मुझे बजट का ज्ञान न दें शिवराज,सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं: कमलनाथ


किसान पुत्र बनकर 13 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, किसानों का कर्जा माफ किया नहीं बल्कि उनके पेट पर लात और छाती पर गोली मारी

मुख्य संवाददाता
भोपाल, 7 मई।
जय किसान फसल ऋण माफी योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बार-बार प्रश्न और संदेह करने से आहत मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सप्रमाण 21 लाख किसानों के दस्तावेज पूर्व मुख्यमंत्री चौहान के निवास पर भेजा, किन्तु उसके बाद भी प्रक्रिया में दोष और ऋण माफी को लेकर शिवराज ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए। इसके बाद ही मुख्यमंत्री कमलनाथ इस मामले पर सफाई देने के लिए सामने आ गए और शिवराज सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान झूठ बोल रहे हैं। कर्ज माफी की असल हकीकत सामने लाने के लिए सामने आया हूं। मैं देर से बोलता हूं, कम बोलता हूं, लेकिन झूठ नहीं बोलता। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आज सुबह एक प्रतिनिधिमंडल सुरेश पचौरी के नेतृत्व में शिवराज सिंह के घर गया था। उन्होंने 21 लाख किसानों की सूची दी, जिनका कर्जा माफ हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये लिस्ट छुपी हुई नहीं है। कृषि विभाग के पोर्टल पर है। शायद शिवराज जी पोर्टल खोलना नहीं जानते। इसलिए हमने जिलेवार उन्हें ये लिस्ट सौंपी। ये वो लिस्ट है, जिनका कर्जा माफ हो चुका है। मैंने 17 दिसंबर को शपथ लेने के बाद किसानों का कर्जा माफ करने का फैसला किया था और दो घंटे के भीतर ही इस फैसले से जुड़ी फाइल साइन कर दी थी। शिवराज सिंह चौहान अपने भाषण में राहुल गांधी जी का भाषण सुनाकर कह रहे थे किसानों का कर्जा 10 दिन में माफ होगा। राहुल जी के इस वादे के बाद सरकार में आने के बाद ही 10 दिन में नहीं हमने शपथ ग्रहण लेने के दो घंटे बाद कर्ज माफ कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री को 15 साल सरकार चलाने के बाद इतना तो अनुभव होना चाहिए कि कर्ज माफी की एक प्रक्रिया होती है, जिसमें समय लगना स्वाभाविक होता है। शासन के द्वारा लिए गए कर्ज माफी के फैसले के बाद 6 जनवरी को कैबिनेट की बैठक में उसका अनुमोदन करवाया और कर्ज माफी की प्रक्रिया शुरु की। कर्ज माफी के लिए किसानों को आवेदन दिए गए। आवेदन हरा, सफेद, हरा था जिनका आधार कार्ड था, सफेद था, जिनका आधार कार्ड नहीं था और गुलाबी था, जहां कोई शंका न हो। 25 दिसम्बर को मंत्रिमंडल का गठन हुआ। इसके बाद यह सारी प्रक्रियाएं शुरु हुईं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा- मैंने मंत्रालय में घंटों बैठकर इस बात की लगातार समीक्षा की कि किस तरह सरल तरीके से कर्ज माफी की प्रक्रिया अपनाई जाए। लगभग 50 लाख किसानों से कर्ज माफी के आवेदन भरवाए। इन लोगों की कर्ज माफी तभी होती, जब बैंकों के खाते में कर्ज का पैसा जमा हो जाए। दो प्रकार के कर्ज थे एक कॉपरेटिव बैंक और दूसरा शेड्यूल बैंक। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा आपको जो बात मैंने अभी तक नहीं बताई, वह मैं आज बताना चाहता हूँ। शेड्यूल बैंक से मैंने चर्चा की और उनसे कहा कि आप उद्योगपतियों का कर्जा माफ करते हो। 