मुख्यमंत्री को कमजोर मत समझिए वरना पछताएंगे…

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिस अंदाज से छह महीने अपने कार्यकाल के पूरे किए हैं, वह सबको इसलिए चौंकाने वाले हैं, क्योंकि बड़े-बड़े विरोधी पार्टी के नेताओं को भ्रम था कि कमलनाथ की सरकार को वे जब चाहेंगे गिरा देंगे। और तो और कांग्रेस के ही दिग्गजों में रायशुमारी का दौर चल रहा था कि यदि कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराने की असफल कोशिशें की गईं तो उससे निपटने के लिए उन्हें क्या करना होगा। कांग्रेस विधायकों से लगातार भाजपा के एक बड़े नेता के संपर्कों की सूचनाओं से मध्यप्रदेश की राजनीति में अनावश्यक तूफान खड़ा हो गया था और इस तूफान में कांग्रेस के ही कुछ नेता चपेट में आने वाले थे, लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं नहीं चाहते कि कमलनाथ की सरकार को मध्यप्रदेश में किसी कूटनीति के तहत गिरायी जाए तो फिर आखिर बडे-बड़े कांग्रेसी नेता भी क्या करते। सबको पता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ का कद कांग्रेस पार्टी में उनके पद से काफी बड़ा है। सबको यह भी पता है कि एक युग था स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी का जब नारे लगाए जाते थे ‘इंदिरा गांधी के दो हाथ-संजय गांधी कमलनाथÓ इसका मतलब स्पष्ट था कि उस जमाने में गांधी-नेहरू परिवार का सबसे करीबी राजनेता कोई और नहीं कमलनाथ ही थे, जिन्होंने अपने 36 विधायकों के समर्थन से स्व. अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री बनवाया था। कमलनाथ का दबदबा और गांधी नेहरू परिवार में उनकी राजनीति का महत्व स्व. इंदिरा गांधी के बाद स्व. राजीव गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी तथा आज राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के जमाने में भी उतना ही कायम है। इसी का परिणाम है कि आज इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी औ प्रियंका गांधी के फोटो की श्रृंखला-कोलाज प्रदेश कांग्रेस कमेटी, मुख्यमंत्री निवास से लेेकर सभी मंत्रियों के बंगलों में प्रमुखता से विराजमान हैं, जो बकौल कमलनाथ यह साबित करता है कि अंतत: कांग्रेस की धरोहर को गांधी परिवार ने 134 वर्षों से कैसे बचाया। जहां तक सवाल है कमलनाथ जी की राजनैतिक यात्रा के वैभव का तो मुझे यह लिखने में संकोच नहीं है कि उनका वैभव किसी अजात शत्रु की तरह ही है, मतलब जिसे कोई हरा नहीं सकता। 1980 में मैंने पहली बार छिंदवाड़ा में उनकी चुनावी रणनीति को पहले लोकसभा क्षेत्र के चुनाव में ही ऑकलन करने के बाद लिखा था कि अब छिंदवाड़ा को विकास के मामले में कोई पिछड़ा हुआ जिला नहीं कहेगा। 39 वर्षों की राजनीति में कमलनाथ ने 9 बार सांसद के चुनाव जीते वह भी छिंदवाड़ा से ही, कभी हार के डर से क्षेत्र नहीं बदला जैसा कि अमूमन बड़े बड़े नेता बदल लेते हैं और अजेय बनकर मध्यप्रदेश की राजनीति में कद्दावर नेता की छवि को कभी कलंकित भी नहीं होने दी। स्मरण हो कि किस्सा कुर्सी का वह मुकदमा संजय गांधी का आज भी कोई नहीं भूलता जिसमें केवल 28 लोगों ने संजय गांधी के साथ जेल यात्रा की थी और उसमें कमलनाथ का नाम सबसे ऊपर था। यहां बता दें कि वे सभी 28 लोगों को संजय गांधी ने लोकसभा के चुनाव में उतारा जिसमें कमलनाथ उनके एकमात्र सबसे नजदीकी सिपहसलार बनकर उभरे थे। बाद में कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के सुरेश पचौरी को उस समय युवक कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनवाया जब सुरेश पचौरी के खिलाफ मध्यप्रदेश के 29 संसद सदस्य एकजुट थे। कमलनाथ की राजनीति गांधी परिवार में ऐसे लोगों में शुमार है, जो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ‘राहुलÓ कहकर पुकारते हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष की गरिमा को वे कभी सार्वजनिक रूप से कम नहीं करते और यही उनकी ऐसी संस्कृति है जिसने कांगे्रस में अंगद के पांव का रूप धारण किया है। इस संपादकीय का लब्बोलुआब यह है कि कमलनाथ को कमजोर समझने की कोशिश जो भी करेगा, चाहे वह राजनीति का संवाहक हो या उद्योगपतियों में शुमार ही न हो और इसके आगे मीडिया के कितने बड़े समूह ही क्यों न हों उन्हें पछतावा होगा। कारण स्पष्ट है 30 वर्षों की केंद्रीय राजनीति में मंत्री के रूप में उनका अनुभव जो आज मध्यप्रदेश के सचिवालय में जहां से सरकार चलती है, अब नई संस्कृति का स्वरूप ले चुका है। हमने तो अपने 45 वर्षों के पत्रकारिता की यात्रा में ऐसा कोई मुख्यमंत्री नहीं देखा जो सुबह-सुबह 10 बजे शासकीय कर्मचारियों की तरह सचिवालय आ जाए और जनता के सेवक की तरह 11 बजे रात तक सचिवालय में बैठकर पूरे प्रदेश भर की समस्याओं से अपने आपको सतर्क रखे। मुख्यमंत्री के रूप में 6 महीने का समय सिंहावलोकन के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि इस बीच में 3 महीने तो चुनाव की आदर्श आचार संहिता ने उन्हें घेरा फिर भी वे काम करते करते क्यों नहीं थके चांैकाने वाला वाक्या है। इसलिए जिस मुख्यमंत्री को किसी का डर न हो उसे डराकर अब मध्यप्रदेश में जो भी राजनीति करेगा, वह औंधे मुंह ही गिरेगा क्योंकि मध्यप्रदेश की जनता को गुड गवर्नेंस, डिलेवरी सिस्टम, युवाओं के भविष्य की सुरक्षा बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य के साथ-साथ बड़े उद्योगों की दस्तक का आगाज हो गया है।
विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।