उमा भारती की सुरक्षा अधिकारी रह चुकीं प्रियंका मिश्रा कमलनाथ सरकार की छबि निखारेंगी?


विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के पुलिस अधिकारियों को सरकार कोई भी काम सौंप दे, वे करने को तैयार रहते हैं, कभी पलटकर यह भी नहीं कहते कि हम इस काम के लिए अनुभवी नहीं हैं, वे तो सीधे हस्तिनापुर सिंहासन के आदेश का पालन करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। और जब मामला मध्यप्रदेश सरकार में जनसंपर्क महकमे की जिम्मेदारी संभालने का मामला हो तो सबसे पहले पुलिस अधिकारी सामने आ जाते हैं, और जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी जिसमें उन्हें मीडिया से बेहतर संवाद स्थापित करना है और सरकार की छबि को निखारना है, इस चुनौती को निभाने में जुट जाते हैं। कमलनाथ सरकार भी ऐसे अधिकारियों के प्रति बिना राग-द्वेश के पदस्थापना करने में पीछे नहीं रहते। कौन नहीं जानता कि प्रियंका मिश्रा मध्यप्रदेश राज्य पुलिस सेवा की चुनिंदा बेहतर पुलिस अधिकारियों में गिनी जाती हैं और उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती की सुरक्षा की जिम्मेदारी को जितनी बखूबी से निभाया है, आज तक भुलाया नहीं गया, और तो और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद तिरंगा यात्रा में प्रियंका मिश्रा उनके साथ पूरे समय थीं। यह मामला चौंकाने वाला भी है और आश्चर्य में डालने वाला भी कि जिस प्रियंका मिश्रा का उमा भारती से लेकर केंद्र सरकार में 2014 से बेहद प्रगाढ़ता थी, उन्हें राज्य सरकार ने जनसंपर्क विभाग का दिल्ली में अपर संचालक के पद पर नियुक्त कर दिया है। अब प्रियंका मिश्रा कमलनाथ सरकार की छबि निखारेंगी।
राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने आज प्रियंका मिश्रा से नई दिल्ली में दूरभाष पर बातचीत की और सवाल किया कि मीडिया से संवाद स्थापित करने की चुनौती को आप कैसे संभाल पाएंगी। उनका जवाब था कि केंद्र सरकार में जब वे फिल्म डिवीजन में पदस्थ थीं, तब पत्रकारों से उनके संबंध स्थापित हो चुके थे और उनके लिए यह कोई नया काम नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन और उनके प्रचार-प्रसार के तरीकों को समझते हैं तथा राजनीति से हम कोसों दूर हैं। सरकार ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, हम उसे बेहतर ढंग से निभाने की कोशिश करेंगे। दूसरी ओर जब मध्यप्रदेश से जुड़े दिल्ली स्थित मीडिया के एक वर्ग से हमने बातचीत की तो उनका कहना था कि जनसंपर्क विभाग में तो अब ऐसा हो गया है कि चाहे पुलिस का अधिकारी हो या वन विभाग का अधिकारी हो, कोई भी काम संपादित कर सकता है, लेकिन एक पत्रकार ने कहा कि पत्रकारों को समझना और उनसे बेहतर संवाद स्थापित करने का काम तराजू में मेढक तौलने जैसा है पता नहीं, प्रियंका मिश्रा दिल्ली में पत्रकारों के समूहों को किस तरह साध पाएंगी, यह तो वक्त ही बताएगा। हालांकि यह वाक्या कोई नया नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने रिश्तेदार युवा आईपीएस अधिकारी आशुतोष सिंह को जनसंपर्क संचालनालय में संचालक बनाकर पत्रकारों से बेहतर रिश्ते स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंप चुके हैं। परिणाम की तो उन्होंने भी चिंता नहीं की थी।


विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।