क्या असंभव को संभव करेंगे मोदी…

विशेष संपादकीय

विजय कुमार दास
भारतीय लोकतंत्र में देश में कट्टर हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के घोर समर्थक नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार प्रधानमंत्री बन जाना निश्चित रूप से हमारे भविष्य के लिए एक ‘टर्निंग पाईंट है। शपथ समारोह में आज दुनिया भर के मेहमानों ने भारत को विश्व गुरू का दर्जा दिलाने वाले प्रधानमंत्री की आभा को शायद पहली बार देखा होगा, वैसे तो नरेन्द्र मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही विश्व भर में इतनी यात्राएं की और भारत का सिर ऊचा करने के लिए पूरे कन्विक्शन के साथ अपना पक्ष रखा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया था कि प्रधानमंत्री भारत में ही दौरे पर आते हैं। आरोप-प्रत्यारोपों के दौर से पांच वर्षों तक देश की सत्ता का संचालन और उसके बाद 65 प्रतिशत युवाओं के देश में राष्ट्रवाद का अलख जगाकर 2019 की लोकसभा चुनाव में उसे चुनावी मुद्दा बनाना केवल मोदी-शाह की जोड़ी के बस में ही संभव हो सका। लेकिन प्रधानमंत्री जी अब आपको इस देश के लिए असंभव समस्याओं का हल निकालना सबसे बड़ी चुनौती है, यू कहा जाए कि नरेन्द्र मोदी की भाषा में ही सही असंभव को संभव किया जा सकता है। इस संपादकीय के पहले वाक्य में आपके सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती है कि 130 करोड़ की आबादी वाले भारत में रोज एक हरियाणा राज्य बनने से कैसे रोक पाएंगे। संजय गांधी की पहल थी देश में परिवार नियोजन जरूरी और उनका नारा था ‘हम दो हमारे दो लेकिन अब समय आ गया है कि भारत में हम दो और हमे अब केवल एक की ही जरूरत है। इतनी बड़ी चुनौती का हल यदि नहीं निकला तो यकीन मानिये 2050 में आप का यह भारत पानी और रोटी के लिए गृह युद्ध में बदल जाएंगा, तब उस समय की पीढ़ी भारत के तमाम प्रधानमंत्रियों के साथ आपको भी भला-बुरा कहने में संकोच नहीं करेंगे। मेरा मानना है कि आबादी के नियंत्रण के लिए दुनिया के सभी देशों में चाहे वे मुस्लिम देश ही क्यों न हो समान कानून होता है, यह हिन्दुस्तान है जहां हिन्दू-मुस्लिम-सिख्ख-ईसाई भाई-भाई तो कहलाते हैं लेकिन सब के लिए कानून की परिभाषा अलग-अलग है और यह परिभाषा आबादी के नियंत्रण के लिए सबसे ज्यादा कू्रर है जिसकी वजह से यह देश दो कदम आगे आपके साथ जाता है, लेकिन बढ़ती हुई आबादी इसे चार कदम पीछे ले आती है। यही कारण है कि हम करोड़ों युवाओं की बेरोजगारी का अभिषाप झेल रहे हैं। आप तो लोक नायक जय प्रकाश के हिमायती है तो एक कानून आबादी नियंत्रण के लिए ऐसा बनाना होगा जो सबसे के लिए समान हो और वह ‘मोदी है तो मुमकिन हैÓ वाले नारो से नहीं निर्णय से संभव होगा, क्योंकि हमे यकिन है कि इस निर्णय को मोदी ही लागू करा सकते हैं मतलब हम दो और हमारे एक का कानून सबसे पहली चुनौती है वरना देश…
2 दूसरी चुनौती है कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर यही आपने फारूक अब्दुल्ला के खानदान को देश के लिए ललकारा है तो फिर वायदे के मुताबिक जम्मू कश्मिर से 35ए कब हटेगा, धारा 370 कैसे समाप्त होगा यह सबसे बड़ा सवाल है… 3. 2019 के भारतीय जनता पार्टी अपने संकल्प पत्र का स्मरण जरूर करें जिसमें आपने कहा कि सौहाद्र पूर्ण वातावरण में मंदिर का निर्माण होगा, आपका यह वादा देश के हिन्दु और मुस्लिमानों दोनों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, तथा हिन्दुत्व पर यदि मतदाताओं ने दिल खोलकर आस्था व्यक्त की है तो फिर अब आप उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ कर ही नहीं सकते, आपको तो यह साबित करना होगा कि धार्मिक उनमाद के बिना यह वायदा कैसे पूरा करेंगे और आपके लोकसभा चुनावी प्रचार के सभाओं में विकासपंथी होने का नया समीकरण कैसे लागू होगा। मोदी है तो मुमकिन है इस नारे का, इन शब्दों के प्रति विश्वास करके जनता के मेनडेट पर आपको दूसरी बार प्रधानमंत्री बनना आपके लिए ठीक उसी प्रकार का उपहार है जैसे कोई बड़ा फलदार वृक्ष फलों से लद जाता है तो उस वृक्ष को झुक कर ही प्रकृति को प्रणाम करना पड़ता है। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि जितनी ऊचाई पर आप पहुंच चुके हैं छोटी या ऐसी हरकत अपने सहयोगियों की नहीं होने देंगे जिससे आपकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर विपरित असर पड़ेगा। मेरा कहने का मतलब स्पष्ट है कि विपक्ष की भूमिका सम्मान होना चाहिए, विपक्ष के मुद्दो का हल निकलना चाहिए और चूंकि हम मध्यप्रदेश के समाचार पत्र है इसलिए उम्मीद करते हैं कि कमलनाथ की सरकार को जब तक वह बहुमत में है गिराने का कुत्सित प्रयास नहीं होगा और यह बहुत बड़ी आपके सामने राजनीतिक चुनौती इसलिए होगी क्योंकि कैलाश विजय वर्गीय जैसे आपके उत्साही नेता मध्यप्रदेश में सरकार गिराने की बात पर बार-बार दबाव बनाएंगे। वैसे तो चुनी हुई राज्य सरकारें किसी भी दल की हों उन्हें गिराने के बजाय उन राज्यों में केन्द्रीय सहायता पहुंचाने के लिए पक्षपात ना हो और वै राज्य भी आपकी सरकार के ही हिस्से है यह सोच कर उनके विकास को भी उसी तराजू से तौला जाए जिस तरह भाजपा शासित राज्यों के साथ आपका व्यवहार होगा। शायद यह निर्णय आपके विशाल ह्दय की राजनीति को निश्चित रूप से स्थापित करेंगा, क्योंकि अब भारत में महात्मा गांधी के बाद कोई और महात्मा बनने की दौड़ में है तो उसका नाम चाय वाला नरेन्द्र मोदी ही है। यह संपादकीय आपके दृढ निश्चिय और संकल्पों का दोहराने के लिए नहीं लिखा गया है, लेकिन जिस 23 मई 2019 को देश की जनता ने ‘मोदी सरकार- फिर एक बारÓ की आवाज पर मुहर लगाई उस दिन हमने यह तय कर लिया था कि हम वह बात लिखेंगे जो इस देश में असंभव है और नरेन्द्र मोदी ही उसे संभव करके दिखा सकते हैं। जहां तक सवाल है सुरक्षा का, विकास का और सत्ता के संचालन का उसमें आप पारंगत हो चुके हैं तथा 5 साल के सत्ता में भष्ट्राचार के एक भी आरोप नहीं लगना किसी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है, लेकिन जिस राफेल के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शोर मचाया था उसका जवाब आपने कभी नहीं दिया, लेकिन में उम्मीद करता हंू कि 2019 की लोकसभा में आपके पहले भाषण में ही राफेल के मुद्दे पर देश की जनता को वे सारे जवाब मिल जाएगे जिसकी जिज्ञासा लेकर उस वर्ग ने भी आपको वोट किया है जो चाहता नहीं था, लेकिन चाहने लगा आपको…!

विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।