मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में फिलहाल नहीं होगा कोई बदलाव


कमलनाथ के ही पास रहेगी दोहरी भूमिका, आलाकमान ने निकाला रास्ता
सुनील दत्त तिवारी
भोपाल, 6 सितम्बर।
कौन बनेगा प्रदेश अध्यक्ष के सवाल को हल करने से पहले ही मचे घमासान के बीच अब कांग्रेस आलाकमान ने फिलहाल प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व के परिवर्तन को आगामी कुछ महीनों के लिए टाल दिया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तय कर दिया है कि जब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का निर्वाचन नहीं हो जाता, तब तक मध्यप्रदेश में भी नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि एक पखवाड़े से ज्यादा समय से प्रदेश के कांग्रेस नेताओं में नए अध्यक्ष को लेकर चल रही खींचतान पर अब विराम लग जाएगा। कमलनाथ को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी अभी आगे भी उठानी होगी।
दरअसल, मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कमलनाथ ने खुद संगठन के मुखिया की जिम्मेदारी छोडऩे का निर्णय लिया था, लेकिन उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया गया था। हालांकि, पार्टी में नए अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गयी थी, लेकिन राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोडऩे की जिद की वजह से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इधर पिछले कुछ दिनों से प्रदेश अध्यक्ष को लेकर खींचतान फिर शुरू हो गयी। इसकी शुरुआत तब हुई, जब श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के आवास पर सिंधिया समर्थक मंत्रियों की बैठक हुई, उसके बाद से ही लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपे जाने का दबाव बनाया जाने लगा। फिर कई दावेदार भी सामने आने लगे। हाल ही में उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के बीच अपरोक्ष वाद-विवाद को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि सिंघार ने इसके लिए कारण कुछ और ढूंढा था। प्रदेश कांग्रेस में मचे कलह की रिपोर्ट दिल्ली दरबार तक पहुंच गयी। बताया जा रहा है कि इस मामले को सोनिया गांधी ने बड़ी गंभीरता से लिया और सबसे पहले सार्वजनिक बयानबाजी को तत्काल प्रभाव से बंद करने को कहा। उन्होंने प्रदेश के प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया के माध्यम से मंत्रियों के लिए आचार संहिता भी बनवाई है और ताकीद किया है कि मंत्रिमंडल के सहयोगी मीडिया में कोई भी वक्तव्य केवल अपने विभाग से सम्बंधित योजनाओं और उपलब्धियों की ही दें। राजनैतिक बयानबाजी से बचें, प्रदेश का मीडिया विभाग और मुख्यमंत्री ही राजनैतिक बयान के लिए अधिकृत किए गए हैं। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के बड़े नेताओं से प्रदेश के मामले में विचार किया और यह निष्कर्ष सामने आया है कि अभी प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री कमलनाथ ही संगठन की जिम्मेदारी संभालें और जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक कम से कम मध्यप्रदेश में तो इस ज्वलनशील मसले को दूर ही रखा जाए। सूत्रों के मुताबिक अब कम से कम छह महीने या उससे ज्यादा का समय लगेगा, इस पूरी प्रक्रिया में और इस दौरान मामले को एकदम शांत करते हुए नए सिरे से संगठन की रूपरेखा तय की जाएगी।

इनका कहना है
अभी तो कमलनाथ जी ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उनका इस्तीफा स्वीकार ही नहीं किया गया है। पार्टी को रिपोर्ट दी गई है। श्रीमती सोनिया गांधी को निर्णय लेना है।
दीपक बावरिया
प्रभारी महासचिव, मध्यप्रदेश कांग्रेस