कमलनाथ सरकार का बेरोजगारों को बड़ा तोहफा

सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 और अधिकतम 35-40 वर्ष करने का निर्णय लिया गया
भोपाल, 11 जून।
मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की आज मंत्रालय में हुई बैठक में राज्य शासन की सेवाओं में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। अर्थात बेरोजगारों के लिए मप्र सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। इसमें म.प्र. लोक सेवा आयोग से भरे जाने वाले पदों (राजपत्रित/अराजपत्रित/कार्यपालिक) के लिए खुली प्रतियोगिता से सीधी भर्ती के भरे जाने वाले पदों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 और अधिकतम 35 वर्ष करने का निर्णय लिया गया। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, शासकीय/ निगम/ मण्डल/ स्वशासी संस्था के कर्मचारियों/ नगर सैनिक/ नि:शक्तजन/ महिलाओं (अनारक्षित/ आरक्षित) आदि के लिए आयु सीमा 21 से 40 वर्ष करने का निर्णय लिया गया।
लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए खुली प्रतियोगिता से सीधी भर्ती के भरे जाने वाले पदों के लिए आयु सीमा 18 से 32 वर्ष निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, शासकीय/ निगम/ मण्डल/ स्वशासी संस्था के कर्मचारियों/ नगर सैनिक/ नि:शक्तजन/ महिलाओं (अनारक्षित/ आरक्षित) आदि के लिए आयु सीमा 18 से 37 वर्ष करने का निर्णय लिया गया।
छिंदवाड़ा में केन्द्रीय जेल की स्थापना
मंत्रिपरिषद ने छिंदवाड़ा में आजीवन कारावासी बंदियों की सुरक्षित अभिरक्षा के लिए 1000 बंदी क्षमता की केद्रीय जेल एवं विचाराधीन बंदियों के लिए 700 बंदी क्षमता की जिला जेल, (नवीन जेल) निर्मित करने और नवीन जेल काम्प्लेक्स बनने के बाद पुरानी जेल की भूमि राजस्व विभाग को सौंपने का निर्णय लिया।
निवाड़ी में नए पद सृजन की मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने उप कोषालय निवाड़ी का जिला कोषालय के रूप में उन्नयन करने के फलस्वरूप जिला कोषालय के लिए प्रस्तावित पदीय संरचना अनुसार 19 पदों के समायोजन और भृत्य के 2 नये पद सृजित करने तथा इसकी पूर्ति आउटसोर्स से करने की अनुमति प्रदान की। मंत्रिपरिषद ने जिला निवाड़ी के लिए जिला लोक सेवा प्रबंधक का एक पद और कार्यालय सहायक का एक पद संविदा आधार पर सृजित करने की मंजूरी द

मंत्रिपरिषद के निर्णय

सड़क निर्माण एजेंसियों में तालमेल के लिए नीति बनाएं: कमलनाथ

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सड़क निर्माण एजेंसियों में समन्वय के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। नाथ ने आज मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में कार्यरत विभिन्न एजेंसियां भ्रम दूर करते हुए एक ऐसी नीति तैयार करें, जिससे हर एजेंसी को अपना कार्य-क्षेत्र और दायित्व पता हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई सड़कों का निर्माण अथवा मेंटेनेंस इसलिए नहीं हो पाता, क्योंकि एक विभाग दूसरे विभाग को जिम्मेदार ठहराता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान करते हुए समग्र नीति बनाई जाए, ताकि आवागमन के प्रमुख साधन सड़कों का निर्माण और संधारण निर्बाध हो।
मुख्यमंत्री नाथ ने कहा कि सड़कों के निर्माण के साथ पर्यावरण सुधार के लिए व्यापक पैमाने पर वृक्षारोपण भी होना चाहिए। उन्होंने सड़क निर्माण के प्रोजेक्ट में ही वृक्षारोपण का प्रावधान शामिल करने को कहा। नाथ ने कहा कि सड़कों के दोनों ओर पौधारोपण हो, यह सुनिश्चित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सड़कों के संधारण (मेंटेनेंस) पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के दौरान होने वाले अनुबंध में संधारण शर्तों का सख्ती से पालन हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विभाग को अपने स्वयं के आय के स्रोत भी विकसित करना चाहिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के साथ अपने रिसोर्स भी बने, ऐसा प्रोजेक्ट विभाग की ओर से तैयार हो। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहरों के आसपास बड़े पैमाने पर रिंग रोड और बायपास सड़कें बनाई जाएं। मास्टर प्लान में इसे शामिल करें, ताकि शहरों का विस्तार हो और आवागमन सुगम हो।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ी सड़कों के निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण में विलंब होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रोजेक्ट अनावश्यक लंबित रहते हैं और समय रहते इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पाता। नाथ ने भूमि अधिग्रहण के मामले में एक अलग प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने को कहा, जो सिर्फ अधिग्रहण के मुद्दों को शीघ्रता के साथ निराकरण करवाएगा। मुख्यमंत्री ने ही भूमि अधिग्रहण के लिए अलग से एक आई.एफ.एस. अधिकारी को नियुक्त करने के निर्देश दिए, जो सिर्फ वन भूमि से संबंधित मामलों का निराकरण करेगा। उन्होंने कहा कि इससे हम अपने प्रोजेक्ट समय-सीमा में पूरे कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण और भवन निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्माण सामग्री की क्वालिटी पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक में लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती, अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण मलय श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।