आदिवासियों के हक छीने तो हम सरकार को छोड़ेंगे नहीं: शिवराज

आदिवासियों के हक छीने तो हम सरकार को छोड़ेंगे नहीं: शिवराज
बारेला समाज के आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में धरना-प्रदर्शन

भोपाल, 18 जून। गरीब आदिवासियों का जल-जंगल और जमीन पर बराबर का हक है, लेकिन कमलनाथ सरकार आदिवासियों से इनका हक छीन रही है। वर्षों से जिस जमीन पर गरीब आदिवासी रह रहा है और खेती कर रहा है, उस जमीन से प्रदेश सरकार उसे दखल कर रही है। अगर आदिवासी का हक किसी भी सरकार ने छीनने की कोशिश की तो सरकार को हम छोड़ेंगे नहीं। आदिवासी गरीब की जमीन को हाथ भी लगाया तो इसके अंजाम बुरे होंगे। यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टी.टी. नगर में चल रहे आदिवासियों के धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही। धरने के पश्चात शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आदिवासियों की सभी मांगें स्वीकार कर लीं। आदिवासियों ने अपनी मांग पूरी होने पर शिवराज सिंह चौहान को कंधे पर बैठाकर न्यू मार्केट में जुलूस निकाला।
मंगलवार को सीहोर जिले के बारेला समाज के आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में विभिन्न मांगों को लेकर टी.टी. नगर में आदिवासियों ने धरना-प्रदर्शन किया। धरने में पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की लड़ाई में भोपाल की जनता भारतीय जनता पार्टी और हम सब सड़कों पर लड़ाई लडऩे के लिए तैयार हैं। अगर आदिवासियों की जायज मांगें नहीं मांगी गई तो यह आंदोलन और मुखर होगा।
वन विभाग के रेंजर बन गए डेंजर: चौहान ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर हर गरीब और आदिवासी का हक है, जिन जमीन के टुकड़ों पर आदिवासी वर्षों से खेती कर रहे थे, उन्हें भाजपा सरकार ने मालिकाना हक देने का काम किया। लेकिन वक्त बदलते ही अब आदिवासियों पर प्रदेश सरकार अत्याचार कर रही है। आदिवासियों की उन जमीनों पर फॉरेस्ट विभाग पहुंचकर डराने-धमकाने का काम कर रहा है। वन विभाग के जिन अधिकारियों की आवाज नहीं निकलती थी। अब कमलनाथ सरकार में वह रेंजर भी डेंजर बन गए हैं। वनवासियों को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्हें हटाने और मिटाने की धौंस दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी भाइयों आप चिंता न करें, जब तक मामा जिन्दा है, अन्याय नहीं होने देगा।
दम है तो गरीब आदिवासियों के बजाए बड़े माफियाओं को पकड़ें: शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासियों पर की गयी भेदभावपूर्ण कार्यवाही का विरोध करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार में शासन और प्रशासन दमनकारी नीतियों पर काम कर रहा है। आबकारी विभाग वाले महुआ के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों पर झूठे मुकदमें दर्ज कर रहे हैं। मेहनत, मजदूरी करने वाले गरीब आदिवासियों के ट्रैक्टर ट्राली राजसात कर उन्हें जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार में दम है तो गरीब आदिवासियों पर कार्यवाही करने के बजाए बड़े-बड़े माफियाओं को पकड़कर बताएं। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार उन माफियाओं और दलालों को जो वल्लभ भवन के गलियारों में लूट रहे हैं, जो नोट के बोरे भर रहे हैं, उन्हें जेल नहीं भेजेगी। उन पर कार्यवाही नहीं करेगी। यह सरकार तो सिर्फ गरीब आदिवासियों को प्रताडि़त करेगी। चौहान ने कहा कि सुनो कमलनाथ, तुमको और सरकार को गरीब आदिवासियों की हाय तबाह और बर्बाद कर देगी।
