मतलब कमलनाथ सरकार में तबादलों को लेकर लेन-देन की गुंजाइश नहीं


विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में 15 साल से सत्ता में रहे भारतीय जनता पार्टी की सत्ता बदलते ही जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार काबिज हुई तो 100 दिनों की सरकार में जितने भी तबादले हुए, उसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुलकर आरोप लगाया कि कमलनाथ की सरकार में ‘लाÓ एंड ‘आर्डरÓ की परिभाषा बदल गई है। उन्होंने कहा कि पैसे लाओ और तबादला आदेश ले जाओ, कमलनाथ की सरकार का एक सूत्रीय एजेंडा है। लेकिन राष्ट्रीय हिन्दी मेल ने कमलनाथ सरकार में तबादलों को लेकर गहरी जांच-पड़ताल की है, जिससे यह पता चलता है कि मध्यप्रदेश में एक मुख्यमंत्री पहली बार ऐसा भी आया है, जिसने अपने मंत्रियों को दो-टूक सलाह दी है कि तबादलों को लेकर वे पारदर्शिता अपनाएं और किसी से पैसे न खाएं। सूत्रों के अनुसार उनके इस कड़े निर्देश से कुछ मंत्री तो व्याकुल नजर आते हैं और कुछ मंत्री ऐसे हैं, जो यह कहने में नहीं संकोच करते कि हम अच्छी छबि सरकार की बनाएंगे तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस मजबूत होगी। आज की तारीख में कमलनाथ की सरकार को 165 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन कल जब मध्यप्रदेश के पुलिस मुख्यालय से भारतीय पुलिस सेवा के 36 अधिकारियों के इधर-उधर होने के आदेश निकले तो हमने यह पता लगाने में पूरा जोर लगाया कि इतने व्यापक तबादलों के पीछे लॉजिक क्या है। जिन अधिकारियों के तबादले हुए उनसे बातचीत भी हुई। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पता था कि तबादला होने वाला है, जिनको जिलों से उठाकर पुलिस मुख्यालय भेजा गया, उन्हें भी इसका कारण नहीं मालूम और जिन्हें पुलिस मुख्यालय से उठाकर रातों-रात जिलों में पदस्थ कर दिया गया उन्हें भी पता तक नहीं था कि कल वे किसी जिले के पुलिस अधीक्षक बनने वाले हैं। इसका मतलब स्पष्ट है कि कमलनाथ सरकार आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की पदस्थापना में किसी प्रकार के लेन-देन से कोसों दूर है और प्रशासनिक व्यवस्था को अनुशासन के दायरे में लाकर ही अपनी छबि बनाना चाहती है। यदि पदस्थापनाओं में पैसे लिए जाते तो बात किसी से छिपती नहीं और यह मध्यप्रदेश राज्य में गुड गवर्नेंस की शुरुआत के लिए अच्छा कदम माना जाएगा। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती, पुलिस महानिदेशक वीके सिंह तथा विशेष कर्तव्य अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा की निष्पक्ष राय पर तीन दर्जन भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को बदल दिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के सूत्रों का कहना है कि सरकार की कानून और व्यवस्था सुदृढ़ हो, जिसमें किसी प्रकार की कोई राजनीति न हो इसलिए यह सब गोपनीय ढंग से लिया गया निर्णय है। सूत्रों के अनुसार मंत्रियों तक को इस बात की हवा नहीं लगी कि उनके जिले में कौन पुलिस अधीक्षक या संभाग में डीआईजी या आईजी बदले जा रहे हैं। यदि मंत्रियों की सिफारिश पर उपरोक्त तबादला आदेश जारी किए जाते तो शंकाएं स्वाभाविक थीं, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आरोपों को सिरे से खारिज करने के लिए यह कदम उठाया है। सवाल उठता है कि कमलनाथ सरकार की अब योजनाएं क्या हैं? इसका उत्तर यदि मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती की बातों पर भरोसा किया जाए तो स्पष्ट होता है कि कांग्रेस सरकार ने उन्हें वचन पत्र पूरे करने के निर्देश दिए हैं, उनका लक्ष्य हर हालत में वचन पत्र में किए गए वादों पर अमल करना है। मुख्य सचिव के अनुसार वचन पत्र के 83 वायदों पर काम अंतिम चरण पर है और अब अगले तीन महीने के अंदर वायदों के पूरे करने का लक्ष्य 100 से ऊपर पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा गुड गवर्नेंस, डिलेवरी सिस्टम जनता के हित में बेहतर से बेहतर हो यह कमलनाथ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।