संसद के लिए सियासत की पदयात्रा


शिवराज और दिग्विजय एक बार फिर चलेंगे पांव-पांव

हृदेश धारवार
भोपाल, 4 मई।
लोकसभा चुनाव का केंद्र बिन्दु बन चुके भोपाल संसदीय क्षेत्र में सियासत की पदयात्रा शुरू हो चुकी है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह की पदयात्रा से आज हुजूर विधानसभा क्षेत्र के नीलबड़ में चुनावी पदयात्रा निकाली। सियासत की यह पदयात्रा किस प्रत्याशी को सत्ता के शिखर पर पहुंचाती है, इसका फैसला तो चुनाव परिणाम के बाद ही होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने जब से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा के चुनाव प्रचार पर तीन दिन की रोक लगाई है, तब से भाजपा चुनाव प्रचार के नए-नए हथकंडे अपना रही है। एक तरफ तो साध्वी प्रज्ञा मंदिर-मंदिर जाकर भजन कीर्तन कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव में जीत दिलाने के लिए अब पूरी भाजपा मैदान में उतर चुकी है। भाजपा के लिए भोपाल लोकसभा का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है, क्योंकि संघ के निर्देश पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को इस सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ता तक सब मैदान में उतर आए हैं। आरएसएस के दबाव के चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रात 8.30 बजे हुजूर के मुगालिया छाप से नीलबड़ तक पद यात्रा निकाली। इस पद यात्रा में उनके साथ हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुणावत विशेष रूप से मौजूद रहे। बता दें कि भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा के चुनाव प्रचार पर निर्वाचन आयोग ने तीन दिन की रोक लगा दी है, जो कि 5 मई की शाम तक प्रभावी रहेगी। रोक लगाए जाने के बाद से भाजपा ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार में झोंक दिया है। वहीं दिग्विजय सिंह ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत यात्रा निकालने का फैसला किया है। दिग्विजय सिंह के राजनीतिक भविष्य के लिए यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए वह किसी प्रकार की रिस्क नहीं लेना चाहते। दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा 5 से 10 मई तक चलेगी, जो कि बैरागढ़ से शुरू होगी। इस यात्रा के तहत वे राजधानी की हुजूर, गोविंदपुरा, बैरसिया और नरेला विधानसभा को कवर करेंगे। इन क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिलती है। इसी को देखते हुए दिग्विजय सिंह ने भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। दोनों ही दलों ने पदयात्रा का रोडमैप भी उन बूथों के आधार पर तैयार किया है, जहां उनकी स्थिति कमजोर है। अभी यह माना जा रहा है कि भोपाल लोकसभा सीट के ग्रामीण इलाकों में भाजपा और शहरी क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूत स्थिति है। इसी को देखते हुए दोनों दलों ने अपनी प्रचार की रणनीति बदल दी है।