धान, दलहनों और मोटे अनाजों की कीमत बढ़ी


धान 65 रुपए, दलहन 75 से 100, मोटे अनाजों में 120 से 253 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि
नयी दिल्ली, 3 जुलाई (वार्ता)।
सरकार ने खरीफ धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 65 रुपए प्रति क्ंिवटल, दलहनों की कीमतों में 75 से 100 रुपए तथा मोटे अनाजों में 120 रुपये से 253 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की आज यहां हुयी बैठक में खरीफ फसलों का एमएसपी बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने यहां संवाददाता सम्मेलन बताया कि धान की कीमत में 65 रुपये प्रति क्विंटल, अरहर की 125 रुपये, मूंग की 75 रुपये और उड़द की 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। मूंगफली की कीमत 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का निर्णय किया गया है। सरकार ने ज्वार की कीमत में 120 रुपये और रागी की कीमत में 253 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने का निर्णय किया है। कपास की कीमत में 100 से 105 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गयी है।
वेतन संहिता विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने न्यूनतम वेतन में एकरूपता लाने तथा समय वेतन भुगतान सुनिश्चित करने वाले वेतन संहिता विधेयक, 2019 को बुधवार को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विधेयक के प्रारूप को मंजूरी देते हुए इसे संसद में पेश करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। यह विधेयक 10 अगस्त 2017 को पिछली लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे संसद की स्थायी समिति के पास विचारार्थ भेजा गया था। समिति ने 16 दिसंबर 2018 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। सूत्रों ने बताया कि समिति की कुछ सिफारिशों को स्वीकार करते हुये विधेयक का प्रारूप नये सिरे से तैयार किया गया है। इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 और समान वेतन अधिनियम, 1976 इसमें समाहित हो जाएंगे। सरकार की योजना 32 केंद्रीय श्रम कानूनों को सरल कर उनकी जगह सिर्फ चार कानून बनाने की है, जिसमें वेतन संहिता अधिनियम पहला कानून होगा। सूत्रों के अनुसार, वेतन संहिता में न्यूनतम वेतन और समय पर वेतन भुगतान के लिए सेक्टर और वेतन की अधिकतम सीमा की शर्तों को समाप्त कर दिया गया है। अब हर सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी, चाहे उनका वेतन कितना ही क्यों न हो, इस संहिता के दायरे में आएंगे। इससे वेतन कानून के दायरे में आने वाले कार्यबल का प्रतिशत 40 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।
मध्यस्थता एवं सुलह कानून में संशोधन के लिए विधेयक लाएगी सरकार: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्यस्थता एवं सुलह कानून में संशोधन संबंधी विधेयक के प्रारूप को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहाँ हुई बैठक में विधेयक को मंजूरी दी गयी।
सूत्रों ने बताया कि इस विधेयक के पारित होने के बाद मध्यस्थों की नियुक्ति में तेजी आएगी। आवेदक सीधे उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त मध्यस्थता संस्थानों से संपर्क करेगा। उसे अदालतों से संपर्क करने की जरूरत नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के लिए उच्चतम न्यायालय और अन्य मामलों के लिए उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संस्थान मध्यस्थ तय करेंगे।
किराये की कोख के लिए नियम संबंधी विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी: मंत्रिमंडल ने किराये की कोख यानी सरोगेसी का वाणिज्यिक इस्तेमाल रोकने के लिए इसके नियमन संबंधी विधेयक के प्रारूप को बुधवार को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सरोगेसी (नियमन) विधेयक, 2019 के प्रारूप को मंजूरी दी गयी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को इसकी जानकारी दी। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी संसद का सत्र चल रहा है और इसलिए विधेयक को संसद में रखने से पहले इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती। सूत्रों ने बताया कि विधेयक में ‘किराये की कोख के वाणिज्यिक इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का प्रावधान है। इसमें भ्रूण या अंडाणु की खरीद-बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। हालांकि, संतान पैदा करने में अक्षम दंपतियों के लिए नैतिक सरोगेसी की अनुमति होगी। इसके लिए उन्हें कुछ अर्हताओं को पूरा करना होगा।