बहुमत का मौका आता है विपक्ष भाग जाता है: कमलनाथ

स्व. शीला दीक्षित को सदन में श्रद्धांजलि के मुद्दे पर अध्यक्ष की भूमिका से प्रसन्न मुख्यमंत्री और नाराज डॉ. नरोत्तम मिश्रा, कोहराम में विधानसभा स्थगित

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति की कैमिस्ट्री जबरदस्त है। दोनों मिलकर इस बात के लिए संकल्पित हैं कि मध्यप्रदेश विधानसभा की गौरवशाली मर्यादाएं, परंपराएं और संचालन की व्यवस्था सदन में निर्धारित मापदंडों के आधार पर होनी चाहिए। इसी के चलते जब आज विधानसभा सदन में देर रात पूर्व संसदीय कार्य मंत्री भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का मुद्दा उठाया तो सदन में कोहराम मच गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सदन के भीतर पूरी संजीदगी से कहा कि वे विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति लेकर स्व. श्रीमती शीला दीक्षित की अंत्येष्टि में दिल्ली गए थे और अभी देर शाम ही लौटे हैं, इसलिए उनको श्रद्धांजलि देने का मामला कल की कार्यसूची में रखकर सदन में श्रद्धांजलि देना उचित होगा।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सदन में विभिन्न विभागों के बजट बहस को रोका नहीं जाना चाहिए, उसे पारित किया जाना चाहिए। लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस बात पर अड़े रहे कि श्रद्धांजलि का विषय आ ही गया है तो श्रद्धांजलि दे देनी चाहिए, लेकिन नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा नरोत्तम मिश्रा के समर्थन के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के नेता मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आग्रह किया है कि स्व. श्रीमती शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने का मुद्दा कल की कार्यसूची में शामिल करके ही रखा जाना चाहिए। उनके इस कथन पर विधानसभा अध्यक्ष के नाते दी गई व्यवस्था को पक्ष और विपक्ष दोनों स्वीकार करेंगे तो उचित होगा। विधानसभा अध्यक्ष की इस व्यवस्था से नाराज प्रतिपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया और दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ की उपस्थिति में वित्त मंत्री तरुण भानोत ने आज निर्धारित जितने विभागों के बजट पर चर्चा थी, उसे पारित करा लिया। वैसे देखा जाए तो 63 साल की विधानसभा में पहली बार श्रद्धांजलि के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने कोहराम मचा दिया और सदन बजट पर चर्चा करने की बजाय बिना चर्चा के ही बजट प्रस्तावों को पारित करते हुए सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन से बाहर निकलने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष के सामने राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि के इस सवाल पर कि आज विपक्ष का रवैया आपको कैसा लगा मुख्यमंत्री जी…..? मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्पष्ट कहा कि हम सदन में मर्यादाएं और परंपराओं को स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष सदन से बार-बार बाहर भागने की कोशिश करता है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों होता है तो उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि जब-जब बहुमत साबित करने का मौका आता है तो विपक्ष सदन से बाहर भाग जाता है, यह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की व्यवस्था और निर्देश सदन के हर सदस्य को मानना चाहिए, मैं इस बात का पक्षधर हूं और विपक्ष को ही अपनी मर्यादा त्यागना नहीं चाहिए। जहां तक सवाल है संवेदनशीलता का तो स्व. श्रीमती शीला दीक्षित हमारी वरिष्ठ नेता रही हैं उनके लिए श्रद्धासुमन हमेशा हमारी ओर से प्रगट होते रहेंगे, लेकिन सदन के अंदर विधानसभा अध्यक्ष की व्यवस्था और आदेश का परिपालन करने से इसलिए मना नहीं किया जा सकता कि जो विषय कल आने वाला है, उसे अध्यक्ष ने नियम और परंपराओं के अंतर्गत कल के लिए सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष 100 प्रतिशत सही हंै, विपक्ष को सदन के संचालन में हठयोग के बजाय सहयोग करना चाहिए।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।