डीजीपी, ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को फ्री हैंड


कानून व्यवस्था-आर्थिक अपराध के ऊपर मुख्यमंत्री कमलनाथ का ‘स्ट्रेटिजिकल स्ट्राइकÓ
विशेष रिपोर्ट
ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से लगातार कानून-व्यवस्था बिगड़ी हुई है। कमलनाथ सरकार के 6 माह के कार्यकाल में अपराधों के ग्राफ के साथ-साथ आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में भी इजाफा हुआ है और विपक्षी पार्टी ने सरकार को कई बार घेरने का प्रयास किया है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने प्रदेश में गुंडाराज की शुरुआत कहकर सरकार पर निशाना साधा था। हाल ही में मृतक शिवम मिश्रा के कांड ने बैठे बिठाये भाजपा को मौका दे दिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतक शिवम मिश्रा के माता-पिता को न्याय दिलाने व सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक दिवसीय धरने पर बैठ गए। इन सभी आरोपों तथा परेशानियों से बचने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 6 महीने बाद ‘स्ट्रेटिजिकल स्ट्राइकÓ की है और तीनों ही प्रमुख पुलिस अधिकारियों को फ्री हैंड दे दिया है, ताकि वे पुलिसिया भाषा में अपराधियों को समझा सकें। मुख्यमंत्री कमलनाथ बेहतर कानून-व्यवस्था और एक साफ-सुथरा मध्यप्रदेश चाहते हैं। उन्होंने अपने इस मंसूबे में सफल होने के लिए पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह, विशेष पुलिस महानिदेशक ईओडब्ल्यू केएन तिवारी तथा विशेष पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त संगठन अनिल कुमार पर विश्वास करते हुए फ्री हैंड दे दिया है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश के सभी 53 जिलों में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस महानिदेशक को विशेष दिशा-निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने डीजीपी विजय कुमार सिंह को महिला अपराध और दुष्कर्म की घटनाओं पर अंकुश लगाने की बात कही है तो वहीं निगरानीशुदा बदमाशों और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को पुलिसिया भाषा में समझाने के लिए फ्री हैंड दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों को भी नैतिकता का पाठ पढ़ाने और संवेदनशीलता बढ़ाने की बात कही है, क्योंकि पिछले 6 माह में कई बार खाकी पर उंगली उठी है। इसी तरह उन्होंने विशेष पुलिस महानिदेशक ईओडब्ल्यू केएन तिवारी को भी पुराने सभी घोटालों की जांच में तेजी लाने के साथ-साथ उसे अंतिम रूप तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पेशल डीजी ईओडब्ल्यू से साफ कहा है कि ई-टेंडरिंग घोटाला, पर्यटन घोटाला, जलसंसाधन विभाग की नहरों में हुए घोटाले के अलावा अन्य घोटालों की जांच करके दोषियों पर एफआईआर की जाए। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री से मिले निर्देशों के बाद ईओडब्ल्यू ने अलग-अलग टीमों का गठन कर पुराने सभी मामलों में जांच तेज कर दी है। इसी तरह विशेष पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त संगठन अनिल कुमार को हर कार्रवाई को अंतिम रूप तक लेकर जाने की हिदायत दी है।
मुख्यमंत्री के सामने इस 6 माह के कार्यकाल में करीब 25 से अधिक मामले रिश्वत मांगने और आय से अधिक संपत्ति के उजागर हो चुके हैं। जिसे स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया है और लोकायुक्त संगठन के स्पेशल डीजी को रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर पूरी तत्परता के साथ कार्रवाई करने की बात कही है। इसके साथ ही अभी तक पुराने जिन मामलों में चालान पेश नहीं किया गया है, उसकी जांच पूरी करके चालान पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। जानकारी के अनुसार स्पेशल डीजी लोकायुक्त अनिल कुमार ने अभी तक के कार्यकाल में शायद में किसी मामले में कोताही बरती होगी, नहीं तो लगभग सभी मामलों में स्वयं ने रूचि लेकर कार्रवाई की है। इस पूरी खबर का लब्बेलुआब यह है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह, स्पेशल डीजी ईओडब्ल्यू केएन तिवारी और स्पेशल डीजी लोकायुक्त अनिल कुमार को फ्री हैंड दे दिया है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था बेहतर हो, आम जनता का पुलिस पर विश्वास बना रहे और आर्थिक अपराध के मामलों की कार्रवाई में विलंब न हो।