दिग्विजय-सिंधिया के दबाव से मुक्त कमलनाथ के हौसले बुलंद

मंत्री उमंग सिंघार के बयान से मचे बवाल पर लगा विराम, आज मुख्यमंत्री कमलनाथ को कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने गंभीरता से सुना और मामला अनुशासन समिति को भेज दिया, इसलिए अब तय है कि

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने राजनैतिक जीवन के 45 वर्षों में जितना दबाव और तनाव पिछले 6 महीनों में देखा और सहा, वैसा कभी उनके साथ नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के उत्तर-दक्षिण की राजनीति में यूं कहा जाए कि कमलनाथ की सज्जनता पिस गई और वह ऊब गए लेकिन निराश बिल्कुल नहीं हुए। उन्हें पता था कि जब बात कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक पहुंचेगी तो अनावश्यक विवादों पर विराम लग ही जाएगा और आज यही हुआ। गाहे-बगाहे अपने समर्थकों के द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ पर दिग्विजय सिंह तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह दबाव कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस सत्ता में इन दोनों नेताओं की वजह से आई है, कांग्रेस का 15 वर्ष का वनवास समाप्त हुआ है, इसलिए मुख्यमंत्री को उनकी हर बात माननी पड़ेगी, जो वह कहें। इसी के चलते मध्यप्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी से सिरफुटौवल की नौबत आ गई और पहली बार दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता को बैकफुट पर आना पड़ा। दूसरी ओर कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अति उत्साह में मुख्यमंत्री कमलनाथ के ऊपर दबाव बनाए रखने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज होने की राजनीति का सहारा ले लिया। सिंधिया के समर्थक मंत्रियों ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए भूख हड़ताल, धरना-प्रदर्शन और उपवास सब हथकंडे अपना लिए। मतलब दिग्विजय-सिंधिया समर्थकों के एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने का सिलसिला सड़क पर उतर गया, जिससे आहत प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फैसला किया कि वे कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से मिलकर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की हो रही रोज-रोज बदनामियों से अवगत कराकर यह अनुरोध करेंगे कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखना है और प्रदेश के विकास में तथा कांग्रेस के आधार को मजबूत करने में कांग्रेस की अहम भूमिका जनता के सामने स्थापित करनी है तो दिग्विजय-सिंधिया द्वारा की जा रही राजनीति पर रोक लगना चाहिए। समझा जाता है कि आज श्रीमती सोनिया गांधी ने कमलनाथ को पूरी गंभीरता से सुना और आश्वस्त भी किया कि कांगे्रस का नेता कितना भी बड़ा हो, उसे किसी ऐसी राजनीति के लिए इजाजत नहीं मिलेगी, जिससे कांग्रेस कमजोर हो। श्रीमती सोनिया गांधी ने मंत्री उमंग सिंघार के बयान और दिग्विजय के द्वारा लिखे गए पत्र के कारण उपजे अमर्यादित राजनीति को तुरंत रोकने के लिए मामले को अनुशासन समिति को सौंप दिया है। उल्लेखनीय है कि विवादों के कारणों का छानबीन कर अनुशासन समिति के अध्यक्ष एके अंटोनी श्रीमती गांधी को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे, उसके बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष का फैसला भी होगा। 10 सितंबर को श्रीमती गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। समझा जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सुनने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की नियुक्ति का भी निर्णय कर लिया जाएगा। श्रीमती सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेश में दिग्विजय-सिंधिया गुट द्वारा की जा रही कांग्रेस की राजनीति को गंभीरता से लिया है और साफ कहा है कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, नेता कितना बड़ा हो, मंत्री किसी भी गुट का हो, सख्ती से निपटा जाएगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने श्रीमती गांधी से मिलने के बाद इस बात की पुष्टि की कि कांग्रेस का विवाद आज से थम गया है, क्योंकि श्रीमती गांधी ने अनुशासन समिति को मामला सौंप दिया है। कमलनाथ के चेहरे का नूर बता रहा था कि कमलनाथ के हौसले बुलंद हो गए। इधर भोपाल में, ग्वालियर में, इंदौर में, जबलपुर में सभी स्थानों पर श्रीमती सोनिया गांधी के कड़े तेवर का संकेत पहुंच चुका है। शाम 5 बजे के पहले राज्य मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के गलियारों में इस बात की चर्चा गर्म रही कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को मिला फ्री-हैंड एक अच्छी खबर है। असमंजस की स्थिति में रहने वाले नौकरशाहों के चेहरे भी खिल उठे हैं। एक प्रमुख सचिव स्तर के नौकरशाह ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यह भी टिप्पणी कर दी कि दिग्विजय सिंह जी को अपनी वरीयता का ध्यान पहली बार नहीं रहा और उन्होंने मंत्री को चिट्ठी लिखकर बखेड़ा कर दिया वरना सब कुछ ठीक ही था। इस तरह की चर्चाओं से पूरा मंत्रालय आज मशगूल था, लेकिन शाम 5 बजे के बाद सबके हौसले बुलंद हो गए।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।