40 प्रतिशत कर्जा माफ करते हो। जब उनका कर्जा माफ करते हो तो मैंने बैंक वालों से पूछा- आप किसानों का कितना कर्जा माफ करोगे। मैंने उनसे कहा कि अगर किसानों का कर्जा माफ नहीं करते, सिर्फ उद्योगों का कर्जा माफ करते हो तो आप औद्योगिक क्षेत्र में जाएं, ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी शाखा बंद करिए। मेरी इस बात पर बैंकों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और उन्होंने कहा कि वे किसानों का 50 प्रतिशत का कर्जा माफ करेंगे। वन टाइम सेटेलमेंट के तहत माफ करेंगे। शिवराज जी चिल्लाते रहते हैं, लेकिन वन टाइम सेटेलमेंट में कर्जा नेशलाइज बैंक ने आधा माफ कर दिया।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा शिवराज जी बजट की चिंता न करें, उनसे ज्यादा बजट मैंने देखे और बनाए। मैंने आठ माह पहले कर्ज माफी की घोषणा की थी। हवा में नहीं की थी, बहुत सोच-समझ कर की थी। मैंने इसका बहुत अध्ययन भी किया था। हम जो वचन दे रहे, कैसे पूरा करेंगे, इसका पूरा खाका हमने तैयार किया था। अब बात कॉपरेटिव बैंक का जो कर्जा था, हमने कहा इनको रीकेप्टलाइज करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कर्ज माफी का जो गाना गा रहे हैं, हमने कर्ज माफी का निर्णय और उसकी प्रक्रिया 10 दिन के अन्दर नहीं बल्कि 1 घण्टे में शुरू कर दी थी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह बताएं कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भाजपा सरकार ने कर्ज माफी की घोषणा की थी, उसका क्या हुआ। मैं लगभग 1 माह पहले गोंदिया गया था, जहाँ पोस्टर लगे थे जिसमें एक तरफ मेरी फोटो और दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की फोटो थी, उसमें तुलना की गई थी किस तरह मध्यप्रदेश में किसानों का कर्जा माफ कर दिया और महाराष्ट्र सरकार ने कर्ज माफ नहीं किया। उत्तरप्रदेश में मोदी जी ने कर्ज माफी की घोषणा की थी, उसके आंकड़े भी मेरे पास हैं। दो साल हो गए, भाजपा ने उत्तरप्रदेश में और महाराष्ट्र में चार साल हो गए, इन्होंने कर्ज माफी में क्या किया, यह बताएं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा शिवराज सिंह का मुझे सर्टीफिकेट नहीं चाहिए, मुझे तो प्रदेश के किसानों का सर्टीफिकेट चाहिए। आचार संहिता लगने के कारण कर्ज माफी की प्रक्रिया रोक दी गई थी, अभी हाल ही में 7 मई को हमें निर्वाचन आयोग की चि_ी मिली। शिवराज जी कहते हैं आचार संहिता से इसका कोई लेना-देना नहीं है, जबकि निर्वाचन आयोग का कहना था कि आप कर्ज माफी की प्रक्रिया चालू नहीं रख सकते। जहां लोकसभा क्षेत्र में चुनाव हो गए वहाँ पर कर्ज माफी शुरू करने की अनुमति 7 मई को सरकार को दी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा शिवराज सिंह चौहान कर्ज माफी को लेकर लगातार झूठ बोल रहे हैं, उन्होंने खरगोन के जिस किसान की कर्ज माफी होने का उदाहरण दिया, उसका कर्जा ट्रैक्टर ट्राली का था, हमारे वचन पत्र में स्पष्ट है किन किसानों का कर्जा माफ करेंगे। उन किसानों का कर्जा माफ होगा, जिन्होंने फसल ऋण लिया है। कई किसानों के चार-चार खाते हैं। जिन किसानों ने फसल ऋण के लिए किसी एक खाते में दो लाख रुपए तक का ऋण लिया है, उसे हमने माफ किया है। अगर किसान ने घर बनाने या गाड़ी खरीदने के लिए ऋण लिया है तो उसकी माफी की बात हमने वचन पत्र में नहीं की थी। शिवराज जी उन खातों का जिक्र करके झूठ बोल रहे हैं कि कर्ज माफी नहीं हुई है, वो खाते फसल ऋण के अलावा अन्य उपयोग के लिए लिया गया। जिन किसानों का ढाई लाख रुपए तक का फसल ऋण था उसमें से हमने 2 लाख रुपए का ऋण माफ कर दिया, इन किसानों को नोड्यूज या ऋण माफी