15 साल में नहीं की आदिवासियों की चिंता

Tशिवराज के आदिवासी प्रेम पर पीसी शर्मा का वार


भोपाल, 18 जून। मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने पिछले 15 सालों में कभी भी आदिवासियों की चिंता नहीं की। उन्होंने कहा कि अब झाबुआ में उपचुनाव होने हैं तो वे आदिवासियों की बात कर रहे हैं। पीसी शर्मा मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया से चर्चा कर रहे थे। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान कमलनाथ सरकार के खिलाफ घेराबंदी कर रहे थे। आदिवासियों को शहर से बाहर रोकने पर शिवराज सिंह चौहान अधिकारियों पर जमकर बरसे और आदिवासियों को लेने खुद भदभदा पहुंच गए। वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ के बुलावे पर शिवराज उनसे मिले और आदिवासियों की मांग रखी। जिस पर सरकार से सभी मांगें पूरी होने का आश्वासन दिया है। शिवराज के आरोप पर जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि 15 सालों से शिवराज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र के आदिवासियों को पट्टे नहीं दिलवा पाए, तब शिवराज को फिक्र नहीं हुई और अब आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को तो सरकार के खिलाफ आरोप लगाने का भी अधिकार नहीं है। यदि उन्हें आदिवासियों की इतनी चिंता होती तो वह 15 साल के अपने कार्यकाल में आदिवासियों का भला कर देते। शिवराज सरकार ने प्रदेश के 6.50 लाख पट्टाधारी आदिवासियों में से साढ़े तीन लाख आदिवासियों के पट्टा रद्द कर दिए और अब उनके अधिकारों की बात करते हैं।
मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि आदिवासियों के लिए जमीनी स्तर पर शिवराज ने कुछ भी नहीं किया, आदिवासी क्षेत्रों में 50000 शिक्षकों के पद नहीं भरे गए तब शिवराज सरकार को उनकी चिंता नहीं थी। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की 2018 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अलीराजपुर जिला था, जहां 76.5 प्रतिशत आदिवासी रहते थे। जबकि रिपोर्ट ने बताया कि इतने ही प्रतिशत आदिवासी गरीब थे। उन्होंने अफ्रीका में जैसी स्थिति आदिवासियों की है, वैसे ही स्थिति मध्य प्रदेश के आदिवासियों की है। पिछले 5 सालों में आदिवासियों के लिए शिवराज सरकार ने कुछ नहीं किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि कमलनाथ सरकार आने के बाद तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली राशि को 2000 से बढ़ाकर 2500 कर दिया पहले बैंक खाते में जाती थी कमलनाथ सरकार ने 80 प्रतिशत नगद देने की घोषणा की। शिवराज के मुख्यमंत्री रहते हुए झाबुआ का लॉ कॉलेज बंद हो गया, शिवराज चाहते थे आदिवासी ज्यादा ना पढ़ जाएं और वकालत ना कर पाएं, इसलिए उन्होंने कॉलेज बंद करवा दिया। पीसी शर्मा ने बताया कि कमलनाथ ने कहा है अगर आदिवासी क्षेत्र में किसी को पट्टा नहीं मिला है अगर वहां पर सरपंच लिखकर देगा तो उसको पट्टा मिल जाएगा, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ विकास पुरुष के रूप में जाने जाएंगे। पीसी शर्मा ने शिवराज पर आरोप लगाया कि झाबुआ में चुनाव है, इसलिए बीजेपी को आदिवासियों की याद आ रही है, बीजेपी यह मुद्दा उठा रही है जो बीजेपी पिछले 15 साल में नहीं कर सकी, बीजेपी सरकार अब मगरमच्छ के आंसू बहा रही है छिंदवाड़ा क्षेत्र के आदिवासियों से भरा हुआ है। कमलनाथ जी इतना काम आदिवासियों के लिए कर रहे हैं, उतना किसी ने नहीं किया। कमलनाथ सरकार 350000 आदिवासियों को हक उन्हें जमीन के पट्टे भी देगी साथ ही अपने कहा कि शिवराज को भोपाल में जुलूस निकालने की बजाय दिल्ली जाकर आदिवासियों की आवाज उठाना चाहिए।