मोदी महानता दिखाएं, राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाएं

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास
2019 का लोकसभा चुनाव निश्चित रूप से मोदी लहर पर जनता का बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी ऐतिहासिक घटना है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक मोर्चे (एनडीए) ने भाजपा के संसदीय दल के नेता अर्थात नरेन्द्र मोदी को सर्वसम्मति से दिल खोलकर समर्थन देते हुए सदन का नेता चुन लिया और एनडीए का समर्थन लेकर जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति से मिले तो राष्ट्रपति ने तुरंत ही उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण दे दिया।
अब यह बात तय हो गई कि मोदी सरकार फिर एक बार का नारा लोकसभा में गूंजेगा तथा 30 मई के पहले अथवा 30 मई तक प्रधानमंत्री पद की शपथ दूसरी बार लेते हुए नरेन्द्र मोदी भाजपा के किसी सर्वमान्य नेता के रूप में नया इतिहास रचेंगे। पूरे विश्व में भारतीय लोकतंत्र को महानतम एवं गौरवशाली परंपराओं का लोकतंत्र माना जाता है और सरकार सही दिशा पर अपने फैसले तब ले पाती है, जब सदन के अंदर विपक्ष मुखर हो, मजबूत हो और जनता की आवाज बनकर अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं। गाली-गलौच, हो-हल्ला, अमर्यादित संसदीय आचरण से अब लोकसभा सदस्यों को चाहे वे सत्तारूढ़ दल के हों या फिर विपक्ष के ही क्यों न हों, बचना पड़ेगा। वरना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के पास बहुमत की कोई कमी नहीं है। वे जैसा चाहेंगे, बिल पास हो जाएगा और विपक्ष की आवाज बिना बहस के हो-हल्ला में दबा दिया जाएगा। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार सत्ता में आना उन्हें अहंकारी नहीं बनाएगा, ऐसी अपेक्षा भारतीय लोकतंत्र को इंदिरा गांधी की सत्ता जाने के बाद पहली बार हो सकती है। इसलिए नरेन्द्र मोदी जी अब आप फलदार वृक्ष इतने विशाल हो गए हैं कि आप अपनी सफलता, शोहरत के ऐश्वर्य से लद गए हैं। लिहाजा आपको अब झुककर ही देश चलाना होगा। आपने अपनी विनम्रता की मिशाल उस समय पेश की, जब राजग नेता चुने जाने के बाद भाजपा के पितृ पुरुष, लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी के पैर छुए और उसके बाद प्रकाश सिंह बादल को भी झुककर प्रणाम किया। इसलिए यदि हम यह लिखें कि जिस तरह आप भाजपा के स्वयं के बलबूते पर सरकार बना सकने की स्थिति के बावजूद राजग के सभी दलों के नेताओं से समर्थन का प्रस्ताव कराकर प्रधानमंत्री बनने का उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया है। यही दृष्टिकोण यदि आप विपक्ष में बैठने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता होने के नाते निर्धारित 10 प्रतिशत संख्या में सदन में उपस्थिति नहीं होने के बावजूद यदि यूपीए के अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से प्रतिपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्रदान करते हैं तो यह भी एक नया इतिहास होगा।
यह बात अलग है कि यूपीए के सहयोगी दल के नेताओं द्वारा राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाने हेतु सहमति न मिले तो बात अलग है। लेकिन आपने यदि महानता दिखाई और राहुल गांधी को लोकसभा में प्रतिपक्ष बनाने के लिए थोड़ा भी पहल कर दिया तो पूरे विश्व में भारतीय लोकतंत्र की यह गौरव गाथा दशकों तक गाई जाएगी। स्मरण हो कि जब पं. जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे तो विपक्ष की शून्यता को देखते हुए प्रखर समाजवादी डॉ. राम मनोहर लोहिया को उन्होंने संसद में चुनकर आने का मौका दिया और उसी डॉ. राममनोहर लोहिया ने गैर बराबरी के खिलाफ अमीर और गरीब के बीच खाई को लेकर संसद के अंदर विपक्षी तेवर के इतने सारे मिशाल पेश किए कि देश में समाजवाद खड़ा हो गया और लोकनायक जय प्रकाश की क्रांति के तो आप स्वयं भी उपज हैं। इसलिए अब मौका है आपके पास कि विपक्ष को इतना मजबूत बना दें कि देश दाएं-बाएं न चलकर सीधे रास्ते पर चले और आतंकवाद हो या नक्सलवाद भारत को निजात मिले तथा विकास के सभी कीर्तिमान जिसकी कमी देश ने गत 70 वर्षों में महसूस की हो, वह पूरी हो सके। राष्ट्रीय हिन्दी मेल समूह की ओर से भारत के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए आपका शत्-शत् अभिनंदन और एक उम्मीद भी ऐसी कि चौथे खंभे के किसी सवाल से आप बचने की कोशिश भी नहीं करेंगे, सवाल सही हुआ तो उत्तर भी सही आएगा।

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।