2011-12 से 2016-17 के बीच बढ़ा चढ़ाकर दिया था जीडीपी का आंकड़ा

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने किया खुलासा
नई दिल्ली, 11 जून।
मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन के इस दावे पर बड़ा बवाल खड़ा हो सकता है। उन्होंने अपने ताजा रिसर्च पेपर में दावा किया है कि वित्त वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट शायद 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाकर बताया गया था। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2011 और 2016 के दौरान जीडीपी में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि का दावा किया गया था, लेकिन पूरी संभावना है कि उस दौरान ग्रोथ रेट 3.5 से 5.5 प्रतिशत रहा हो।
रिसर्च पेपर कहता है, देश के अंदर और बाहर कई प्रकार के साक्ष्य हैं जिनसे पता चलता है कि भारत का जीडीपी ग्रोथ 2011 के बाद हर साल करीब 2.5 प्रतिशत बढ़ाकर बताया गया था। 1 प्रतिशत बढ़ाकर बताने की तो 95 प्रतिशत की गारंटी है। सुब्रमण्यन ने लिखा, इंडियन पॉलिसी की गाड़ी गड़बड़ और संभवत: टूटे हुए स्पीडोमीटर के साथ आगे बढ़ती रही थी।
केंद्रीय सांख्यकी कार्यालय (सीएसओ) का आंकड़े बताते हैं कि पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गिरा। इस कारण भारत को पछाड़कर चीन आगे निकल गया। इसकी वजह कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में आई कमजोरी रही। पूर्व सीईए ने कहा, 2011 से पहले देश के खाते में जो मैन्युफैक्चरिंग वैल्यु जोड़ी जाती थी, उसका औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और विनिर्माण निर्यातों के विनिर्माण घटकों से सीधा-सीधा तालमेल होता था। लेकिन, उसके बाद एक प्रमुख प्रणालीगत बदलाव (मैथडलॉजिकल चेंज) से औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र की माप प्रभावित हुई।