मोदी बने प्रधानमंत्री, राहुल 2024 के लिए तैयार


सभी एग्जिट पोल के मुताबिक यदि इन्हें परिणाम मान भी लें तो यह तो तय है कि

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

2019 के लोकसभा चुनाव के अंतिम दौर का मतदान समाप्त हो जाने के तुरंत बाद आए विभिन्न एजेंसियों के सर्वे ने एक बार फिर मोदी सरकार के नारे को ही यथार्थ के करीब पहुंचते दिखाया है। इन एजेंसियों के द्वारा किए गए सर्वे को यदि 23 मई को आने वाले परिणाम भी मान लें तो एक बात तो तय दिख रही है कि 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान तब के घोषित वेटिंग प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने जनता से आग्रह किया भी था कि देश के संचालन और व्यवस्था के लिए उन्हें 10 वर्ष का समय चाहिए और लगता है कि जनादेश भी उसी तरफ झुका है। रही बात कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गाँधी की तो उन्हें 2016 के बाद से ही नरेंद्र मोदी ने ही प्राइम मिनिस्टर मटेरियल बना दिया लेकिन वास्तविक अर्थों में राहुल गाँधी की नजर 2024 के चुनावों की तरफ है और वे धीरे-धीरे उस ओर आगे बढ़ रहे हैं, कम से कम एग्जिट पोल के अनुमान तो यही बता रहे हैं। इन सर्वे के मुताबिक केरल की वायनाड सीट से चुनाव लडऩे की राहुल गांधी के साहसिक निर्णय का परिणाम है कि केरल और दक्षिण भारत में कांग्रेस की सीट संख्या में इजाफा होता दिख रहा है। अनुमान यही बता रहे हैं। रही बात नरेंद्र मोदी की तो इस बार उन्होंने पूरे देश में चुनाव को प्रेसिडेंसियल इलेक्शन का रूप दे दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने रणनीति के तहत पार्टी से इतर अपना चेहरा आगे बढ़ाया और भाजपा नहीं, अबकी बार मोदी सरकार और आएगा तो मोदी ही जैसे नारे गढ़े गए और मतदाताओं के बीच इन्हें खूब प्रचारित भी किया गया। शायद इस रणनीति को आगे बढऩे के पर्याप्त कारण भी थे मोदी को पता था कि पूरे देश में राजनैतिक दलों में अभी विपक्ष के पास सर्वमान्य नेता नहीं था, हां सबसे पुरानी पार्टी होने के नाते राहुल गांधी स्वाभाविक प्रतिद्वंद्वी तो थे लेकिन अखिलेश यादव ने मायावती को प्रधानमंत्री के रूप में पहली पसंद बताते हुए विपक्ष में दरार की संभावनाएं सामने ला दीं। फिर पुलवामा में हुए कायराना हमले का जवाब जिस अंदाज में बालाकोट में किया गया और उसे प्रचारित भी किया गया उससे राष्ट्रवाद के घोड़े पर सवार नरेंद्र मोदी ने दिल्ली को दुबारा फतह करने का जो अश्वमेध किया, उसकी परिणति के रूप में ये सर्वे आ रहे हैं, जो संभावित परिणामों में भी बदल जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। अपनी सभी फ्लैगशिप योजनाओं को तिलांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने इस चुनाव को केवल राष्ट्रवाद और पाकिस्तान की तरफ मोड़ दिया, उनकी इस रणनीति को विपक्षी न तो उगल पाए और न ही निगल पाए। हालांकि सभी सर्वे एक बड़े परिवर्तन की तरफ इशारा कर रहे हैं, उत्तरप्रदेश जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वाधिक चुनावी रैलियां किन वहां पार्टी को सपा-बसपा गठबंधन ने एक बड़ा झटका देने की और अग्रसर है। पिछली बार करे 73 सीटों की जगह पार्टी 35 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है यह मोदी और योगी दोनों के लिए एक बड़े शोध का विषय है कि क्यों प्रखर राष्ट्रवाद के आगे जातिगत समीकरण आगे निकल जाने वाला है? मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जहाँ अभी कुछ ही माह पहले विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ है, वहां के नतीजे भले ही सर्वे के मुताबिक ज्यादा उत्साह देने वाले न हों पर इतना जरूर है कि तीनों राज्यों में कांग्रेस ने अपना वोट शेयर बढ़ाया है। रही बात राजस्थान की तो वहां तो खुलेआम वसुंधरा तेरी खैर नहीं, मोदी तुझसे बैर नहीं का नारा आम मतदाता की मनोस्थिति को बता रहा था। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस अपने सीट को बढ़ाती नजर आ रही है और वहीं भूपेश बघेल भी पिछले बार के प्रदर्शन को सुधार रहे हैं। इस बार के सभी चुनावी सर्वेक्षणों पर यदि ध्यान से देखें तो तो एक सुखद तस्वीर सामने आ रही है वो है इस बार मजबूत विपक्ष भाजपा और उसके सहयोगियों के सामने इस बार एक मजबूत गठबंधन होगा जो समय-समय पर चेक एंड बैलेंस का काम करेगा। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस बार देश को औपचारिक नेता प्रतिपक्ष भी मिलने की संभावनाएं बनती दिख रही हैं।

हमने सारे एग्जिट पोल 2004 में भी देखे थे, 2018 के पाँच राज्यों के चुनाव के समय भी देखे थे, सब कांग्रेस की हार दिखा रहे थे, पर परिणाम सभी ने देखे, 23 मई का इंतजार करिए, सारी हकीकत सामने आ जाएगी। कांग्रेस की सीटें निश्चित ही बढ़ेगी, भाजपा के नारों-जुमलों की हकीकत भी सामने आएगी।
कमलनाथ

हमारे अनुभव के आधार पर पूर्व में जो एग्जिट पोल के नतीजे बताए गए थे, 2004 या अन्य उस समय भी अक्षरश: सही साबित नहीं हो पाए। इस वजह से इस पोल्स पर अभी टिप्पणी करना बहुत जल्दबाजी होगी, हमें विश्वास है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ही केंद्र में बनेगी।
सुरेश पचौरी

कमोबेश 2004 की स्थिति बन गई है। किसी सर्वे पर भरोसा नही करते हैं, सब कुछ 23 मई को साफ हो जाएगा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में 14 से 17 सीट कांग्रेस की झोली में आ रही हैं और देश में कितनी सीट मिलेगी, इस पर कुछ नहीं कह सकते।
दिग्विजय सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जो काम किया है, उससे देश का मान-सम्मान और शान बढ़ी है। देश का अद्भुत एवं अभूतपूर्व विकास हुआ है। हर वर्ग का कल्याण हुआ है। देश की सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व काम हुए हैं। मोदी मैजिक पूरे देश में चला है। भाजपा एवं एनडीए की देश में साढ़े तीन सौ से पौने चार सौ सीटों पर अभूतपूर्व विजय होगी।
शिवराज सिंह चौहान


नरेंद्र मोदी उस पारस पत्थर की तरह हैं, जिसके छूने मात्र से पत्थर भी सोना बन जाता है। मोदी जी किसी सरपंच और पार्षद की हैसियत के व्यक्ति को भी सांसद बनाने की क्षमता रखते हैं। 23 मई को आने वाले चुनाव परिणामों में अनेक अहिल्याओं का उद्धार मोदीजी के चरण स्पर्श से हो जाएगा।
गोपाल भार्गव

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।