विधायक हो या ‘अलम्बरदारÓ गुंडागर्दी तो नहीं चलेगी…

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया की औकात पूछने वालों को मीडिया की कीमत बताई और सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को बंगाल नहीं बनने देंगे, यहां पर

विशेष संपादकीय
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर में कल आम आदमी की जिंदगी में पहली बार इस बात को लेकर खलबली मची कि जिन्हें उन्होंने विधायक चुनकर भेजा उसके हाथ में बल्ले और विधायक के साथियों के चेहरे पर गुंडों जैसा तमतमाता, बदले की आग में झुलसती हुई राजनीति का वह आलम देखा, जो कभी इंदौर की संस्कृति नहीं थी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विधायक पुत्र के नगर निगम प्रशासन के खिलाफ गुंडई अंदाज में जो प्रदर्शन किया गया, उसका संरक्षण करके पुत्रमोह में उन्होंने अपराध भले ही न किया हो लेकिन जो कुछ किया गया है, उनके पुत्र के द्वारा वह एक अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा, ऐसा उन्होंने सोच कैसे लिया। कैलाश विजयवर्गीय स्वयं मुख्यमंत्री होते और विरोधी दल का कोई विधायक प्रशासन के साथ डॉन की तरह पेश आता जैसा कि उनके पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने आज इंदौर में तांडव मचाया, तब क्या कैलाश विजयवर्गीय मीडिया से ऐसा ही व्यवहार करते, जैसा आज उन्होंने किया और मीडिया से उसकी हैसियत पूछी। शर्म की बात तो यह है कि जिस मीडिया ने देश में मोदी लहर का परचम लहराकर नरेंद्र मोदी को दूसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनाया, उस प्रधानमंत्री से कैलाश विजयवर्गीय को पूछना चाहिए कि मोदी जी आप मीडिया को इतना महत्व क्यों देते हैं, यदि मीडिया की कोई औकात ही नहीं है? कैलाश जी आपके इस सवाल का उत्तर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना हो तो वे इन शब्दों में देंगे, कि देश की मीडिया उनके लिए भारत के 129 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला एक मात्र ऐसा वर्ग है, जिसने घर-घर मोदी को पहुंचाया है। आपको सोचना होगा क्या आप देश के प्रधानमंत्री से भी इतने ऊपर हो गए हैं कि अपने विधायक पुत्र की गलतियों के लिए खेद व्यक्त करने की बजाय मीडिया की औकात पूछने लगे। मैं समझता हूं कि यदि आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सच्चे सिपाही हैं और उनकी जरा भी इज्जत करते हैं तो अपने बयान पर खेद व्यक्त करिए, वरना देश की मीडिया शायद आपको कभी माफ नहीं करेगी। रहा सवाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा आज सख्त अंदाज में कानूनी कार्यवाही के प्रदर्शन का तो मैं समझता हूं पहली बार मध्यप्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करते हुए उसे जेल भेजने की हिम्मत दिखाई है। मीडिया की औकात यदि कैलाश विजयवर्गीय ने नहीं पूछी होती और इलेक्ट्रानिक मीडिया के उस न्यूज एंकर से दुव्र्यवहार नहीं किया होता जिसकी केवल इतनी ही गलती थी कि उसने पूछा क्या आप मध्यप्रदेश को पश्चिम बंगाल की तर्ज पर आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं तो सवाल गलत नहीं था। आप चाहते तो सहजता से उत्तर देते बात इतनी नहीं बिगड़ती लेकिन अपने अंदाज से आपने इंदौर की मीडिया को अंडर इस्टीमेट किया हो तो यह गलतफहमी है पूरी मध्यप्रदेश की मीडिया ने इसे बड़ी गंभीरता से लिया है और जब तक आप खेद व्यक्त नहीं करते तो हमारी-आपकी दोस्ती में डली आज यह खटाई के कड़वाहट में बदल जाने का खतरा है, इस बात को आपको समझना होगा। जहां तक सवाल है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का तो उनकी सरकार का एक्शन आकाश विजयवर्गीय को जेल भेजने का मतलब स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश को पश्चिम बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा। आदमी कितना भी बड़ा हो, विधायक हो या अलम्बरदार, गुंडागर्दी तो चलने नहीं दी जाएगी। ऐसा संदेश यदि कमलनाथ का प्रदेश की जनता को है तो फिर मध्यप्रदेश में सुरक्षित रहने के लिए बंगाल के सताए हुए लोग भी यहां आ जाएं तो आश्चर्य मत कीजिएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को आज के कड़े फैसले के लिए शाबासी देने से हम अपने आपको नहीं रोक पा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा भी करेंगे कि मंत्रिमंडल के उनके अपने भी साथी और कुछ मंत्रियों के समर्थक सत्ता में मदमस्त होकर हदें पार करने की कोशिश कर रहे हैं, उसमें भी रोक लगनी चाहिए। घोटाला पिछली सरकार का है, खूब जांच कराएं लेकिन मध्यप्रदेश में गुड गवर्नेंस, डिलेवरी सिस्टम, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और अंत में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का विश्व के नक्शे में व्यापमं को लेकर कलंक जो चंद्रमा में दाग की तरह है, उसे भी मिटाने के लिए ठीक वैसा ही निर्णय लेना पड़ेगा जैसा कि आज विधायक आकाश विजयवर्गीय को जेल भेजकर सरकार ने एक इतिहास रचा है।