वल्लभ भवन बना दलालों का अड्डा: उन्होंने कहा कि वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया है। कर्मचारी, अधिकारी पैसे लेकर पोस्ट किए जा रहे हैं और यह अधिकारी जब पैसा देकर जाते हैं तो गरीबों पर अत्याचार करते हैं। उनसे पैसा लूटने की कोशिश करते है। पुलिस बर्बरतापूर्वक कार्यवाही कर रही है। उन्होंने कहा कि मेरे पास ऐसे अन्याय सहन करने वाले कई मामले संज्ञान में आए हैं। चौहान ने आंदोलन में शामिल होने आए आदिवासियों को भदभदा के समीप रोके जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है। आदिवासियों ने अपनी मांगें रखने के लिए आंदोलन की अनुमति ली, लेकिन धरना स्थल से कई किमी दूर ही पुलिस अफसरों ने रोक लिया। तमाम भूखे, प्यासे, महिलाएं और बच्चे पैदल धरना स्थल पर पहुंचे हैं। यह कहां की मानवीयता है कि ऐसी विद्वेषपूर्ण कार्यवाही की जाए। उन्होंने कमलनाथ सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इन आदिवासियों की लड़ाई मैं लडूंगा, पीछे नहीं हटूंगा। चाहे प्राण भी क्यों न चले जाएं।
सरकार के समक्ष रखी यह मांगें: चौहान ने कहा कि हमने सरकार में रहते गरीब आदिवासियों को उनका हक देने का काम किया है। लेकिन सरकार के बदलते ही आदिवासियों को मिलने वाली सुविधाएं बंद हो चुकी हैं। आदिवासी दर-दर भटक रहा है और इसी का परिणाम है कि मजबूर होकर उसे धरना-प्रदर्शन कर अपना हक मांगने के लिए विवश होना पड़ रहा है। उन्होंने आदिवासियों की मांग दोहराते हुए कहा कि आदिवासियों पर वन विभाग एवं आबकारी विभाग द्वारा दर्ज फर्जी एवं झूठे मुकदमें वापस लिए जाएं। वनअधिकारी पट्टे पर इस वर्ष अब तक गेहूं और चने की तुलाई नहीं की गयी है, सरकार गेहूं, चने की तत्काल खरीदी प्रारंभ करे। वन अधिकार पट्टे पर मक्के का बोनस अब तक नहीं दिया है। सरकार जल्द बोनस देने का काम शुरू करे। कपिल धारा योजना के अंतर्गत कुंआ खोदने की अनुमति दे। आदिवासी समाज के स्थाई जाति प्रमाण पत्र हेतु पूरे परिवार का 60 साल का रिकार्ड मांगा जा रहा है, जिससे बेटे बेटियां परेशान हो रहे है। उन्हें स्थाई प्रमाण पत्र देने की कार्यवाही जल्दी की जाए। आदिवासी समाज की पंचायतों का पुन: सीमांकन किया जाए। तेन्दूपत्ता की बोनस राशि दी जाए।
भदभदा से धरना स्थल पर ट्रैक्टर से पहुंचे शिवराज: आदिवासियों द्वारा धरना-प्रदर्शन के लिए टीटी नगर में स्वीकृति ली गयी थी लेकिन आंदोलन से घबराए प्रशासन ने धरना स्थल से 8 कि.मी. दूर भदभदा के पास ही धरने में शामिल होने आए आदिवासियों के ट्रैक्टरों को रोक लिया गया। जिस पर शिवराज सिंह चौहान भड़क गए और प्रशासन की कार्यवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए वे तत्काल भदभदा पहुंचे और आदिवासियों के साथ ट्रैक्टर में बैठकर धरना स्थल पर पहुंचे।
घबराई सरकार ने मांगें मानी, आदिवासियों ने निकाला जुलूस: धरना-प्रदर्शन के पश्चात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में क्षेत्रीय सांसद रमाकांत भार्गव, विधायक करणसिंह वर्मा के साथ 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। जिस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सभी मांगें तत्काल मान ली गयीं। मुख्यमंत्री से मिलने के पश्चात शिवराज सिंह चौहान आदिवासियों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और उन्हें सरकार द्वारा मानी गयी सभी मांगों से अवगत कराया। आदिवासियों ने अपनी मांगे पूरी होने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार मानते हुए उन्हें कंधे पर बैठाकर न्यू मार्केट में विजय जुलूस निकालकर प्रसन्नता व्यक्त की।
ये थे मौजूद: धरना-प्रदर्शन में प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा, प्रदेश मंत्री रघुनाथ सिंह भाटी, महापौर आलोक शर्मा, विधायक सुदेश राय, प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर, जिलाध्यक्ष विकास विरानी, रामपाल सिंह, गुरूप्रसाद शर्मा, लक्ष्मण सिंह बारेला, कनक सिंह पटेल, कैलाश बारेला, श्रीमती निर्मला बारेला, भूरा सिंह बारेला, डीपी सिंह धुर्वे एवं पर्वत सिंह सहित बड़ी संख्या में बारेला आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे।