जल और जीवन को जोडऩे प्रतिदिन 40 लीटर पानी प्रतिव्यक्ति दे रहे: संजय शुक्ला


पीएचई विभाग प्रतिदिन कर रहा पानी सप्लाई की मॉनिटरिंग, ग्रामीण क्षेत्र में मिल रहा पर्याप्त पानी
ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार/9425002527
भोपाल, 3 जून।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इस भीषण गर्मी में प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने को लेकर मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती ने पहले ही पीएचई विभाग को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्य सचिव ने विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्र में जलसंकट की स्थिति नहीं बने, इसे ध्यान में रखने की हिदायत विभाग को दी थी। जिसके बाद पूरा पीएचई विभाग मुस्तैदी से लगा हुआ है। आज स्थिति यह है कि 52 जिलों में से 45 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रतिदिन हो रही है। शेष 7 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में जरूर दो से तीन दिनों के अंतराल में पानी उपलब्ध करा पा रहे हैं। प्रदेश के 100 प्रतिशत लोग ऐसे हंै, जिन्हें प्रतिव्यक्ति, प्रतिदिन 45 लीटर पानी दे रहे हैं तो वहीं 88 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जिन्हें प्रतिव्यक्ति, प्रतिदिन 55 लीटर पानी मिल रहा है। जब इस संबंध में राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने संजय कुमार शुक्ल, प्रमुख सचिव पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के आवासों में 128231 कनेक्शन हैं। जिनमें से 113719 अर्थात 88 प्रतिशत ग्रामीण आवासों में प्रतिदिन 55 लीटर पानी की सप्लाई हो रही है। उन्होंने बताया कि कुल 546201 हैंडपम्प हैं, जिसमें 497869 चालू हैं और 48332 हैंडपम्प बंद हैं। करीब 3860 हैंडपम्प की मरम्मत हो रही है तो धरातल में पानी की कमी से 38751 हैंडपम्प बंद हैं तथा 5721 ऐसे हैं जिनकी मरम्मत नहीं की जा सकती है। इसी तरह पाइप जलापूर्ति योजना के तहत 15390 कनेक्शनों में 14268 कनेक्शन चालू हैं तथा 1122 विभिन्न कारणों के चलते बंद हैं। जैसे पानी के स्रोत 596, इलेक्ट्रिकल फाल्ट 34, मोटर पंप जलने व खराब होने 74, खराब पाइप लाइन से 166, ग्राम पंचायतों द्वारा नहीं चलाने से 31 सहित अन्य हैं। प्रमुख सचिव पीएचई संजय कुमार शुक्ल ने बताया कि सभी जिलों में हैंडपम्प के स्पेयर पार्ट्स और रिसर पाइप्स के साथ ही 6224 सिंगल फेस की मोटर पम्पस भी उपलब्ध करा दी गई है। इतना ही नहीं पेयजल परीक्षण अभियान के तहत 45 जिलों में परीक्षण हो चुका है, केवल ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, शिवपुरी, भिंड व मुरैना बचा हुआ है। 313 ब्लॉक में से 170 ब्लॉक के हैंडपम्पों के मरम्मत का कार्य आउट सोर्सिंग के जरिए किया जा रहा है। इसके अलावा मरम्मत कार्य के लिए जिला कलेक्टरों को 20 लाख और ग्राम पंचायतों को 5 लाख रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति के अधिकार भी दिए हैं।

परिवहन की स्थिति ना के बराबर
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल परिवहन की स्थिति इस वर्ष ना के बराबर है। केवल प्रदेश के कुछ ही ऐसे स्थान हैं, जहां पर पेयजल परिवहन किया जा रहा है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में 50 लाख लोगों के लिए पेयजल परिवहन किया जा रहा है, जबकि मध्यप्रदेश की तुलना में महाराष्ट्र राज्य ज्यादा सक्षम है। पेयजल परिवहन के मामले में मध्यप्रदेश करीब 40 हजार लोगों तक पानी पहुंचाने का काम कर रहा है, जो ना के बराबर है।

जल निगम दे रहा 1000 गांवों को पानी
प्रदेश का जल निगम विभाग भी ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कराने में पीछे नहीं हैं। पीएचई विभाग की तरह जल निगम भी करीब 1000 गांव में पानी देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। निगम ने इसके लिए प्रदेश में क्लस्टर चिंहित किए हैं। जिनमें ओवर हेड वाटर टैंकों के माध्यम से पाइप लाइनों के द्वारा घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। जल निगम का यह प्रयोग अत्यंत ही सफल रहा है, जिसे भविष्य में पानी की किल्लत झेल रहे सभी जिलों में लागू करने की योजना है।