कांग्रेस का हर विधायक दिल से चाहता है कमलनाथ सरकार 5 साल चले


दिग्विजय-सिंधिया चाहते हैं सरकार दिल्लगी से चले, लेकिन इतिहास में विधायकों को पहली बार जितनी इज्जत मिली है, उतनी पहले कभी नहीं मिली, इसलिए

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार को 9 महीने ही हो पाए हैं, लेकिन 15 साल के वनवास के बाद मिली सत्ता का सुख भोगने की बजाय नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों को लेकर बेवजह तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थक विधायकों को दिग्विजय सिंह नहीं रोक पा रहे हैं तो दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य ङ्क्षसधिया अपने समर्थक विधायकों द्वारा उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पहल से बहादुरी महसूस कर रहे हैं।
राजनैतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मध्य्रदेश को इतिहास में कमलनाथ जैसा अनुभवी नेता मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार मिला है, जिसका फायदा राज्य को बेहतर ढंग से मिलेगा, इसकी उम्मीद सभी विधायकों को है। और तो और कांग्रेस के 100 से अधिक विधायकों का स्पष्ट मत है कि मध्यप्रदेश के इतिहास में किसी मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ ने जितनी इज्जत विधायकों को दी है, आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है। कांग्रेस का हर विधायक चाहता है कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार पूरे 5 साल दिल से चले, ताकि मध्यप्रदेश का विकास रथ जो पिछले 15 वर्षों से रुका हुआ था उसे रफ्तार ऐसी मिले कि जनता देखती रह जाए। परंतु दुर्भाग्य देखिए कि दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री कमलनाथ को समर्थन देने का जो तरीका अपनाया है, उससे कांग्रेस की राजनीति में मनोरंजन का दौर चल पड़ा है। वहीं दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह दावा कि मध्यप्रदेश में उनकी वजह से कांग्रेस सत्ता में आई है, इसलिए उनकी भागीदारी बराबर की होनी चाहिए। इसी के चलते सिंधिया समर्थकों का धरना-प्रदर्शन, यज्ञ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए बार-बार उठाई जाने वाली मांग उनकी राजनीति को अपरिपक्वता से जोड़कर देखा जा रहा है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया महाराजा नहीं बल्कि रूठे हुए सोनिया गांधी के ऐसे दत्तक पुत्र बन गए हैं, जो समर्थकों के धरने-प्रदर्शन से सोनिया गांधी को मना लेंगे, लेकिन वे भूल जाते हैं कि गांधी परिवार में उनके पिता स्व. माधवराव सिंधिया की वखत और इज्जत कितनी थी। माधवराव सिंधिया ने कभी इस तरह की राजनीति को हथियार नहीं बनाया कि सत्ता की भागीदारी के लिए अपने समर्थकों से धरने और प्रदर्शन करवाते, परंतु ज्योतिरादित्य यह समझने की भूल कर रहे हैं कि गांधी परिवार में ऐसी राजनीति पसंद नहीं की जाती। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के संपादक होने के नाते 45 वर्षों की पत्रकारिता का अनुभव यह कहता है कि जब स्व. अर्जुन सिंह 1980 में पार्टी के अंदर बहुमत में नहीं थे, तब उस समय कमलनाथ ने अपने 36 विधायकों का समर्थन देकर उन्हें मुख्यमंत्री बनवाया, लेकिन कमलनाथ मध्यप्रदेश के मंत्रालय में आकर कभी अर्जुन सिंह के कार्यकाल में उधम नहीं मचाया और न ही नौकरशाहों की कभी कोई बैठक ली। और तो और, सार्वजनिक रूप से कभी यह भी नहीं कहा कि अर्जुन सिंह कमलनाथ की वजह से मुख्यमंत्री बने। यही वाक्या जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री बने, तब भी दोहराया गया था। अर्जुन सिंह तो चाहते थे कि दिग्विजय की बजाय सुभाष यादव को मुख्यमंत्री बनाया जाए तब दिग्विजय, अर्जुन सिंह से नाराज हो गए और कहने लगे कि जब मेरा वक्त आता है तब अर्जुन सिंह जी ऐसा ही करते हैं आप। लेकिन उस समय भी कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई और दिग्विजय सिंह 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे, परंतु कमलनाथ ने कभी मंत्रालय में आकर अधिकारियों की बैठक नहीं ली और न ही कोई निर्देश देने की कोशिश की, यह थी उनकी राजनैतिक गंभीरता। और आज वही दिग्विजय सिंह मंत्रालय में बैठकें ले लेते हैं, सैकड़ों चिट्ठियां लिखकर मंत्रियों को तनाव में रख लेते हैं, और दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया जब भोपाल आते हैं तो वे भी दल-बल सङ्क्षहत मुख्यमंत्री के कक्ष में कुछ इस तरह प्रवेश करते हैं जैसे यदि नौकरशाहों ने उनकी नहीं सुनी तो खैर नहीं होगी। इस तरह की राजनीति का अब बुरा असर पूरी सरकार पर पडऩे लगा है, जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ इसके बावजूद भी तनाव में नहीं हैं और वे कहते हैं कि कभी-कभी कांग्रेस में मनोरंजन का दौर होता है, चलता है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने आज मुख्यमंत्री कमलनाथ से एक संक्षिप्त मुलाकात में जब यह सवाल पूछा कि आखिर आपसे नाराज कौन है? तो मुख्यमंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा मुझसे कोई नाराज नहीं है, मेरी सरकार में विधायकों की बहुत इज्जत है और मैंने हर विधायक का मान रखा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता के हित में, युवा बेरोजगारों के हित में और किसानों के हित में तथा पिछड़े एवं आदिवासियों के हित में कम समय में बड़े-बड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने आज किसी प्रकार का इंटरव्यू देने से मना कर दिया, लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज कमलनाथ सरकार की कार्यशैली निश्चित रूप से नौकरशाहों में अनुशासन और क्षमता से अधिक काम करने की परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया है। जहां तक सवाल है वनमंत्री उमंग सिंघार के बयान को लेकर राजनीति का तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी के बयान जिसमें उन्होंने कहा है कि उमंग सिंघार भाजपा के दलाल हैं, आग में घी डालने का काम है, इसकी घोर निंदा होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से सरकार को अस्थिर करने की बदबू फैलती है। वैसे कुरैशी के अनुभव और वरीयता के आधार पर इस तरह के बयानों की अपेक्षा तो नहीं थी, लेकिन इसका फायदा मध्यप्रदेश में विपक्ष की भूमिका में भारतीय जनता पार्टी को जरूर मिलेगा। इस रिपोर्ट का लब्बेलुआब यह है कि कमलनाथ की सरकार को कांग्रेस में 100 से अधिक विधायक दिल से चाहते हैं कि पूरे 5 साल चले और जो नेता अनावश्यक बखेड़ा कर रहे हैं या दिल्लगी से सरकार की खिल्ली उड़ा रहे हैं, इस पर यदि कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी हस्तक्षेप करें और दिग्विजय सिंह तथा सिंधिया को बुलाकर कमलनाथ के सामने समझाइश के साथ निर्देश दें कि गुटबाजी बंद करें, सरकार को ठीक से काम करने दें तो शायद मध्यप्रदेश में एक स्थिर सरकार जो बहुमत से अधिक संख्या में है, मध्यप्रदेश की विकास की दिशा को अंजाम तक पहुंचाने में सफल हो जाएगी, ऐसा माना जा रहा है।
विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।