अन्य प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति बदतर


मनरेगा में दर्ज हैं प्रदेश के 68.25 लाख परिवार, सर्वेक्षण में स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में भी राज्य की स्थिति चिंताजनक

भोपाल, 9 जुलाई। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मध्यप्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में प्रदेश को हर क्षेत्र में देश के दूसरे प्रदेशों की तुलना में काफी पिछड़ा बताया गया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि राज्य की सामाजिक, आर्थिक विकास की समीक्षा करने पर स्थिति स्पष्ट है कि प्रदेश मानव विकास के मानकों पर देश एवं समान परिस्थितियों वाले राज्यों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है। गरीबी उन्मूलन के आंकड़े और स्वास्थ्य सूचकांकों को राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष लाना एक प्रमुख चुनौती है। सर्वेक्षण के अनुसार शिक्षा और पोषण के क्षेत्र मे भी राज्य की स्थिति बेहतर नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों ने भाजपा के 15 वर्षों के सरकार की पोल खोल दी है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में
अर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के जो तथ्य सामने आए हैं, उसने प्रदेश भाजपा शासनकाल में किए गए दावों की पोल खोल दी है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति आय देश एवं समान परिस्थिति वाले राज्यों की तुलना में कम है। मध्यप्रदेश को कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों की श्रेणी 27वें नंबर पर रखा गया है। वित्त वर्ष 2018-19 के प्रचलित मूल्य पर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 90 हजार नौ सौ 98 रूपए थी, जो देश की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 26 हजार छह सौ 99 रूपयों का मात्र 71.8 प्रतिशत है। देश के प्रमुख राज्यों में बिहार, झारखंड, ओडि़सा और उत्तरप्रदेश को छोड़कर शेष राज्यों की प्रति व्यक्ति आय मध्यप्रदेश से अधिक है।
गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा: सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले व्यक्तियों का अनुपात 21.92 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 31.65 प्रतिशत है। पूरे देश में उत्तरप्रदेश और बिहार राज्यों को छोड़कर मध्यप्रदेश में सर्वाधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे हंै, जिनकी संख्या दो करोड़ 34 लाख है।
सिर्फ 30 प्रतिशत लोग ही करते हैं स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल: आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि मध्यप्रदेश के केवल 30 प्रतिशत लोग ही खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। बाकी लोग आज परंपरागत ईंधन का इस्तेमाल करते हैं।
23 प्रतिशत घरों में नल से मिलता है पेयजल: केंद्र सरकार ने पिछले पांच साल में भले ही नल-जल योजना पर विशेष फोकस किया, लेकिन इसके बाद मध्यप्रदेश में मात्र 23 प्रतिशत घरों में ही नल से पेयजल मिल रहा है।
कृषि मजदूरी 210 रूपए देश के अन्य राज्यों की तुलना सबसे कम: कृषि मजदूरी के मामले में भी मध्यप्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा में है। यहां कृषि मजदूरी के लिए 210 रूपए प्रतिदिन मिलते हैं।
मनरेगा में दर्ज हैं 68.25 लाख परिवार : मध्यप्रदेश में 68 लाख परिवार ऐसे हैं, जो मनरेगा के तहत पंजीकृत हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में गरीब परिवार रहते हैं, जिनके लिए प्रदेश में रोजगार की सुविधा नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मध्यप्रदेश में 68.25 लाख परिवार मनरेगा में रजिस्टर्ड हैं।
शिशु मृत्यु दर में भी मध्यप्रदेश की स्थिति चिंताजनक: शिशु मृत्यु दर के मामले में भी मध्यप्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य में प्रति हजार जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर 47 है, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर 33 प्रति हजार है। राज्य में मातृत्व मृत्यु दर प्रति एक लाख प्रसव पर 173 है, जो राष्ट्रीय दर 130 और अधिकतर राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 77 (वर्ष 2011) है, जो कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में असम को छोड़कर सर्वाधिक है।
52.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से पीडि़त : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 52.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से पीडि़त हैं। महिला स्वस्थ्य के क्षेत्र में भी प्रदेश की स्थिति ठीक नहीं है।