पं. खुशीलाल के एमडी और बीएएमएस करेंगे रिसर्च

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की औषधियों पर राज्य सरकार करने जा रही शोध, प्रदेश के चार जिलों का हुआ चयन

ऋषिकांत सिंह (रजत) परिहार/9425002527
भोपाल, 9 जुलाई।
भारत सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के स्थानीय लोगों द्वारा औषधियों से किस तरह उपचार करके स्वस्थ हो रहे हंै। इस पर शोध करके एक डाक्यूमेंटेशन तैयार करने के लिए चार जिलों का चयन हुआ है। जहां पर पंडित खुशीलाल शर्मा स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के एमडी और बीएएमएस जाकर रिसर्च करके बकायदा एक डाक्यूमेंटेशन तैयार करेंगे।
जानकारी के अनुसार जबलपुर संभाग का मंंडला और डिण्डोरी जिला तथा शहडोल संभाग का शहडोल और अनूपपुर जिले का चयन किया है। इन जिलों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग बीमार पडऩे या गंभीर चोट लगने पर औषधियों से उपचार करके कैसे स्वस्थ हो रहे हैं, इस पर सरकार शोध करेगी। इस कार्य के लिए राजधानी के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय को नोडल एजेंसी बनाया है। इस संबंध में पंडित खुशीलाल शर्मा स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ उमेश शुक्ला से चर्चा की तो उन्होंने बताया ट्राइबल विभाग ने चार जिलों में शोध करके डाक्यूमेंटेशन तैयार करने के लिए 6 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। पंडित खुशीलाल शर्मा महाविद्यालय आयुर्वेद डॉक्टर्स इन चार जिलों में आदिवासियों के बीच रहकर उनकी उपचार पद्धति पर शोध करेंगे।
13 की मांग पर लेकिन मिले 6 करोड़: तीन साल तक चलने वाले इस शोध कार्य पर वैसे तो कुल 13 करोड़ रूपए खर्च होना संभावित है, लेकिन फिलहाल पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय को 6 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि भी पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय पहले साल 4 करोड़ रूपए और दूसरे व तीसरे साल 1-1 करोड़ रूपए खर्च कर पाएंगे।

इनका कहना है
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्थानीय लोगों द्वारा औषधियों से बीमारियों को कैसे ठीक कर रहे हंै और किन-किन औषधियों का उपयोग किस-किस बीमारी के उपचार में हो रहा है। इस पर पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय के डॉक्टर्स शोध करके एक डाक्यूमेंटेशन तैयार करेंगे।
शिखा दुबे, एसीएस, आयुष विभाग