डॉ. राजौरा उद्योगपतियों को तराशेंगे, संजय शुक्ला जनसंपर्क में क्षमता से अधिक काम दिखाएंगे


मुख्यमंत्री ने मुख्यसचिव की सलाह मानी, जनसंपर्क मंत्री भी हुए सहमत
विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का रातों-रात जनसंपर्क विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा (1990) को जनसंपर्क विभाग से मुक्त करने का फैसला चांैकाने वाला साबित हुआ। यूं कहा जाए कि मुख्यमंत्री कमलनाथ मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती (1982) की सलाह पर अक्षरश: अमल करते हैं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वाक्या ऐसा हुआ कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती से कहा था कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित होने वाले ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीटÓ को लेकर संजीदगी से काम किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि वे ही उद्योगपति चाहे देशी हों या विदेशी, ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीटÓ में आएं तो उनका निवेश धरातल में उतरे, जो पिछले 15 वर्षों में नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिकीकरण का काम सुदृढ़, सुनियोजित ढंग से नई उद्योग नीति के आधार पर होना चाहिए, जिसका लाभ प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को मिलेगा, यदि अच्छे उद्योग आएंगे। समझा जाता है कि मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री से कहा कि डॉ. राजेश राजौरा को अच्छे उद्योगपतियों को तराशने में अधिक से अधिक समय देने के लिए जनसंपर्क से मुक्त किया जाए, ताकि ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीटÓ पूरी तरह सफल हो। मुख्यमत्री ने जब मुख्य सचिव से पूछा कि जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी किसे दी जाए तो, मुख्य सचिव ने कहा कि संजय कुमार शुक्ला (1994) एक क्षमतावान नौकरशाह हैं, उनको ‘अंडर यूटिलाइजÓ किया जा रहा है, यदि शुक्ल जनसंपर्क में आएं तो जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा और प्रमुख सचिव दोनों मिलकर सरकार की बेहतर छवि बनाएंगे।
समझा जाता है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव दोनों की एक राय को पलक झपकते ही जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने मंजूर कर लिया। अब डॉ. राजेश राजौरा उद्योगपतियों को तराशने संभवत: 6 देशों का दौरा भी करेंगे और मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के विदेशों में अप्रवासी भारतीयों एवं विदेशी उद्योगपतियों से बैठकें भी आयोजित करेंगे। इधर संजय कुमार शुक्ला सोमवार को जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि कमलनाथ सरकार में मुख्य सचिव की सलाह और मंत्रियों की पसंद का बड़ा महत्व है। शायद इसी क्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी और आदिम जाति विभाग की आयुक्त दीपाली रस्तोगी सहित 15 ऐसे नौकरशाह हैं, जिनकी अपने-अपने विभाग के मंत्री से पटरी नहीं बैठ रही है, उन्हें इधर-उधर किया जाएगा। इंतजार है मंत्रियों द्वारा आगामी 12 सितंबर, 2019 को होने वाली कैबिनेट के बाद अथवा मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों की राय जानने के बाद मुख्यमंत्री क्या-क्या निर्णय करेंगे। समझा जाता है कि कल कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद मुख्यमत्री कमलनाथ आत्मविश्वास से लबरेज हैं। वे भोपाल आकर मत्रियों से ‘वन-टू-वनÓ बात करके उन विभागों के प्रमुख सचिवों के मामले में निर्णय लेंगे, जिनकी अपने मंत्रियों से पटरी नहीं बैठ रही है।

विशेष रिपोर्ट के लेखक इस पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं।