9 रत्नों ‘नौकरशाहों की टीम

कमलनाथ सम्राट अकबर की तरह करने लगे काम, अंतत: बनाई

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

सैकड़ों वर्ष पुराने भारतीय इतिहास के पन्नों में आपने पढ़ा होगा कि भारत के मुगल सम्राट अकबर के जमाने में अपनी प्रजा के सुख दुख को बराबरी से बांटने के लिए तथा उनके साथ पल-पल न्याय करने के लिए राजमहल में 9 रत्न तैनात किए गए थे। सम्राट अकबर के समय बीरबल उनके दरबार में विदूषक और सलाहकार थे। जबकि राजा टोडरमल अकबर के वित्तमंत्री थे और तानसेन, मानसिंह, अब्दुल रहीम खानखाना, मुल्ला दो प्याजा, हकीम हुमाम को मिलाकर ऐसे 9 रत्न थे जिन्होंने कभी अपने सम्राट की नजर प्रजा के सामने झुकने नहीं दी। आज के जमाने में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्हें सम्राट अकबर की कार्यशैली बेहद पसंद है। वे सुबह से उठकर शाम तक केवल प्रशासनिक और जनहित के फैसलों में अपना पूरा समय निकाल देते हैं। केंद्र सरकार में 30 वर्ष मंत्री रहने के बाद उन्होंने जो कुछ सीखा है उसमें सम्राट अकबर का एक गुण अनुशासन और समय की पाबंदी उनके रग रग में है। शायद इसी के चलते अब कमलनाथ की सरकार नौकरशाहों का चयन सम्राट अकबर के दरबार के 9 रत्नों की तरह कर लिया है ऐसा कहा जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। सरकार का गुड गवर्नेस और डिलेवरी सिस्टम बेहतर हो इसलिए मुख्यसचिव सुधिरंजन मोहंती, वित्तीय संसाधन नियंत्रित हो, मध्यप्रदेश हरियाली से भरा हो, किसान खुशहाल हो, सिंचाई और नर्मदा संरक्षित हो, इसलिए अतिरिक्त मुख्यसचिव एम गोपाल रेड्डी, मितव्यता रोकी जाए इसलिए अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग जैन,मध्यप्रदेश में कभी अंधेरा न हो इसलिए अतिरिक्त मुख्यसचिव आईसीपी केशरी, पंचायत राज मजबूत हो इसलिए अतिरिक्त मुख्यसचिव श्रीमती गौरीसिंह, कलेक्टरों की पदस्थापना तथा मुख्यमंत्री से हर आम आदमी की चिंता करने वाला समन्वय करने के लिए प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल, युवा स्वाभिमान योजना और मीडिया से बेहतर संवाद स्थापित करने वाले प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा, मध्यप्रदेश का विकास ङ्क्षछंदवाड़ा मॉडल के अनुरूप होने लगे इसलिए प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव, किसानों के हर फैसले को हर गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी के लिए प्रमुख सचिव अजीत केशरी यह सभी नौकरशाह ऐसे 9 रत्न हैं जिन्हें मुख्यमंत्री ने कम से कम 18 महीनों के लिए पदस्थ किया है और कहा है कि हर हाल में मुझे परिणाम चाहिए। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ 2019 के लोकसभा चुनाव में हार से विचलित नहीं हैं लेकिन काम नहीं करने वाले नौकरशाहों के खिलाफ कोई कार्यवाही करने में उन्हें कोई गुरेज नहीं है। इसलिए ई टेंडर घोटाले के बाद मध्यप्रदेश में अब सभी घोटालों से परदे उठा दिए जाएं और व्यापमं को समूल नष्ट कर दिया जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा।