वीके सिंह ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र , मोहंती ने गृह सचिव को भेज दिया

आयकर छापे को लेकर पुलिस और सीआरपीएफ आमने-सामने
भोपाल, 9 अप्रैल।
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों छापामारी के दौरान केंद्र के अद्र्धसैनिक बलों के सशस्त्र आमद पर मध्यप्रदेश के पुलिस मुखिया ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और उन्होंने मुख्य सचिव को इस बावत. एक पत्र प्रेषित किया है जिसमें कहा गया है कि आचार संहिता के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए कार्यवाई ने केंद्र और राज्य के बीच बने सामंजस्य को तोड़ा है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को संज्ञान लेना चाहिए। उधर सीआरपीएफ का कहना है कि पुलिस ने उन्हें गालियां दीं। आयकर विभाग के छापे पर सीआरपीएफ के एमएस वर्मा ने कहा, राज्य पुलिस को नहीं पता था कि ऐसा कोई ऑपरेशन होने वाला है। एसएचओ शायद असुरक्षित हो गए थे। उन्होंने मुझसे (डिप्टी कमांडेंट) कहा कि हम क्यों इस क्षेत्र में बिना उनकी इजाजत के ऑपरेशन कर रहे हैं। वर्मा ने आगे कहा, मैं उन्हें केवल यह बता सकता था कि यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हम सरकार के आदेशों का पालन कर रहे हैं। छापेमारी अब खत्म हो चुकी है। संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी और डीएसपी ने सीआरपीएफ के साथ बदसलूकी की और हमें गालियां दीं। चूंकि मामला बहुत ऊंचे स्तर पर चला गया है। ऐसे में यदि मुझसे पूछा जाएगा तो मैं निश्चित तौर पर इसके बारे में बताऊंगा। इससे पहले छापेमारी के दौरान पुलिस और सीआरपीएफ के बीच हुई तकरार के बारे में पूछे जाने पर गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा था, हमारा सीआरपीएफ से कोई टकराव नहीं है। लेकिन सूबे की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारे पास है। अगर किसी केंद्रीय एजेंसी के कारण सूबे की आम जनता को कोई दिक्कत होगी या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे का खतरा पैदा होगा, तो हम जरूर उचित कदम उठाएंगे।
इधर डीजीपी वीके सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सीआपीएफ की इस तरह की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति उठाई है। डीजीपी वीके सिंह ने सीआरपीएफ का मामला केंद्र के सामने उठाने की मांग सीएस से की है। उन्होंने पत्र लिखकर सीआरपीएफ के इस्तेमाल पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पत्र में लिखा है आईटी के करीब 20 अधिकारियों के साथ सीआरपीएफ के ऑटोमैटिक हथियारों से लैस 200 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी इन छापों में शामिल रहे। पत्र में आगे लिखा, जिस तरह रहवासी क्षेत्र में सीआरपीएफ को तैनात किया गया, वह खतरनाक दिखता है। इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद जवानों की उपस्थिति से खौफ पैदा हुआ। इस तरह के ऑपरेशन में केंद्रीय बलों को सहयोग करने के लिए राज्य पुलिस हमेशा तैयार है, लेकिन इस मामले में उनका रवैया असहयोगात्मक है। रहवासियों की परेशानी का हवाला देकर पुलिस ने सबसे पहले सीआरपीएफ से टकराव किया। सीआरपीएफ ने मौके पर पहुंची पुलिस को बिल्डिंग में नहीं जाने दिया। तू-तू मैं-मैं हुई और विवाद इतना बढ़ा की सीआरपीएफ ने अतिरिक्त फोर्स को मौके पर बुला लिया। पुलिस तो चली गई, लेकिन सीआरपीएफ ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी गृह मंत्रालय को भेजी। अब डीजीपी ने पत्र लिखकर सीएस के सामने आपत्ति जताई और मामले को केंद्र के सामने उठाने की मांग की।

केंद्रीय गृह सचिव को पत्र किया अग्रेषित : मोहंती
मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन सुधि रंजन मोहंती ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल से कहा कि पुलिस महानिदेशक का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने गत दिनों केंद्रीय बल की बड़ी संख्या में सशस्त्र मौजूदगी, बिना प्रदेश के पुलिस मुख्यालय को सूचित किए हुए। इस पर आपत्ति दर्ज कराई है, केन्द्रीय गृह सचिव को डीजीपी के इस पत्र को अग्रेषित करते हुए राज्य और केंद्र के पुलिस के मध्य ऐसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता लाने को कहा है।