व्यापमं होगा बंद…..


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिया 15 दिन का समय
प्रशासनिक संवाददाता
भोपाल, 6 जुलाई।
कांग्रेस के वचन पत्र में शामिल व्यापमं के दंश को मिटाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने व्यापमं को बंद करने के लिए अधिकारियों को पंद्रह दिन का समय तय किया है। मुख्यमंत्री ने नियत समय में आलाधिकारियों को व्यापमं बंद करने का प्रस्ताव पेश करने को कहा है। मध्य प्रदेश की पूर्व बीजेपी सरकार में घोटालों के लिए बदनाम हुआ प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड व्यापमं को बंद करने की घोषणा कांग्रेस ने अपने वचन पत्र के माध्यम से की थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने व्यापमं को बंद करने के लिए पंद्रह दिन का समय तय किया है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को व्यापमं बंद करने का प्रस्ताव पेश करने को कहा है। चुनाव के पहले व्यापमं को बंद करने व्यापमं घोटाले की जांच के वचन पत्र के मुताबिक प्रोफेशनल एग्जाम संचालित करने वाली संस्था को खत्म करने की तैयारी कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को व्यापमं की जगह सरकारी सेवा में सीधी भर्ती के लिए नये सेटअप का प्रस्ताव भी तैयार करने को कहा है। दरअसल, व्यापमं घोटाले में आठ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, ये घोटाला देश भर में तत्कालीन शिवराज सरकार की बदनामी का बड़ा कारण बना था। इस मामले की सीबीआई जांच भी चल रही है और सैकड़ों लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया था। यहां तक कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और उनके स्टाफ के सहयोगियों को भी इस घोटाले में शामिल होने का आरोप लगते हुए जेल जाना पड़ा था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील कपिल सिब्बल और राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने तब सरकार पर आरोप लगाया था कि पहली बार जब्त हुए डेटा में व्यापमं के माध्यम से प्रवेश कराने वाले सिफारिशकर्ता के तौर पर 48 बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का नाम और मिनिस्टर वन, मिनिस्टर टू और मिनिस्टर थ्री के साथ शामिल था, लेकिन सीबीआई उन्हें बचा रही है। लेकिन देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने कई बार गलत हलफनामा देते हुए इस घोटाले की दिशा बदलने की कोशिश की है। व्यापमं के घोटाले ने पूरी एक पीढ़ी को बर्बाद कर दिया और अभी भी प्रदेश के युवाओं पर मुन्नाभाई जैसा तमगा लगता है। कमलनाथ सरकार ने अब व्यापमं को बंद कर नया सिस्टम बनाने की तैयारी तेज कर दी है। जाहिर है कि लोकसभा चुनाव के बाद अब मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरे एक्शन मोड में आ चुके हैं और ऐसे सभी मामलों पर त्वरित निर्णय ले रहे हैं, जिन्हें या तो कांग्रेस के वचन पत्र में शामिल किया गया है या फिर जिनसे सामाजिक सरोकार प्रभावित होते हैं।