किसानों के मामले में दोहरा रवैया अपना रही केंद्र सरकार: सचिन


जय किसान फसल ऋण मुक्ति योजना भूमि पुत्रों के जीवन में बनी मील का पत्थर
विशेष बातचीत
सुनील दत्त तिवारी /हृदेश धारवार

भोपाल, 18 जून। किसान हितों की बात करने वाली केंद्र की मोदी सरकार और 15 वर्षों तक किसान पुत्र होने का दंभ भरने वाले और किसानों को बरगलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान किसानों के हितैषी नहीं, उनका शोषण करने वाले हैं। 2008 में अन्नदाता को 50 हजार रूपए के ऋण माफी का झूठा आश्वासन देकर सत्ता में आई तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2018 तक किसानों की सुध नहीं ली। वहीं 2014 में किसानों की आय दोगुना करने का दिवास्वपन दिखाकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 70 प्रतिशत आबादी के साथ हमेशा छलावा किया है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार का आश्वासन दिया था कि समर्थन मूल्य पर खरीदी गए गेहूं का उठाव एफसीआई करेगी। प्रदेश में 75 लाख टन गेहंू समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीद लिए गए हैं। अब केंद्र सरकार अपने वचन से पलट रही है। जिसकी वजह से 15 सौ करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार मध्यप्रदेश के वित्तीय ढांचे पर आने वाला है। लेकिन हम अपने अन्नदाताओं को निराश नहीं करेंगे और उनकी उपज का पाई-पाई किसानों का दिया जाएगा। यह कमलनाथ सरकार का वादा है।
1956 के बाद जब मध्यप्रदेश राज्य का गठन हुआ, वर्तमान में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में बनी कांग्रेस की सरकार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की मंशा को पूरा करते हुए शपथ लेने के 2 घंटे बाद ही प्रदेश के 48 लाख किसानों के 2 लाख तक के फसल ऋण माफी के आदेश जारी कर दिए। यह घटना आजाद हिन्दुस्तान के तारीखी कैलेंडर में स्वर्ण अक्षरों में लिखी गई, वो इबारत है जिसने अन्नदाता की भूख, गरीबी, लाचारी और बदहाली के वर्षों से चले आ रहे अभिशाप को तात्कालिक तौर पर ही सही, दूर करने का ऐसा कदम उठाया है जिससे आने वाले वर्षों में किसान समृद्ध और प्रदेश खुशहाल होगा। यह कमलनाथ सरकार की वह दूरदर्शी नीति है, जिसे यह पता है कि कर्ज माफी से अन्नदाता का जीवन स्तर नहीं सुधरेगा, उन्हें फसल का बेहतर दाम मिले, इसके लिए बाजार तैयार करना जरूरी है और प्रदेश सरकार निरंतर इस दिशा में आगे बढ़ रही है। यह कहना है कि प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री सचिन सुभाष यादव का, जिन्होंने आज राष्ट्रीय हिन्दी मेल से एक विस्तृत चर्चा में मध्यप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में खुलकर बात की।
सचिन यादव का कहना था कि कांग्रेस सरकार को खस्ताहाल बजट का प्रदेश मिला, यही वजह है कि जब हम कहते थे कि किसानों के फसल ऋण मुक्ति को लागू करेंगे तो वर्तमान विपक्ष और खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री उपहास उड़ाते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि जिस हालात में वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था छोड़कर गए हैं उसमें फसल ऋण मुक्ति तो क्या एक हजार साइकिल भी नहीं खरीदी जा सकती थी। लेकिन ये मुख्यमंत्री कमलनाथ का अनुभव और उनकी प्रशासनिक दक्षता है कि उन्होंने प्रदेश की कमान संभालते ही फसल ऋण माफी योजना पर विशेष फोकस किया और यही वजह है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के पहले लगभग 20 लाख किसानों का ऋण मुक्ति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इस छटपटाहट में शिवराज एंड कंपनी अनर्गल प्रलाप करने लगी, जबकि हकीकत से वे खुद वाकिफ हैं। सचिन यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट मानना है कि कर्ज माफी की योजना दीर्घकालिक नहीं हो सकती। यह केवल किसानों को तात्कालिक लाभ और जीवन यापन को बेहतर करने का एक टूल मात्र है। मध्यप्रदेश में किसानों का सम्मान तभी बढ़ेगा, जब उनकी उपज का वास्तविक मूल्य उन्हें मिले और उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराया जाए। कृषि विभाग मुख्यमंत्री की इस मंशा पर लगातार काम कर रहा है और आने वाले दिनों में किसानों को फसल का प्रतिस्पर्धी दाम मिले, इसके लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। सचिन यादव ने कहा कि यह सही है हमारी लड़ाई एक बहुत बड़े प्रोपोगंडा वाली विचारधारा से है जिनकी बुनियाद ही झूठ पर टिकी हुई है। सत्ता पाने के लिए इस विचारधारा के लोग किसी भी स्तर पर गिर जाते हैं। अब ऐसी स्थिति में प्रदेश में किसान, मजदूर, गरीब, महिला, दलित, वंचित के लिए किए जाने वाले सरकार के कामों का अंतिम लाभ न केवल उन्हें मिले, बल्कि उन्हें महसूस भी है। इस दिशा मेें कमलनाथ सरकार एक ठोस खाका तैयार कर रही है। मध्यप्रदेश के किसान बहुफसलीय और नगद फसल की तरफ भी अग्रसर हों, इसके लिए कृषि विभाग आगामी दिनों में एक बड़ा अभियान चलाने जा रहा है। जिसमें क्षेत्रीयता के हिसाब से फसलों निर्धारण और उनके लिए मार्केट उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। साथ ही उपज के हिसाब के फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी लगवाए जाएंगे। इसके दो लाभ होंगे एक तो प्राकृतिक आपदा में यदि कोई फसल बर्बाद होती है तो नगद फसल का विकल्प खुला रहेगा। प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वचन पत्र के अनुसार अलग से कृषि बजट की भी तैयारी कर रही है। किसानों का राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर किसान कल्याण की दिशा में क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इसके लिए प्रतिवेदन मांगा है। मानसून देरी से आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जल की सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है, बारिश के पानी का संरक्षण किया जा सके। इसके लिए भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा किसानों को 6 हजार रूपए सालाना देने के फैसले पर कहा कि सरकार ने ऐसे किसानों की सूची हमसे मांगी है, जिसमें परिवार में सदस्यों की संख्या 5 हो, ऐसे किसान परिवारों का डाटा हमारे पास तैयार नहीं है, हम ऐसे किसानों की सूची तैयार कर रहे हैं। जैसे ही किसानों की सूची तैयार हो जाएगी, हम केंद्र सरकार को भेज देंगे।