मोदी ने किया डैमेज कंट्रोल, राहुल ने बढ़ाया कांग्रेस का ग्राफ


भाजपा को एयर स्ट्राइक, राष्ट्रवाद का भरोसा तो कांग्रेस को 72 हजार गरीबी पर वार से आस

विशेष सर्वे रिपोर्ट
विजय कुमार दास

राष्ट्रीय हिन्दी मेल का नवीनतम सर्वे

भाजपा-कांग्रेस को अपने बूते बहुमत नहीं

भाजपा 180-190, कांग्रेस 160-170 सीटें

एनडीए 38 फीसदी वोट, यूपीए को 35 फीसदी वोट

2019 का आम चुनाव कई मायनों में बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला है। जिस प्रकार से नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी इन चुनावों में पूरी जोर-आजमाइश कर रहे हैं, उससे चुनाव और दिलचस्प हो चला है। हालांकि अखिल भारतीय स्तर पर केवल दो ही पार्टियां भाजपा और कांग्रेस के ही बीच मुख्य मुकाबला दिखाई देता है, फिर भी दोनों ही दलों ने क्षेत्रीय दलों के साथ भी कई राज्यों में गठबंधन को मजबूर हुए हैं। जहां उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस अपने बूते चुनाव लड़ रही है तो वहीं सपा, बसपा और रालोद, भाजपा और उसके छोटे दलों के लिए कड़ी चुनौती पेश करेंगे, इसके आसार दिख रहे हैं। इधर बंगाल में प्रधानमंत्री पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन तृणमूल के किले को आसानी से खिसकाया जा सकेगा, इसकी पूरी संभावना दिखती नहीं है। महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन भाजपा-शिवसेना के सामने राज्य की सरकार के एंटी इंकम्बैंसी को भुनाने में पूरा जोर लगा रहा है तो वहीं बिहार में इस बार महागठबंधन भी पिछले चुनाव की तुलना में काफी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा। यहां पर इन चार राज्यों के पीछे के शुरूआती विश्लेषण का कारण यह है, क्योंकि इन चार बड़े राज्यों से ही लोकसभा की 210 सीटें आती हैं और यदि देखा जाए तो इन राज्यों में सत्ताधारी भाजपा के लिए राह बहुत आसान नहीं है। राष्ट्रीय हिंदी मेल टीम ने बड़े चैनलों के सर्वे के बाद एक सर्वे किया है, जिसके मुताबिक बीते आम चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने वाला एनडीए इस बार बहुमत से कुछ पीछे रह सकता है। कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए के भी बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद सत्ता तक पहुंचने के आसार नहीं है, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है प्रधानमंत्री मोदी को अपना डैमेज कंट्रोल करना पड़ा और राहुल गांधी ने कांग्रेस का ग्राफ रातों रात बड़ा दिया। जबकि क्षेत्रीय पार्टियां काफी तादाद में सीट जीत सकती हैं, जिससे अगली सरकार के गठन में उनकी भूमिका अहम होगी। राष्ट्रीय हिंदी मेल के सर्वेक्षण के नतीजों से जाहिर है कि आसन्न आम चुनाव में कोई भी एक पार्टी या गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े 272 तक पहुंचता नजर नहीं आ रहा है। इसके अनुसार अकेले भाजपा को 180 से 190 सीट मिलने का अनुमान है। इसी प्रकार अकेले कांग्रेस को 160 से 170 सीट मिलने की संभावना है। सर्वेक्षण के अनुसार, एनडीए को 38 फीसदी, यूपीए को 35 फीसदी और अन्य को 27 फीसदी वोट मिलने की संभावना है।
हालाँकि यह सर्वे पुलवामा में आतंकी हमलों के बाद हुए एयर स्ट्राइक और कांग्रेस द्वारा घोषणा पत्र जारी किये जाने के बाद किया गया है। इसमें यह साफ नजर आता है कि दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय दलों ने अपनी अपनी स्थिति में इजाफा जरूर किया है लेकिन, अपने बूते कोई भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल न्याय योजना जिसमें न्यूनतम आय की गारंटी दी गयी है, 72 हजार का आंकड़ा अपेक्षा अनुरूप आम लोगों को और मतदाताओं के बीच जबरदस्त लोकप्रिय हुआ है। इसकी चर्चा अब सार्वजनिक की जाने लगी है। इधर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रवाद को भुनाने की कोशिशें तो लगातार हो रही हैं, किन्तु जब तक पार्टी का कोई ठोस घोषणा पत्र नहीं आता, मतदाता न्याय को ही बड़ी व्यवस्था के परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं। राष्ट्रीय हिंदी मेल ने राज्यवार सर्वे कर दलीय स्थिति जानने की कोशिश की। हमारे सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 36 सीटें मिल सकती हैं वहीं, बसपा को 16, सपा को 20, कांग्रेस को 7 और अन्य को सीटें मिल सकती हैं। मध्य प्रदेश की 29 सीटों में बीजेपी को 14 और कांग्रेस को 14 सीटें मिल सकती हैं। एवं एक सीट सस्पेंस की स्थिति में है। राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 11 और कांग्रेस को 13 सीटें मिल सकती है। जबकि एक सीट अन्य के खाते में जाने की संभावना है। बिहार की 40 सीटों में बीजेपी को 10, आरजेडी को 11, जेडीयू को 10, कांग्रेस को 9 सीटें मिल सकती हैं। झारखंड की 14 सीटों में बीजेपी को 6, जेएमएम को 2, कांग्रेस को 5 सीटें मिल सकती हैं, वहीं, जेवीएम (पी) के खाते में 1 सीट जा सकती है। उत्तराखंड की पांचों सीटें में से 3 बीजेपी के खाते में जाती दिख रही हैं जबकि कांग्रेस को 2 जगह बढ़त मिलने का अनुमान है। महाराष्ट्र की 48 सीटों में से बीजेपी को 18 कांग्रेस को 11, शिवसेना को 10 और एनसीपी को 9 सीटें मिल सकती हैं। गठबंधन के हिसाब से देखें तो यहां एनडीए को 28 और यूपीए को 20 सीटें मिल सकती है। गुजरात में कांगेस को 7 सीटों पर बढ़त दिखाई दे रही है जबकि 19 सीटें बीजेपी के खाते में जा सकती हैं। गोवा में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं, दोनों सीटें बीजेपी को मिल सकती हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 08, टीएमसी को 26 सीटें मिल सकती हैं वहीं, कांग्रेस को 8 सीट पर ही संतोष करना होगा। ओडिशा में बीजेपी को 03, बीजेडी को 10 सीटें मिल सकती हैं वहीं, कांग्रेस को 9 सीट मिलती दिख रही। छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 06 और कांग्रेस को 05 सीटें मिल सकती हैं। दिल्ली में बीजेपी को 5 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस को 1 और आम आदमी पार्टी को एक सीट मिलती दिख रही है। पंजाब में बीजेपी को एक भी सीट नहीं, यहां कांग्रेस को 09 और शिरोमणि अकाली दल को 3 सीटें मिल सकती हैं वहीं, 01 सीट आम आदमी पार्टी के खाते में जा सकती है। हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 07 सीटें मिल सकती हैं, वहीं, 2 सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। हिमाचल प्रदेश की 04 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 04 सीटें मिल सकती हैं, कांग्रेस को एक भी नहीं।जम्मू-कश्मीर की 06 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 2, कांग्रेस को 2, एनसीपी को 1 और पीडीपी को भी 1 सीट मिल सकती है। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 1, कांग्रेस को 5, अन्नाद्रमुक को 12, द्रमुक को 16 और अन्य को 5 सीटें मिल सकती है। आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में बीजेपी और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं। यहां टीडीपी को 3 और वाईएसआर को 22 सीटें मिल सकती हैं। तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों में बीजेपी को एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही। तेलंगाना में कांग्रेस को 2, टीआरएस को 14 और भाजपा को 1 सीट मिल सकती है। कर्नाटक की 28 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 7, कांग्रेस को भी 16 और जेडीएस को 5 सीटें मिल सकती हैं। केरल की 20 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 1, कांग्रेस को 8, लेफ्ट को 5 और अन्य को 6 सीटें मिल सकती हैं। गठबंधन के हिसाब से देखे तो केरल में एनडीए को 1, यूडीएएफ को 12 और एलडीएफ को 7 सीटें मिल सकती हैं। नॉर्थ-ईस्ट राज्य की 25 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 11, कांग्रेस को 7 और अन्य को भी 7 सीटें मिल सकती हैं। लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार अपने अगले कार्यकाल को वापस पाने की कोशिशों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी इस चुनाव को अपने लिए बहुत बड़ा मौका मानकर चल रहे हैं। चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं, ये तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इसको लेकर कयास लगाने में सभी जुटे हैं।

विशेष सर्वे रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।