मुख्यमंत्री जी आप गलत समझ बैठे


व्यापमं घोटाला, ई-टेंडर घोटाला, उसके बाद बिजली घोटाला इस विषय पर प्रश्न करना चाहता था पत्रकार, लेकिन

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

मध्य प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार आई है और मुख्यमंत्री कमलनाथ बने हैं, तब से मीडिया में प्रतिदिन इस बात को लेकर जिज्ञासा रहती है कि 15 साल की भाजपा की सरकार में इतने घोटाले हुए हैं कि किस-किस के खिलाफ मुख्यमंत्री कार्रवाई करने वाले हैं। कमलनाथ जी आपको पता होना चाहिए कि व्यापमं घोटाले की वजह से मध्य प्रदेश की यूथ इकोनामी अर्थात युवाओं का आर्थिक पक्ष इतना कमजोर हुआ है कि मध्य प्रदेश का युवा बेरोजगार पढ़ा-लिखा डॉक्टर, इंजीनियर मुंह दिखाने के लायक नहीं रह गया है। वह नौकरी के लिए जहां भी जाता है, पूरे देश और विदेश में भी व्यापमं के कलंक की वजह से भगा दिया जाता है और उपहास का पात्र बनता है। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि युवाओं की आत्महत्या के पीछे भी सबसे बड़ा कारण ही व्यापमं का रहा है। मध्य प्रदेश की इकोनॉमी 45 हजार करोड़ की बर्बाद हो गई, 500 कॉलेज बंद होने की कगार पर हैं और उन कॉलेजों के लिए छात्रावास और टिफिन सेंटर चलाने वाले लाखों लोग बेरोजगार हो गए। आपने अच्छा किया। व्यापमं की प्रक्रिया बदल दी, लेकिन घोटालेबाज लोग आज भी बेधड़क घूम रहे हैं। युवा बेरोजगार कहते हैं व्यापमं बंद होना चाहिए। दूसरा मुद्दा ई-टेंडर घोटाले का आया, आपने दोषियों को पकड़ा कार्यवाही की, अच्छा लगा। इसी श्रंृखला में मैंने आज सितंबर 2006 के बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार में उच्च नौकरशाहों द्वारा मिलीभगत करके गैर कानूनी ढंग से पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया गया और अरबों के घोटाले किए गए, इस मुद्दे को लेकर मेरा सवाल था। जिसे बिना सुने ही आप ने सवाल को ही घोटाला कह दिया। खैर, आप मुख्यमंत्री हैं मध्य प्रदेश के सम्राट हैं। आपकी समझ पर मैं कोई सवाल खड़ा नहीं कर सकता। लेकिन, बिजली खरीदी में हुए घोटाले के कारण मध्य प्रदेश की जनता को 4 गुना ज्यादा बिजली बिल चुकाना होता है। करोड़ों उपभोक्ताओं का दर्द था जिसे आपने सुना नहीं और सबके सामने मुझे उपहास का पात्र बना दिया। लेकिन फिर भी मैं प्रदेश की करोड़ों पीडि़त जनता की ओर से आप से अनुरोध करता हूं कि 2006 के बाद हुए बिजली विभाग के संगठित लूट को समझने का प्रयास कीजिए और बात सच लगे तो इस घोटाले के ऊपर से भी पर्दा हटाइए और अपराधियों को जेल भेजिए। आपके संज्ञान के लिए मैं यह बताना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने 6 निजी कंपनियों से लगभग 1575 मेगावाट के समझौते किए। यह समझौते गैर कानूनी थे और इन समझौतों के अनुसार बिजली खरीदें या न खरीदें, फिक्स चार्ज के 2163 करोड़ रूपए 25 वर्ष तक देने ही पड़ेंगे। जिनमें जे.पी. बीना पावर सागर, जे.पी. निगरी जिला सिंगरौली, झाबुआ पावर सिवनी, एम.बी. पावर अनूपपुर, बी.एल.ए. पावर गाडरवारा, पी.टी.सी. के माध्यम से लेन्को अमरकंटक कंपनी शामिल हैं। इन कंपनियों से बिजली खरीदी से पहले समझौते प्रतिस्पर्धात्मक बोली के आधार पर होने थे, पर इसका खुला उल्लंघन करते हुए 5 कंपनियों के साथ ये समझौते एक ही दिन में 5 जनवरी 2011 को हुए। यह आश्चर्यजनक है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दो अधिकारी गजराज मेहता और संजय मोहसे उस दिन सम्बंधित पद पर पदस्थ ही नहीं थे और तीन अधिकारियों एबी वाजपेयी, पीके सिंह और एनके भोगल ने एक ही दिन भोपाल में और जबलपुर में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह साफ बताता है कि समझौते फर्जी हैं। वहीं वर्ष 2016-17 के आंकड़ों में चौंका देने वाले आंकड़े सामने आए हैं जिनसे पता चला है कि जेपी बीना पावर से गत 11 महीने में 14.2 करोड़ यूनिट के लिए लगभग रु 478.26 करोड़ का भुगतान किया, जिससे औसत बिजली दर 33.68 रु/यूनिट पड़ी। इसी प्रकार झाबुआ पावर से खरीदी गयी 2.54 करोड़ यूनिट के लिए रु 214.20 करोड़ का भुगतान किया गया, जिससे बिजली खरीदी की दर रु 84.33 प्रति यूनिट पड़ी। आज मध्य प्रदेश में 17,500 मेगावाट बिजली उपलब्ध है, जबकि अधिकतम मांग 12,000 मेगावाट है। अत: इन निजी कंपनियों से बिजली खरीदना पूर्णत: गैर जरुरी है। इन कंपनियों द्वारा आज 2163 करोड़ का फिक्स चार्ज का भुगतान किया जा रहा है, यह सरकार द्वारा किया अवैधानिक अनुबंधनों के कारण अगले 25 वर्ष तक भरना पड़ेगा, जिसके कारण मध्य प्रदेश की जनता का 54,000 करोड़ से ज्यादा रुपए आम जनता की जेब से लूट लिया जाएगा। उपरोक्त पावर परचेज एग्रीमेंट की वजह से बिजली के क्षेत्र में त्राहि-त्राहि मची है और दोष आप पर मढ़ा जा रहा है। तथ्य आपके सामने प्रस्तुत है, निर्णय लेने ना लेने का अधिकार आपका है। आज यही प्रश्न मैं उठाना चाह रहा था, लेकिन मैं शायद आपको भावार्थ नहीं समझा पाया, इसका मुझे खेद है।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।