आम जनता पर नहीं बढ़ेगा टैक्स का बोझ: तरूण भनोट


प्रदेश सरकार ने शुरू की बजट की तैयारी
हृदेश धारवार, 9755990990
भोपाल, 12 जून।
वित्तीय संकट से जूझ रही मध्यप्रदेश सरकार ने नए बजट की तैयारी शुरू कर दी है। बजट को लेकर यह माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय घाटे से उबरने के लिए प्रदेश की जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा सकती है। लेकिन वित्त मंत्री तरूण भनोट ने अगले महीने पेश होने वाले बजट को लेकर राष्ट्रीय हिन्दी से विशेष चर्चा में कहा कि प्रदेश सरकार अपने बजट में आम जनता पर किसी भी प्रकार के नए टैक्स का बोझ नहीं बढऩे देगी। उन्होंने कहा कि सरकार का जो बजट आने वाला है, वो यथार्थ होगा और वास्तविकता पर होगा। मध्यप्रदेश का सुचारू रूप से व्यवस्थित विकास हो और सरकार की जो जनकल्याणकारी योजनाएं हैं, वो भी सुचारू रूप से चलती रहें, इस पर हमारा पूरा फोकस होगा।
बगैर टैक्स बढ़ाए किए जाएंगे आय बढ़ाने के प्रयास: वित्त मंत्री तरूण भनोट ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने 15 वर्षों में ऐसे कोई उपाय नहीं ढूंढे जिससे प्रदेश सरकार की आय बढ़े। उन्होंने कहा कि हमारा फोकस इस बात पर भी होगा कि ऐसे आय के स्त्रोत बढ़ाए जाएं, जिससे प्रदेश की आम जनता पर कर का बोझ न आए और सरकार की वित्तीय स्थिति भी अच्छी रहे, सरकार का खजाना भरा रहे और हम बेहतर ढंग से काम कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार कर्ज लेती है जो विकास के कार्यों के लिए जरूरी भी है। हम इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे कि कर्ज की राशि का सदुपयोग हो, अधोसंरचना के विकास हों और उस राशि को उद्योगों को बढ़ावा देने में खर्च किया जाएगा, जिससे उसकी रिकवरी भी हो सकेगी और प्रदेश का राजस्व भी बढ़ेगा।
घाटे से उबरना हमारे लिए कोई चैलेंज नहीं
वित्त मंत्री तरूण भनोट ने कहा कि घाटे से उबरना हमारे लिए कोई चैलेंज नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं मानता कि घाटे का मतलब यह नहीं कि सरकार के पास कोई और उपाय नहीं है, हम टैक्स बढ़ाकर जनता से घाटे की वसूली कर लें। उन्होंने कहा कि हम जो कर्ज लेते हैं, वो इस ओर इशारा करता है कि हमारी जीडीपी बढ़ रही है, हमारी ग्रोथ बढ़ रही है। हमारी क्षमता हमें यह बताती है कि हम वित्तीय संस्थाओं से, बैंकों से जो ऋण ले रहे हैं, वो हमें बताती है कि हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह नहीं कि हमने ऋण लिया, महत्वपूर्ण यह है कि हमने उस पैसे का सदुपयोग कैसे किया। पिछली सरकार से भूल हुई है, जो पैसा लिया उसकी बंदरबांट की गई, कई योजनाएं ऐसी शुरू की गईं जिसका जनता को भी कोई लाभ नहीं हुआ, हम ऐसी सभी योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के खजाने में जो भी पैसा आता है, वो कर के रूप में आता है, उस पैसे का सदुपयोग हो, स्थाई काम हों, प्रदेश की जनता को योजनाओं का लाभा मिले, इसके प्रयास होना चाहिए।