कमलनाथ की उंगली के ऑपरेशन को राजनीति से दूर रखा जाए

सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ अब कोई उंगली नहीं उठाएगा, सरकारी अस्पतालों पर विश्वास लौटेगा इसलिए मुख्यमंत्री ने आपरेशन के लिए चुना हमीदिया अस्पताल…

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश का गरीब आदमी सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं करता, वह निजी अस्पतालों की तरफ दौड़ लगाता है और दौड़ लगाते-लगाते लुट भी जाता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस बात का अहसास उसी दिन हो गया था, जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। समझा जाता है कि मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में आम आदमी की समस्याओं से अपने आपको जोड़कर देखने का सिलसिला भी पिछले छह महीनों में कुछ इस तरह किया कि वचन पत्र में किए गए वायदे भी पूरे हों और प्रदेश के गरीब आदमी को सरकारी तंत्र पर भरोसा होने लगे। जब तक आम आदमी और प्रदेश का गरीब आदमी सरकारी संस्थानों के और सरकार की हितकारी नीतियों का लाभ नहीं उठाएगा तब तक सरकार चाहे कितने भी दावे करें, सब लोक लुभावन भाषणों में सिमट कर रह जाते हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को किसी चीज की कमी नहीं थी, वे चाहते तो अपने हाथ की उंगली का आपरेशन दिल्ली जाकर किसी पांच सितारा अस्पताल में भी करा लेते। लेकिन उनके मन में बार-बार यह सवाल उठ रहा था कि आखिर मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी अस्पतालों के बारे में गरीब आदमी विश्वास क्यों खो बैठा है। उन्होंने तय कर लिया था कि मध्यप्रदेश के आम आदमी और गरीब आदमी का भरोसा सरकारी अस्पतालों की तरफ लौटाना ही होगा। उन्हें मौका मिला आज जब उनके हाथ की एक उंगली छोटी-सी सर्जरी की दरकार के कारण उन्हें परेशान कर रही थी। उन्होंने तय किया कि कुछ भी हो जाए, लोग कुछ भी कहें अब वे सरकारी अस्पताल हमीदिया में ही जाकर इसका इलाज कराएंगे। राजनीति करने वाले मठाधीशों को भले ही कमलनाथ की उंगली की सर्जरी सरकारी अस्पताल में एक राजनीति लगती हो, लेकिन सच मानें तो यह उनकी राजनीति का हिस्सा नहीं बल्कि एक गरीब आदमी को यह संदेश देने का मामला था कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के रहते यह समझ लें कि सरकारी अस्पताल में जितना महत्व मुख्यमंत्री का है, उतना ही महत्व एक आम आदमी का रहेगा। हालांकि दिन भर रहने के बाद मुख्यमंत्री वापस अपने बंगले लौट आए हैं, लेकिन उंगली के आपरेशन की राजनीति का दौर थमा नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करके कहा कि आप जैसी सुविधाएं सभी सामान्य मरीजों को भी मिलें। हम कहना चाहते हैं कि यही बात तो कमलनाथ ने भी इस घटनाक्रम में साबित किया है कि सरकारी अस्पतालों में अब कोई वीआईपी नहीं होगा और हर मरीज वीआईपी होगा। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी डाक्टरों के प्रति जो अविश्वास का वातावरण लगातार मध्यप्रदेश में बीमारी प्रदूषण का कारण बनता जा रहा था, उसके भी बादल आज मुख्यमंत्री ने अपनी संवेदनशीलता को उजागर करके छांट दिया है। वैसे मुख्यमंत्री का सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराना कोई असाधारण-सी घटना नहीं है लेकिन मंत्रियों को और नौकरशाहों को भी इस बात की चिंता करनी पड़ेगी कि वे सरकारी अस्पतालों और सरकारी डॉक्टरों पर विश्वास करना सीखें, इसलिए उनके भी कदम मुख्यमंत्री कमलनाथ की तरह बढ़ाए जाएंगे, तभी इस छोटी-सी घटना का बड़ा असर होगा। बशर्ते मुख्यमंत्री के हाथ की उंगली का सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन की घटना को राजनीति से दूर रखा जाए।


विशेष संपादकीय के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।