मुख्यमंत्री जी, सिविल इंजीनियरों की भर्ती कब कराएंगे…?


1990 के बाद से नहीं हुई जेनको में सिविल इंजीनियरों की भर्ती, 250 में से महज 135 सिविल इंजीनियर्स बचे

विशेष रिपोर्ट
ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से वैसे तो हर वर्ग के व्यक्ति को बहुत सारी उम्मीदें हंै, जिस पर खरा उतरने के लिए वे प्रयासरत भी हैं। उनका अभी तक तो यही प्रयास रहा है कि आम जनता की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जो वादे उन्होंने चुनाव के दौरान अपने वचन पत्र में किए थे, उसे जल्दी पूरा कर सकें। उन्होंने अभी तक करीब वचन पत्र में शामिल 90 से अधिक वादों को पूरा भी किया है। अभी हाल ही में उन्होंने कैबिनेट में शासकीय नौकरी में आयु की सीमा को बढ़ाकर बेरोजगारों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। लेकिन मुख्यमंत्री जी, आपको अभी एक और बड़ा निर्णय बिजली कंपनियों के हित में लेना है और वो निर्णय बिजली कंपनियों में भर्ती का है। जिसे आप जैसे दूरदर्शी सोच वाले मुख्यमंत्री ही ले सकते हैं। आज प्रदेश की बिजली कंपनियों में यह मांग उठ रही है कि लंबे समय से बिजली कंपनियों में हेल्पर, लाइनमेन, पीए-1 ,पीए-2 व पीए-3, भृत्य, सिविल इंजीनियर्स की भर्ती नहीं हुई है। सबसे खराब स्थिति मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के सिविल विंग की है। इस कंपनी में सिविल विभाग में 1990 के बाद से आज तक भर्ती नहीं हुई है, अर्थात 29 साल हो गए। जिसके कारण एक-एक सिविल इंजीनियरों के पास दो से तीन साइडों का प्रभार है। अगर बात जेनको कंपनी की करें तो कहने को यहां पर 5200 से अधिक का कुल स्टाफ है, लेकिन इसी कंपनी के सिविल विंग पर नजर दौड़ाएं तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2005 में जो सिविल इंजीनियर्स की कुल संख्या 250 हुआ करती थी, वो महज अब 135 रह गई है। जो 4 थर्मल और 10 हाइडल प्लांट के अलावा रेलवे साइडिंग, कालोनी सहित अन्य मेंटेनेंस का काम देख रहे हैं। जेनको कंपनी में पीए-1, पीए-2 व पीए-3 के पदों पर भी भर्ती करने के निर्णय शीघ्र होना चाहिए। नहीं तो वह दिन अब दूर नहीं, जब पावर प्लांटों के संचालन के लिए बिजली कंपनियों के पास कर्मचारी नहीं रहेंगे और सभी पावर प्लांटों को ठेके पर देने के लिए राज्य सरकार को मजबूर होना पड़ेगा।

एसीएस ऊर्जा को देना चाहिए फ्री हैंड
मुख्यमंत्री कमलनाथ को प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में आवश्यकतानुसार भर्ती करने के मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आईसीपी केशरी को फ्री हैंड देना चाहिए, ताकि वे इस संदर्भ में एक मास्टर प्लान बनाकर इसे अंजाम दे सकें। क्योंकि आईसीपी केशरी को ऊर्जा विभाग का कामकाज देखते हुए करीब ढाई साल से अधिक का समय हो गया है, जिसमें वे छह बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और उसके ढांचे से भलीभांति परिचित हो गए हैं। वैसे भी आईसीपी केशरी की गिनती भी उन ब्यूरोक्रेट्स में आती है, जो हर चुनौती पर खरे उतरते हैं।