किसान संघ कुछ भी कर ले, कमलनाथ सरकार को जय किसान फसल ऋण माफी योजना में बदनाम नहीं कर सकता, क्योंकि….


विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती, प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव अजीत केसरी तथा मंडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक फैज अहमद किदवई ने जय किसान फसल ऋण माफी योजना का फार्मूला कुछ इस तरह से तैयार किया है कि किसानों के कर्ज माफी को लेकर भाजपा पोषित किसान संघ कितना भी हल्ला मचाए, सरकार को बदनाम कर ही नहीं सकता। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की विधानसभा चुनाव के पहले हुई घोषणा पर अमल और वचन पत्र के बिन्दुओं को लागू करने के लिए कमलनाथ सरकार पूरी ईमानदारी से काम कर रही है, जिसमें उपरोक्त चार बड़े नौकरशाहों की अहम भूमिका है। मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती ने तो पद संभालते ही प्रतिदिन फसल ऋण माफी योजना की समीक्षा और फीडबैक पल-पल की रिपोर्ट बकायदा मुख्यमंत्री को पहुंचाने का काम किया है, इसलिए फसल ऋण माफी योजना को लेकर ऊल-जुलूल आरोप लगाने की गुंजाइश भी नहीं है। मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती ने तो डॉ. राजेश राजौरा को प्रदेश के प्रत्येक जिले में ब्लाक स्तर तक किसानों को यह खबर पहुंचाने का जिम्मा सौंपा है कि कमलनाथ सरकार फसल ऋण माफी योजना को लेकर किसी भी कोताही को बर्दाश्त नहीं करेगी, इसलिए किसानों की ऋण माफी जिस चरणबद्ध योजना के अंतर्गत होना है, वह हर हाल में पूरा किया जाएगा। वर्तमान में कृषि एवं कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि को बताया कि 22 लाख उन किसानों का कर्जा माफ किया जा चुका है, जो एक लाख की सीमा के भीतर आते थे। उन्होंने कहा कि अब दूसरे चरण में एक लाख से ऊपर के कर्जे वाले किसान जिनकी संख्या लगभग साढ़े चार लाख है, उनके कर्ज को माफ करने का फार्मूला तैयार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि तीसरे चरण में दो लाख तक के कर्जदार किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा, जिसमें लगभग साढ़े तीन लाख किसान शामिल होंगे। जब उनसे पूछा गया कि ऐसे बड़े किसान जिनके चार-पांच अलग-अलग खातों में दो-दो लाख से भी ऊपर के कर्जे हैं, उनके विषय में सरकार का क्या रवैया है। उन्होंने कहा कि हम उनका भी डाटा बेस तैयार कर रहे हैं और कोई ऐसा फार्मूला निकाला जाएगा, जिससे उनको लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दो लाख से ऊपर तक के अलग-अलग खातों वाले किसानों को लेकर हल्ला मचाया जा रहा है, जो राजनीति से भी प्रेरित है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल ने किसान संघ के आरोपों की अलग-अलग कृषि उपज मंडियों से रिपोर्ट प्राप्त करने की कोशिश की, जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि राज्य सरकार की नीयत दो लाख तक के कर्जदार किसानों का कर्जा माफ करने के संबंध में स्पष्ट है, लेकिन वे बड़े किसान जो किसान संघ से प्रेरित हैं और उनके भड़कावे में आकर सरकार के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, उसका कोई असर उन 22 लाख किसानों पर बिल्कुल नहीं, जिनके खातों में पैसा जा चुका है। इसलिए इस रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि किसान संघ कितना भी हल्ला मचाए, जय किसान फसल ऋण माफी योजना के मामले में कमलनाथ सरकार को कटघरे में खड़ा नहीं कर सकता।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।