मंत्री हो या नौकरशाह, सरकारी कार केवल एक हो…


मध्यप्रदेश में मंत्री हों या नौकरशाह अपने एक बंगले में 4-5 सरकारी कारों को रखने का चलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ खर्च कम करने की और मितव्ययता बरतने की सलाह दे रहे हैं तो दूसरी ओर जिस मंत्री के पास जितने विभाग और जिस नौकरशाह के पास जितने विभाग होते हैं, उनके बंगलों में उतनी ही गाडिय़ां पूरे शान-शौकत से रखी जाती है। मध्यप्रदेश सरकार वैसे भी एक लाख 80 हजार करोड़ के कर्जे में है और यह कर्जा तब तक कम नहीं होगा, जब तक हम नहीं सुधरेंगे। इसी अवधारणा के चलते समझा जाता है कि वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मुख्यमंत्री को यह प्रस्ताव भेजने का मन बनाया है कि अब मंत्री हों या नौकरशाह, उनके पास सरकारी कार केवल एक ही होना चाहिए, क्योंकि दस कारों में एक साथ तो घूमा नहीं जाता। उनके इस प्रस्ताव के बारे में एक प्रमुख सचिव स्तर के नौकरशाह का मानना है कि एक कार का प्रावधान तो ठीक है, लेकिन बीवी-बच्चों के लिए भी एक कार तो होनी ही चाहिए, जबकि दूसरे प्रमुख सचिव का कहना है हमें तत्कालीन मुख्य सचिव आरसी नरोन्हा का युग याद करना चाहिए, जब वे रात को भोपाल के सिनेमा घरों में जाकर सरकारी कारों के वाहन चालकों से कह देते थे कि तुम घर वापस चले जाओ, साहब को बीवी-बच्चों सहित आटो में आने दो। इसलिए एक साहब की कार और एक बीवी-बच्चों की, इससे ज्यादा की जरूरत नहीं …। खबरची