार्टी के साथ अविभाज्य रूप से जुड़ा रहा है। पहले भारतीय जनसंघ के साथ और बाद में भारतीय जनता पार्टी, मैं दोनों का संस्थापक सदस्य रहा हूं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और कई अन्य महान, प्रेरणादायक और दिग्गजों के साथ मिलकर काम करना मेरा दुर्लभ सौभाग्य रहा है। मेरे जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत है- नेशन फस्र्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट। सभी परिस्थितियों में मैंने इस सिद्धांत का पालन करने की कोशिश की है और आगे भी करता रहूंगा। भारतीय लोकतंत्र का सार विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान है। अपनी स्थापना से ही, भाजपा में जो लोग राजनीतिक रूप से हमारे विचार को नहीं मानते, ऐसे लोगों को हम अपना दुश्मन नहीं बल्कि अपने विपक्षी के तौर पर देखते हैं। भारतीय राष्ट्रवाद की हमारी अवधारणा में, हमारी राजनीतिक विचारधारा नहीं मानने वालों को हमने कभी भी देश विरोधी नहीं माना। पार्टी व्यक्तिगत और साथ ही राजनीतिक स्तर पर हर नागरिक की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपी हमेशा मीडिया सहित हमारे सभी लोकतांत्रिक संस्थानों की स्वतंत्रता, अखंडता, निष्पक्षता और मजबूती की मांग करने में सबसे आगे रही है। चुनावी सुधार, राजनीतिक और चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता हमारी पार्टी के लिए प्राथमिकता रही है। यह मेरी ईमानदार इच्छा है कि हम सभी को सामूहिक रूप से भारत की लोकतांत्रिक शिक्षा को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए। सच है, चुनाव लोकतंत्र का त्यौहार है, लेकिन ये भारतीय लोकतंत्र में सभी हितधारकों-राजनीतिक दलों, जन मीडिया, चुनाव प्रक्रिया का संचालन करने वाले प्राधिकारियों और सबसे ऊपर, मतदाताओं द्वारा ईमानदार आत्म निरीक्षण के लिए भी एक अवसर है।