का प्रमाण पत्र इसलिए नहीं मिल सकता, क्योंकि उनके ऊपर अभी 50 हजार तक का ऋण शेष है। इसके लिए भी हमने रास्ता निकाला, जो किसान ऋण मुक्ति का सर्टीफिकेट चाहता है, अगर वह शेष राशि में से आधी राशि जमा कर देता है तो उसे ऋण मुक्ति का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। यह प्रक्रिया हमने बैंकों से चर्चा करके वन टाइम सेटेलमेंट के तहत अपनाई है, इसमें भी किसानों को बहुत बड़ी सुविधा मिली है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा इसमें ऐसे किसान भी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है उनके ऊपर ऋण है, वह इसलिए माफ नहीं हुआ, सक्सेशन सर्टीफिकेट चाहिए होगा कि वह ऋण किसके ऊपर दर्ज होगा, जिसका की कर्ज माफ हो सके। यह सक्सेशन सर्टीफिकेट लाभान्वित किसान के परिवार को देना होगा, तब कर्ज माफी हो सकेगी। झूठ बोल कर शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के किसानों को गुमराह कर रहे हैं। जिन 21 लाख किसानों का कर्ज माफ हुआ है, यह सूची कृषि विभाग के पोर्टल पर दर्ज है। इस सूची में गड़बड़ी लगती है तो बताएं। दूसरा झूठ शिवराज जी बोल रहे हैं कि उनकी सरकार में 500 रुपए भावांतर योजना में किसानों को सोयाबीन में देने का निर्णय लिया था, उनकी सरकार का यह आदेश मेरे पास है, जो कि 5 अक्टूबर 2018 का है। इस आदेश में स्पष्ट है कि 500 रुपए तक का भावांतर लाभ देंगे। 500 रुपये और 500 रुपये तक लाभ देने में अंतर है। हमारी सरकार ने 160 रुपये गेहूं और 250 रुपए मक्का में भावांतर योजना का लाभ दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसान के हितैषी बनते हैं, आज झूठ बोलकर कर्ज माफी के संबंध में किसानों को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन जब वह खुद किसान पुत्र बनकर 13 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने किसानों का कर्जा माफ किया नहीं, बल्कि उनके पेट पर लात और छाती पर गोली मारी।
कर्ज माफी के लिए हमने बजट में 5 हजार करोड़ का प्रावधान किया था और अगले बजट में शेष राशि का भी प्रावधान करेंगे। आचार संहिता लगने के पहले तक हमने 21 लाख किसानों का कर्जा माफ कर दिया था आचार संहिता हटने के बाद हम 50 लाख किसानों का कर्जा माफ करेंगे। जहाँ-जहाँ चुनाव हो गए है वहाँ-वहाँ निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद हम शुरू कर रहे हैं। क्योंकि हम संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान झूठ बोल रहे हंै कि कर्ज माफी की प्रक्रिया में चुनाव आचार संहिता के कारण कोई फर्क नहीं पड़ता है। सरकार बहाना बना रही है उनकी जानकारी के लिए मैं बताना चाहता हूँ कि 7 मई 2019 को उन क्षेत्रों में कर्ज माफी की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति क्यों दी, जहाँ चुनाव हो चुके हैं। अगर यह बहाना था तो चुनाव आयोग स्वीकृति क्यों देता। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा संवैधानिक संस्थाओं का कांग्रेस हमेशा से सम्मान करती रही है, यह विश्व का पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें प्रधानमंत्री और भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों के खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के खिलाफ इतने मामले हुए हैं। इन मामलों में चुनाव आयोग ने जो फैसला दिया है, वह भी विवाद के घेरे में है। प्रजातंत्र के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के खिलाफ इतनी शिकायत हुई है।